शतक नहीं बना पा रहे विराट, लेकिन कप्तान के रूप में `बेस्ट' हैं

विराट कोहली

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    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ सेंचुरियन में खेले गए पहले टेस्ट मैच की दूसरी पारी में 18 रन बनाकर तेज़ गेंदबाज़ मार्को जेनसन की गेंद पर क्विंटन डीकॉक के हाथों कैच हो गए.

मार्को जेनसन अपना पहला ही टेस्ट मैच खेल रहे थे, तो ज़ाहिर है उनके लिए विराट कोहली का विकेट बेशक़ीमती रहा. दूसरी तरफ़ विराट कोहली साल 2021 में आख़िरी टेस्ट मैच खेल रहे थे.

उन्होंने पहली पारी में लुइंगी एनगीडी की गेंद पर मल्डर को कैच थमाने से पहले 94 गेंदों का सामना करते हुए 35 रन बनाए.

वह जिस अंदाज़ में आउट हुए उसे देखकर कॉमेंट्री कर रहे भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावसकर ने कहा, "बस यही परेशानी है कि उन्होंने पिछली सात गेंदों पर कोई रन नहीं बनाया और इससे गेंदबाज़ उन पर दबाव बनाकर आउट करने में कामयाब रहा."

पहली पारी में विराट कोहली का स्ट्राइक रेट 37.23 था. टेस्ट क्रिकेट में ख़ासकर जब कोई बल्लेबाज़ अपनी फ़ॉर्म से जूझ रहा हो तो यह स्ट्राइक रेट इतना बुरा भी नहीं है, लेकिन उनसे पहले केएल राहुल ने 47.31 के स्ट्राइक रेट के साथ 123 और मयंक अग्रवाल ने 48.78 के स्ट्राइक रेट के साथ 60 रन बनाकर दिखा दिया था कि इस विकेट पर खेलना और तेज़ी से रन बनाना मुश्किल नहीं है.

विराट के बल्ले से लंबे समय से शतक नहीं निकला है लेकिन उनकी कप्तानी की तारीफ़ हो रही है. पूर्व क्रिकेटर विनोद कांबली ने ट्विटर पर लिखा है - भारतीय कप्तान ने साबित कर दिया है वो 'दुनिया के बेस्ट कप्तान' हैं.

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बल्ले से विराट की समस्या क्या है?

अगर सेंचुरियन टेस्ट की बात करें तो इस मैच में बल्लेबाज़ों के लिए मुश्किलें दूसरे दिन का खेल बारिश में धुलने के बाद तीसरे दिन से शुरू हुईं. जो भी हो इसके साथ ही विराट कोहली का यह साल भी बिना किसी शतक के निकल गया.

इस साल उन्होंने 11 टेस्ट मैच की 19 पारियों में चार अर्धशतक और 28.21 के औसत के साथ 536 रन बनाए. इस साल उनका सर्वोच्च स्कोर 72 रन रहा.

विराट कोहली के बल्ले से पिछला शतक साल 2019 के नवंबर महीने में बांग्लादेश के ख़िलाफ खेले गए डे-नाइट टेस्ट मैच में निकला था जब उन्होंने 136 रन बनाए थे. उसके बाद उनके बल्ले से क्रिकेट के किसी भी प्रारूप यानी टेस्ट, एकदिवसीय और टी-20 में कोई भी शतक नहीं निकला.

बांग्लादेश के ख़िलाफ डे-नाइट टेस्ट मैच में शतक के बाद दोबारा शतक बनाना उनके लिए दिवास्वप्न साबित हो रहा है. विराट कोहली ने साल 2019 में आठ टेस्ट मैच की 11 पारियों में दो शतक और दो अर्धशतक की मदद से 612 रन बनाए थे. साल 2020 में उन्होंने तीन टेस्ट मैच की छह पारियों में एक अर्धशतक की मदद से 116 रन बनाए.

कुछ ऐसा ही हाल भारत के मध्यक्रम के बल्लेबाज़ चेतेश्वर पुजारा का भी है. उनके बल्ले से पिछला टेस्ट शतक साल 2019 में जनवरी में ऑस्ट्रेलिया में खेले गए सिडनी टेस्ट मैच में निकला था जब उन्होंने 193 रन बनाए थे. उसके बाद से 25 टेस्ट मैच हो चुके हैं जब उनका बल्ला भी शतक को तरस रहा है.

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शतक का इंतज़ार

वहीं एक और मिडिल ऑर्डर बैटर अजिंक्य रहाणे के बल्ले से भी पिछला शतक साल 2020 में ऑस्ट्रेलिया में मेलबोर्न में खेले गए टेस्ट मैच में बना था जब उन्होंने 112 रन बनाए थे. उसके बाद से 13 टेस्ट मैच बाद भी उनके बल्ले से कोई शतक नहीं निकला है, लेकिन विराट की तुलना चेतेश्वर पुजारा या अजिंक्य रहाणे से नहीं की जा सकती. विराट कोहली भारत के टेस्ट कप्तान भी हैं.

विराट कोहली के लिए टेस्ट क्रिकेट के सबसे सुहाने दिन साल 2016-17-18 के थे. इन तीन साल में उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 14 शतक जमाए और लगातार हर साल एक हज़ार से अधिक रन भी बनाए.

साल 2016 में विराट कोहली ने चार शतक की मदद से 1215, साल 2017 में पाँच शतक की मदद से 1059 और साल 2018 में भी पाँच शतक के सहारे 1322 रन बनाए. अब टेस्ट, एकदिवसीय और टी-20 क्रिकेट के कुल मिलाकर 52 मैच हो चुके हैं जिनमें वह शतक नहीं बना पाए है. इनमें 14 टेस्ट, 15 एकदिवसीय और 23 टी-20 शामिल हैं.

पिछले दो साल में उनका टेस्ट औसत लगभग 26, एकदिवसीय औसत लगभग 43 और टी-20 में उनका औसत लगभग 59 का है. इसका अर्थ है कि एकदिवसीय और टी-20 में भले ही विराट कोहली के बल्ले से शतक नहीं निकल रहे हैं, लेकिन इन प्रारूप में उनकी फ़ॉर्म ख़राब नहीं है. हां टेस्ट क्रिकेट में वह शतक बनाना तो दूर बड़े रन बनाने के लिए भी तरस रहे है. वैसे विराट कोहली ने अभी तक 98 टेस्ट मैच खेले हैं और 27 शतक की मदद से 7854 रन बनाए है. उनका टेस्ट औसत 50.34 है.

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तकनीक में गड़बड़ी

अब कहां तो टेस्ट क्रिकेट में करियर औसत पचास के लगभग और कहां वर्तमान 26 के आसपास. ऐसा लगता है कि इन दिनों शायद उनके खेलने की तकनीक में भी कहीं गड़बड़ी है जिसे लेकर भारत के इंग्लैंड दौरे के दौरान पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने विराट कोहली को सलाह भी दी थी कि वह सचिन तेंदुलकर को तुरंत फ़ोन करें.

आख़िरकार विराट कोहली की फ़ॉर्म को क्या हो गया है और उसका इलाज क्या है? इसे लेकर क्रिकेट समीक्षक प्रदीप मैगज़ीन कहते हैं कि इसका जवाब देना मुश्किल है. वैसे भी एक डॉन ब्रैडमैन को छोड़कर सब बल्लेबाज़ों के क्रिकेट करियर में एक दौर ऐसा आया है जिसे आउट ऑफ़ फ़ॉर्म कहते है, उससे उन्हें जूझना पड़ा है. यही कारण है कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ों का औसत पचास या साठ का है.

इसका अर्थ यह भी है कि वह आधे समय नाकाम रहे हैं. अब अगर यह नाकामी एक या दो साल किसी के पीछे लगी रहे तो खिलाड़ी के लिए आउट ऑफ फ़ॉर्म होना माना जाता है. ऐसा भी नहीं है कि विराट कोहली पहले या आख़िरी खिलाड़ी हैं जिनके साथ ऐसा हो रहा है. हर खिलाड़ी को इसका सामना करना पड़ता है.

लेकिन उनकी ख़राब फ़ॉर्म का समय बढ़ता जा रहा है. यहां तक कि वह दूसरे प्रारूप में भी शतक नहीं बना पा रहे हैं. इसे लेकर प्रदीप मैगज़ीन कहते हैं कि उन्होंने अपने स्तर को इतना ऊँचा किया हुआ था कि सबको उनसे हर पारी में शतक की उम्मीद होने लगी. विराट इन पर काफ़ी हद तक खरे भी उतरे. यह दौर देखने से पहले वह बहुत कम मैचों के बाद शतक भी बना देते थे.

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आत्मविश्वास की कमी

वैसे जब विराट बल्लेबाज़ी करने जाते हैं तो उनमें कोई कमी नहीं दिखती लेकिन ऑफ़ स्टंप के बाहर जिसे अनिश्चितता का क्षेत्र भी कहा जाता है, वहां वह लगातार ड्राइव करते हुए या खेलते हुए आउट हो रहे हैं. कुछ ऐसी ही नाकामी का सामना उन्होंने साल 2014 में इंग्लैंड के दौरे में भी किया था.

बाद में उन्होंने सुधार भी किया. ऐसा लगता है कि विराट कोहली का आत्मविश्वास कहीं ना कहीं कम हो रहा है. उसकी वजह से भी वह नाकाम हो रहे हैं. इसके बावजूद उम्मीद है कि वह जिस तरह से इन दिनों अपनी फ़िटनेस पर काम कर रहे हैं शायद दक्षिण अफ़्रीका के दौरे में ही अपनी फ़ॉर्म में वापस आ जाएं.

सचिन से सलाह लेने पर प्रदीप मैगज़ीन कहते हैं कि 'सचिन तेंदुलकर के करियर में भी एक ऐसा ही दौर आया था, जब वह ऑस्ट्रेलिया में थे. तब वह भी ऑफ़ स्टंप के बाहर के क्षेत्र में फँस रहे थे. इसके बाद उन्होंने यह फ़ैसला किया कि वह ऑफ़ स्टंप के बाहर शॉट्स ही नहीं खेलेंगे और उन्होंने सिडनी में दोहरा शतक भी लगाया.'

शायद गावस्कर विराट कोहली से यह कह रहे थे कि आप भी सचिन की दिमाग़ी ताक़त से सीखिए. ऑफ़ स्टंप के आसपास खेलने में आई कमी को मानसिक मज़बूती से दूर किया जा सकता है. विराट भी इसके बारे में सोच रहे होंगे और यह तो दुधारी तलवार की तरह है.

अगर एक बार मन में शंका आ जाए तो फ़िर यह दुविधा भी होती है कि वह गेंद को खेले या नहीं, लेकिन विराट बहुत बड़े बल्लेबाज़ हैं, वह जल्दी ही ऐसे हालात से बाहर निकल आएंगे.

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ख़राब फ़ॉर्म

क्या इन दिनों चल रहे विवादों का असर भी उन पर पड़ रहा है? इसे लेकर प्रदीप मैगज़ीन कहते हैं कि 'विवाद तो अभी शुरू हुए हैं जबकि उनका फ़ॉर्म तो दो साल से ख़राब है. वैसे भी वह दिमाग़ी रूप से बहुत मज़बूत हैं और अपनी कप्तानी में कई बार दिखा भी चुके हैं कि जब भी दबाव जैसी परिस्थिति होती है तो वह और भी अच्छा खेलते हैं.'

अब विवादों का असर विराट पर कितना पड़ रहा है, कहना मुश्किल है, लेकिन यह एक चरण है जिससे सबको गुज़रना पड़ता है. एक खिलाड़ी की ताक़त यही है कि वह कैसे इससे जूझता है और यह विराट कोहली ही बताएँगे कि वह कैसे इससे निपटते हैं. उनके बारे में कहा जाता है कि वह सचिन तेंदुलकर के रिकार्ड तोड़ेंगे तो यह भी विराट ही बताएँगे कि यह लक्ष्य कितना मुमकिन है.

इन सबके बीच ताज़ा समाचार यह है कि विराट कोहली की कप्तानी में भारत ने दक्षिण अफ़्रीका को सेंचुरियन में खेले गए पहले टेस्ट मैच में 113 रन से करारी मात दे दी है.

तो क्या विराट कोहली पिछले दो साल से कप्तान के रूप में इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइक ब्रेयरली की तरह हो गए हैं. मतलब ये कि क्या फ़र्क़ पड़ता है कि आप रन बना रहे हैं या नहीं, मैच तो जीता रहे हैं. जो भी हो विराट के लिए विवाद और शतकों का सूखा कब समाप्त होता है इसके लिए नए साल पर सबकी नज़र रहेगी.

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