हरभजन सिंह: भारत के लिए टेस्ट में पहली हैट-ट्रिक लेने वाले टर्बनेटर की क्रिकेट से विदाई

हरभजन सिंह

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    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

शुक्रवार को अचानक भारत के सबसे कामयाब स्पिनरों में से एक हरभजन सिंह ने क्रिकेट के हर प्रारूप को अलविदा कह दिया.

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हरभजन सिंह ने ट्वीट करके इसकी जानकारी दी. उन्होंने लिखा है, "हर अच्छी चीज़ कभी ना कभी ख़त्म हो जाती है और आज मैं उस खेल से विदा ले रहा हूं, जिसने मुझे सब कुछ दिया है. उन सभी को धन्यवाद, जिन्होंने इस 23 साल की लंबी यात्रा को यादगार बनाया."

हरभजन सिंह के बेहद कामयाब क्रिकेट करियर में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में साल 2007 में आईसीसी टी-20 विश्व कप और साल 2011 में आईसीसी एकदिवसीय विश्व कप चैंपियन टीम का सदस्य रहना भी है.

हरभजन सिंह

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विवादों से नाता

हरभजन सिंह का विवादों से भी ख़ूब नाता रहा.

इसमें आईपीएल के दौरान श्रीसंत को थप्पड़ मारने से लेकर, ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज़ एंड्रयू सायमंडस से भिड़ना भी है जो आज भी मंकी गेट के नाम से मशहूर है.

वह अनुशासनहीनता के आरोप में भी कई बार सुधार के लिए एनसीए यानी नेशनल क्रिकेट एकेडमी भेजे गए ताकि अपना आचरण सुधार सके.

श्रीसंत को मारा गया थप्पड़ तो उन्हें काफ़ी महँगा पड़ा जबकि ऑस्ट्रेलिया के एंड्रयू सायमंडस के साथ उनका विवाद सचिन तेंदुलकर के कारण सुलझा जब सचिन ने उनके पक्ष में गवाही दी.

हरभजन सिंह के दूसरे क़िस्से कहानी और कामयाबी को शब्दों में बाँधना बेहद मुश्किल है.

कुंबले और हरभजन

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कुंबले और हरभजन की जोड़ी

हरभजन सिंह ने टेस्ट क्रिकेट में 400 से अधिक विकेट लिए. इसके अलावा भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट में हैट-ट्रिक लेने वाले वह पहले गेंदबाज़ भी बने.

इतना ही नहीं न्यूज़ीलैंड के ख़़िलाफ़ तो उन्होंने लगातार दो टेस्ट शतक भी जमाए वह भी तब जब भारत के सभी धुरंधर बल्लेबाज़ आउट होकर पवेलियन लौट चुके थे.

आईपीएल में भी वह लम्बे समय तक चेन्नई सुपर किंग्स के सदस्य रहे जिसने महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में सबसे अधिक फ़ाइनल खेले है. वह भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली की भी पहली पसंद रहे.

हरभजन सिंह और अनिल कुंबले की जुगलबंदी में भारत टेस्ट क्रिकेट में अपनी ज़मीन पर अजेय सा रहा.

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चकिंग का संदेह

हरभजन सिंह भारत के पूर्व ऑफ स्पिनर इरापल्ली प्रसन्ना और दूसरे स्पिनर से बिलकुल अलग थे. प्रसन्ना जहॉ हवा में फ़्लाइट और विकेट ख़रीदने के लिए मशहूर थे वहीं हरभजन सिंह का एक्शन बिलकुल अलग था.

वह गेंद को तेज़ी से स्पिन कराने में माहिर थे. शुरुआत में तो उन पर चकिंग का संदेह भी ज़ाहिर किया गया लेकिन वह बेफ़िक्री के साथ आगे बढ़ते रहे.

भारतीय क्रिकेट टीम से बाहर होने के बाद वह एक एक्सपर्ट के तौर पर विभिन्न टीवी चैनल पर आते हैं और अपनी बेबाक़ टिप्पणी के लिए भी जाने जाते हैं.

हरभजन सिंह को भज्जी के अलावा टर्बनेटर के नाम से भी जाना जाता है.

उन्होंने सोशल मीडिया साइट ट्विटर के ज़रिये अपने क्रिकेट करियर को अलविदा कहा. 41 साल के हरभजन सिंह ने अपने करियर में साथ देने वालों का शुक्रिया अदा किया.

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करियर का मुश्किल वक़्त

हरभजन सिंह के क्रिकेट करियर को तब बड़ा झटका लगा जब पिछले आईपीएल में वह कोलकाता नाइटराइडर्स के लिए केवल तीन मैच खेल सके और उनमें भी उन्हें गिने चुने ओवर मिले.

उस दौरान वह जब भी स्क्रीन पर दिखते तो वह दूसरे खिलाड़ियों की तारीफ़ करते दिखते. अधिक ओवर ना मिलने का दर्द उनके चेहरे पर साफ़ छलकता था.

शायद वह दीवार पर लिखी उस इबारत को पढ़ने में कामयाब रहे जिस पर लिखा था " हरभजन एक क्रिकेटर के तौर पर अब आपमें कुछ नहीं बचा है."

हरभजन सिंह आईपीएल में तो मुंबई इंडियंस के लिए भी खेले. इस तरह से वह आईपीएल की सबसे कामयाब तीन टीमें मुंबई इंडियंस, चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइटराइडर्स के लिए खेले.

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शानदार प्रदर्शन

3 जुलाई 1980 को पंजाब के जालंधर शहर में जन्में हरभजन सिंह ने 103 टेस्ट मैच खेलकर 417 विकेट हासिल किए.

हरभजन सिंह के गेंदबाज़ी करियर में सबसे बड़ा पल तब आया जब उन्होंने साल 2001 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ तीन टेस्ट मैचों की सिरीज़ में 32 विकेट झटके. इनमें हैट-ट्रिक भी शामिल है.

हरभजन सिंह ने साल 2007 के आईसीसी टी-20 विश्व कप में सात और 2011 के एकदिवसीय विश्व कप में नौ विकेट लेकर अपनी अहम भूमिका निभाई.

इसमें पाँच बार उन्होंने दस या उससे अधिक और 25 बार पाँच या उससे अधिक विकेट एक ही टेस्ट मैच में झटके.

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हरभजन सिंह ने टेस्ट क्रिकेट में दो शतक और नौ अर्धशतक की मदद से 2224 रन भी बनाए. उनका सर्वोच्च स्कोर 115 रन रहा.

उन्होंने 236 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों में 269 विकेट लेकर अपना दबदबा दिखाया.

हरभजन सिंह ने अपने टेस्ट करियर में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ 18 मैचों में 95 विकेट हासिल किए.

हरभजन सिंह ने भारत में 55 और विदेशी ज़मीन पर 48 टेस्ट मैच खेले.

वे 1998 से 2015 तक मोहम्मद अज़हरुद्दीन, महेंद्र सिंह धोनी, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली, विराट कोहली, अनिल कुंबले, वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर की कप्तानी में भारत के लिए खेले.

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