दीपक चाहर की चमक भी भारत को क्यों नहीं दिला सकी जीत

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- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
दीपक चाहर की शानदार पारी भी भारत को हार से नहीं बचा सकी और केपटाउन में खेले गए तीसरे वनडे में उसे चार रन के छोटे से अंतर से हार मिली.
इस जीत के साथ ही दक्षिण अफ़्रीका ने तीन वनडे मैचों की सिरीज़ में भारत का क्लीन स्वीप कर दिया.
भारत के लिए इस सिरीज़ में अपना पहला वनडे मैच खेल रहे दीपक चाहर ने तो एक समय अपनी टीम को जीत की दहलीज़ पर पहुंचा ही दिया था. ऐसा लग रहा था कि उन्होंने जिस तरह से पिछले साल श्रीलंका के ख़िलाफ़ नाबाद 69 रन बनाकर भारत को हार की स्थिति से निकालकर जीत दिलाई थी, वे उस प्रदर्शन को यहां भी दोहरा सकते हैं. लेकिन वे इस मैच में जीत की दहलीज़ पर पहुंचकर भी फिसल गए.
भारत के जयंत यादव के रूप में सातवां विकेट 223 रन पर खोकर मैच में कमज़ोर हालत में पहुंचने के बाद दीपक चाहर ने 54 रन बनाकर जीत के हालात बनाए. लेकिन टीम का स्कोर जब 278 रन था तब वो आउट हो गए. उसके बाद 288 रन का पीछा कर रही भारतीय टीम 283 रन तक ही पहुंच सकी.
इस सिरीज़ में क्लीन स्वीप होने से भारतीय टीम की कई ख़ामियां सामने आई हैं. भारत के लिए 2023 की विश्व कप टीम को अंतिम रूप देने का समय अब आ गया है. ऐसे में उसे सिरीज़ की ख़ामियों को दूर करके अपनी टीम तैयार करने की ज़रूरत है.

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सही शॉट चुनने की ज़रूरत
पिछले तमाम मौक़ों पर देखा गया कि भारतीय बल्लेबाज़ सही शॉट न चुन पाने की वजह से अपने विकेट गंवाते रहे हैं. राहुल द्रविड़ जैसे कोच के रहते इस तरह की कमी दिखने पर थोड़ी हैरत होती है.
यह भी समझने की ज़रूरत है कि किस समय किस तरह की बल्लेबाज़ी करनी है. इस वनडे मैच को ही लें तो पंत से जब विकेट पर पहले टिकने की ज़रूरत समझी जा रही थी, तब वे गेंद उड़ाने के चक्कर में अपना विकेट खो बैठे.
इसी तरह विराट कोहली के आउट होने के बाद श्रेयस अय्यर और सूर्यकुमार यादव से टीम को जीत की ओर ले जाने की ज़रूरत समझी जा रही थी. यह जोड़ी 39 रन की साझेदारी करके इस तरफ़ बढ़ती नज़र आ रही थी कि तभी पहले श्रेयस अय्यर और फिर सूर्यकुमार यादव भी ग़लत शॉट खेलने के चलते अपने विकेट खो बैठे.
हक़ीक़त तो यही थी कि श्रेयस अय्यर और सूर्यकुमार यादव दोनों के पास ये मैच जिताकर मैच विनर का ठप्पा लगाने का अच्छा मौक़ा था. लेकिन दोनों ही इस ज़िम्मेदारी को निभाने में पूरी तरह असफल रहे. श्रेयस की 26 और सूर्यकुमार यादव की 39 रन की पारी कोई ख़ास मायने नहीं रख पाती क्योंकि ज़रूरत फ़िनिश लाइन को पार करने की क्षमता दिखाने की थी.

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ऋषभ पंत को लेनी होगी और ज़िम्मेदारी
ऋषभ पंत काफ़ी समय बाद वनडे में आज़माए जा रहे थे. लेकिन वे सिर्फ़ दूसरे वनडे में अच्छी पारी खेलने के अलावा बाकी दो वनडे मैचों में प्रभावित नहीं कर सके.
तीसरे वनडे में शिखर धवन के आउट होने के बाद उन्हें विराट कोहली के साथ लंबी साझेदारी बनाने के लिए पहले विकेट पर टिकने की ज़रूरत थी, लेकिन उन्होंने आते ही ग़ैर ज़िम्मेदाराना शॉट खेलकर अपना विकेट गंवा दिया.
पंत को इस सिरीज़ में चौथे नंबर पर आज़माया जा रहा है. वे यदि इस स्थान पर अपनी जगह पक्की करना चाहते हैं तो उन्हें और ज़िम्मेदारी से बल्लेबाज़ी करनी होगी. वे इस सिरीज में इस ज़िम्मेदारी को निभाने में सफल नहीं रहे.
यदि वे ऐसा ही प्रदर्शन करते हैं तो टीम प्रबंधन एक बार फिर केएल राहुल से विकेटकीपिंग करा सकता है. इस स्थिति में उनकी जगह ही नहीं बन पाएगी. पंत को विकेटकीपिंग में भी थोड़ा सुधार करने की ज़रूरत है. कई बार एक कैच छोड़ना भी मैच में भारी पड़ जाता है.

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अगले विश्व कप के लिए टीम बनाने की ज़रूरत
आईसीसी विश्व कप 2023 की शुरुआत में भारत में ही होना है. इस विश्व कप तक भारत को 14-15 वनडे ही खेलने हैं. इसलिए अब समय आ गया है कि इसके लिए टीम को अभी से अंतिम रूप दिया जाए. ऐसा करने से खिलाड़ियों को अपने आप को मानसिक रूप से तैयार करने का मौक़ा मिल सकेगा.
इसके लिए सबसे बड़ी ज़रूरत गेंदबाज़ी अटैक को तय करने की है. जहां तक बात तेज़ गेंदबाज़ी की है, तो रेड बॉल में तो भारत का पेस अटैक अभी सही हालत में है. लेकिन व्हाइट बॉल क्रिकेट में पेस अटैक थोड़ा कमज़ोर नज़र आता है. तीसरे वनडे में प्रसिद्ध कृष्णा को मौका दिया गया और वह ये साबित करने में सफल रहे कि वे डेथ ओवर्स में भी अच्छी गेंदबाज़ी करने की क्षमता रखते हैं.
दीपक चाहर अपनी ऑलराउंड क्षमता को साबित करने में सफल रहे. उन्हें आख़िरी वनडे मैच में मौक़ा दिया गया. उन्होंने अपनी गेंदबाज़ी से प्रभावित किया और 8 ओवरों में 53 रन देकर दो विकेट निकाले. इसके बाद टीम के संकट में फंसने पर अपनी बल्लेबाज़ी से भी कमाल किया और अर्धशतक जमाया.
पेस अटैक में विविधता लाने के लिए इसमें एक बाएं हाथ के गेंदबाज़ को भी शामिल किए जाना चाहिए. इसके लिए अर्शदीप सिंह, ख़लील अहमद और नटराजन जैसे किसी गेंदबाज़ को अभी से इसके लिए तैयार करना चाहिए.
जहां तक स्पिन गेंदबाज़ी की बात है तो रविचंद्रन अश्विन को लंबे समय बाद वनडे टीम में शामिल किए जाने से लगता है कि वे भारतीय वनडे योजना का हिस्सा हैं. युज़वेंद्र चहल को भी काफ़ी समय तक बाहर रखने के बाद टीम में लाया गया है. वे अपनी क्षमता को एक बार फिर साबित करने में सफल रहे हैं.
लेकिन इस टीम को कलाई से स्पिन कराने वाले कुलदीप यादव की कमी खल रही है. उनकी मौजूदगी में ही भारत ने तमाम सफलताएं हासिल की हैं. इसके लिए पहले उनका मनोबल बढ़ाने की ज़रूरत है, क्योंकि लंबे समय तक टीम से बाहर रहने से उसके कमज़ोर होने की आशंका है.

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कितने गेंदबाज़, ये तय करना होगा
भारत ने पहले दो वनडे मैच छह गेंदबाज़ों के साथ खेले. लेकिन तीसरे वनडे में वह पांच विशेषज्ञ गेंदबाज़ों के साथ उतरा. इस तरह से उतरने से एक अतिरिक्त बल्लेबाज़ खिलाकर बल्लेबाज़ी को मज़बूत किया जा सकता है.
पर इसके लिए जिस तरह तीसरे वनडे में श्रेयस अय्यर से तीन ओवर गेंदबाज़ी कराई गई. इसी तरह से सूर्यकुमार यादव को भी कुछ ओवर गेंदबाज़ी करने के लिए तैयार करना चाहिए. ऐसा करने से भारत पांच विशेषज्ञ गेंदबाज़ों के साथ उतरने की योजना बना सकता है.
हार्दिक पांड्या और रविंद्र जडेजा निश्चय ही भारत की विश्व कप योजना का हिस्सा रहते हैं, तो दोनों ही गेंदबाज़ी करने के साथ आक्रामक बल्लेबाज़ी भी करने का माद्दा रखते हैं. उनकी मौजूदगी में भारत छह विशेषज्ञ गेंदबाज़ों के साथ भी उतर सकता है. ये दोनों ही क्रिकेटर ज़बर्दस्त फ़ील्डर भी हैं. उनकी मौजूदगी टीम को संतुलित बनाती है.
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