विराट कोहली और गांगुली के विवाद पर रवि शास्त्री ने उठाए सवाल- प्रेस रिव्यू

रवि शास्त्री

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विराट कोहली को वनडे के कप्तान से हटाने का विवाद थमता नहीं दिख रहा है. भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कोच रवि शास्त्री ने गुरुवार को कहा कि सीमित ओवरों की कप्तानी में बदलाव को अच्छी से तरह से बातचीत के साथ अंजाम दिया जा सकता था.

शास्त्री ने कहा कि विराट कोहली ने अपना पक्ष रख दिया है और अब बीसीसीआई प्रमुख सौरव गांगुली को इस मामले में अपनी बात रखनी चाहिए.

अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस से रवि शास्त्री ने कहा, ''मैं इस व्यवस्था का वर्षों से हिस्सा रहा हूँ. इस टीम के साथ पिछले सात सालों से था. पूरे मामले को अच्छी बातचीत के ज़रिए ठीक से हैंडल किया जा सकता था. ऐसा नहीं किया गया, इसलिए चीज़ें सार्वजनिक हुईं. इस मामले में विराट ने अपना पक्ष रख दिया है और बोर्ड के अध्यक्ष को अपनी बात रखनी चाहिए या उन्हें पूरे मामले में स्पष्टीकरण देना चाहिए कि असल में हुआ क्या था.''

शास्त्री ने कहा कि मसला यह नहीं है कि गांगुली झूठ बोल रहे हैं या विराट कोहली. शास्त्री ने कहा, ''सवाल यह है कि सच क्या है? आप सच जानना चाहते हैं तो यह केवल संवाद और वार्ता के ज़रिए ही सामने आएगा. एक व्यक्ति एक तरफ़ जाकर कुछ कहता है. दूसरा व्यक्ति दूसरी तरफ़ जाकर कुछ कहता है. ऐसे में संवाद दोनों तरफ़ से होना चाहिए न कि एक तरफ़ से.''

विराट कोहली

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विराट कोहली ने सितंबर महीने में टी-20 की कप्तानी छोड़ने की घोषणा की थी तो कुछ दिनों बाद गांगुली ने कहा था कि उन्होंने कोहली से कप्तान बने रहने के लिए अनुरोध किया था.

लेकिन कोहली ने इसी महीने प्रेस क़न्फ़्रेंस कर कहा कि बोर्ड ने उन्हें कप्तानी छोड़ने के मामले में कोई संपर्क नहीं किया था. वहीं वनडे की कप्तानी से हटाने को लेकर विराट कोहली ने कहा था कि उन्हें साउथ अफ़्रीका दौरे के लिए टेस्ट टीम में खिलाड़ियों के चयन की बैठक से महज़ 90 मिनट पहले बताया गया कि अब वे वनडे टीम के भी कप्तान नहीं हैं.

रवि शास्त्री ने कहा कि किसी एक व्यक्ति के पक्ष पर राय देना ठीक नहीं होगा क्योंकि उन्हें नहीं पता है कि गांगुली और कोहली के बीच क्या हुआ था.

शास्त्री ने अख़बार से कहा, ''दोनों पक्षों के बीच क्या हुआ था, इसे जाने बिना विवाद में कूदना ठीक नहीं है. जब एक बार आपको चीज़ें पता चल जाती हैं तो उस पर राय देना ज़्यादा तर्कसंगत होता है.''

गांगुली और शास्त्री के संबंधों कटुता भी रही है. ख़ास करके तब, जब 2016 में अनिल कुंबले को टीम का कोच चुना गया था. तब शास्त्री ने भी इसकी दावेदारी की थी. जिस समिति ने कुंबले का चयन किया था, उसमें गांगुली भी थे. हालांकि शास्त्री ने कहा कि उनकी और गांगुली की राय अलग हो सकती है लेकिन अतीत को लेकर कोई कड़वाहट नहीं है.

शास्त्री ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ''जिस पल जो चीज़ें होती हैं, मैं उन्हें उसी वक़्त तक रहने देता हूँ. आप उस पर अपने तरीक़ से प्रतिक्रिया दे सकते हैं. मुझे प्रतिक्रिया का पूरा हक़ है और उन्हें भी है.''

विराट कोहली

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शास्त्री ने कहा, ''इन सबके अलावा हम दोनों क्रिकेटर हैं. हम खेल को जानते हैं. जितना खेल को मैं जानता हूँ, उतना वो भी जानते हैं. इसलिए हमें एक दूसरे का आदर करना चाहिए. ऐसे में अगर कोई वाक़या होता है तो इसलिए होता है कि हम दोनों क्रिकेट खेल चुके हैं. इसका मतलब ये नहीं है कि हर चीज़ पर आप सहमत या असहमत होंगे. आप अपनी सोच के लिए स्वतंत्र होते हैं. आप कौन सा रुख़ अपनाना चाहते हैं, इसके लिए भी स्वतंत्र होते हैं. लेकिन इसे लेकर कोई कड़वाहट नहीं है.''

कप्तानी को लेकर शास्त्री ने कहा कि जब कोहली ने एक बार फ़ैसला कर लिया कि वो टी-20 की कप्तानी नहीं चाहते हैं तो ऐसे में सफ़ेद गेंद से दोनों फॉर्मैट की कप्तानी के लिए एक ही नाम हो सकता है. शास्त्री ने कहा, ''सफ़ेद गेंद से क्रिकेट के लिए कप्तान एक ही हो सकता है. रोहित शर्मा को टी-20 कैप्टन बनाया गया है तो उन्हें वनडे का भी कप्तान होना चाहिए.''

भविष्य में सफ़ेद गेंद की कप्तानी के लिए केएल राहुल और श्रेयस अय्यर के नाम पर शास्त्री ने कहा कि कोहली को टेस्ट का कप्तान बने रहना चाहिए. शास्त्री ने कहा, ''विराट कोहली शक की छाया से बाहर हैं. आप देखिए कि उन्होंने क्या किया है. टेस्ट क्रिकेट के लिए उनके जैसा अभी कोई नहीं है. अगर आप नतीजों की बात करें तो उनके सामने कौन है? आज की तारीख़ में दुनिया में ऐसा कोई कप्तान मुझे नहीं दिखता है, जिस पैशन के लिए विराट जाने जाते हैं. यह सच है कि पिछले पाँच सालों से भारत की टीम टॉप पर रही है.''

कर्नाटक

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कर्नाटक में धर्मांतरण विरोधी बिल पास

हिन्दी अख़बार दैनिक जागरण ने पहले पन्ने पर कर्नाटक में धर्मांतरण विरोधी बिल पास होने की ख़बर को प्रमुखता से जगह दी है. दैनिक जागरण ने इस ख़बर की हेडिंग दी है- कर्नाटक में जबरन मतांतरण करवाने पर 10 साल की क़ैद. जागरण की ख़बर के अनुसार, विपक्षी दलों के विरोध के बीच कर्नाटक विधानसभा ने गुरुवार को मतांतरण विरोधी विधेयक को हरी झंडी दे दी.

मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई ने इसे संवैधानिक और विधि सम्मत क़रार देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य मतांतरण के ख़तरों से मुक्ति दिलाना है. कर्नाटक में जबरन धर्मांतरण संज्ञेय और ग़ैर-ज़मानती अपराध होगा. फ़िलहाल आठ राज्यों में धर्मांतरण विरोधी क़ानून बन चुका है और ये सभी राज्य बीजेपी शासित हैं.

लुधियाना कोर्ट परिसर में ज़ोरदार धमाका, एक की मौत

अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू ने लुधियाना के कोर्ट परिसर में गुरुवार को हुए धमाके की ख़बर लीड लगाई है. अख़बार ने अपनी ख़बर में लिखा है, गुरुवार दोपहर 12.30 बजे लुधियाना के अदालत परिसर में ज़ोरदार बम धमाका हुआ.

इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि तीन महिलओं समेत सात लोग ज़ख़्मी हो गए हैं. धमाका आठ मंजिला भवन की दूसरी मंजिल पर बने शौचालय में हुआ. यह धमाका इतना ज़ोरदार था कि आसपास की इमारतों के शीसे टूट गए. मृतक की पहचान नहीं हो पाई है.

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