किदाम्बी श्रीकांत ने विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में रचा इतिहास, जीता सिल्वर मेडल

भारतीय शटलर किदांबी श्रीकांत

इमेज स्रोत, JOSE JORDAN/AFP

इमेज कैप्शन, भारतीय शटलर किदांबी श्रीकांत पोडियम
    • Author, मनोज चतुर्वेदी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

भारतीय शटलर किदांबी श्रीकांत रविवार को विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप के फाइनल में सिल्वर मेडल जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बन गए हैं.

फाइनल मुकाबले में किदांबी श्रीकांत का मुक़ाबला सिंगापुर के लोह किन यू से हुआ. लोह ने इस मुकाबले में श्रीकांत को 21-15 और 22-20 से हरा दिया.

लेकिन इसके बाद भी किदांबी श्रीकांत ने भारतीय पुरुष बैडमिंटन की दुनिया में इतिहास रच दिया है.

किदाम्बी श्रीकांत

इमेज स्रोत, AFP

दो पदकों के साथ लौटेंगे भारतीय खिलाड़ी

उन्होंने स्पेन के हुएलवा में चल रही इस चैंपियनशिप के सेमी फ़ाइनल में हमवतन लक्ष्य सेन को एक घंटा और आठ मिनट के मैच में 17-21, 21-14 और 21-17 से हराया.

यह पहला मौक़ा है, जब भारतीय पुरुष खिलाड़ी इस चैंपियनशिप में दो पदकों के साथ लौट रहे हैं. पहली बार विश्व चैंपियनशिप में भाग लेने वाले लक्ष्य सेन का कांस्य पदक पक्का हो गया है. और श्रीकांत ने भी सिल्वर मेडल जीत लिया है.

भारतीय खिलाड़ियों में इससे पहले प्रकाश पादुकोण और बी साई प्रणीत कांस्य पदक जीत चुके हैं. लेकिन श्रीकांत ने रजत पदक जीता है. उनके और लक्ष्य के बीच पहले दो गेम बँटने के बाद तीसरे और निर्णायक गेम में बढ़त बदलती रही.

श्रीकांत

इमेज स्रोत, Getty Images

इस दौरान दोनों खिलाड़ियों का स्टेमिना भी जवाब देता नज़र आ रहा है. लेकिन इस मौके पर श्रीकांत का अनुभव और चतुराई काम आई, उन्होंने सही मौक़ों पर स्मैश का इस्तेमाल किया और नेट पर बेहतर खेल का प्रदर्शन करके खुद को जीत तक पहुँचाया. इस गेम में एक समय वह 13-15 से पिछड़ गए थे पर दिमाग़ से खेलते हुए बाजी पलटने में सफल हो गए.

लक्ष्य सेन कड़े मुक़ाबले में हार जरूर गए, लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन से यह दिखा दिया है कि आने वाला समय उनका ही है. वह यदि अपनी फिटनेस में थोड़ा और सुधार करके अपने ड्रॉफ शॉटों में थोड़ा और पैनापन लाएं तो वह जल्द ही चैंपियन के तौर पर उभर सकते हैं.

बराबरी करके खेल में की वापसी

किदाम्बी श्रीकांत ने पहला गेम खोने के बाद दूसरे गेम में जब खुद को 4-8 अंकों से पीछे कर लिया, उस समय लगा कि लक्ष्य इतिहास बनाने की तरफ बढ़ रह हैं, लेकिन श्रीकांत ने इस मौके पर अपने स्मैशों और ड्रॉप शॉटों के बेहतर तालमेल से 10-9 की बढ़त बनाई.

इसके बाद दवाब में लक्ष्य से ग़लतियां होने लगीं और श्रीकांत के खेल में निखार आता गया और उन्होंने 21-14 से दूसरा गेम जीतकर अपनी खेल में वापसी कर ली.

किदाम्बी श्रीकांत

इमेज स्रोत, AFP

यह लक्ष्य सेन और किदाम्बी श्रीकांत के बीच पहला अंतरराष्ट्रीय मुक़ाबला था. किदाम्बी ने शुरुआत से ही खेल में नेट प्ले से खेल पर नियंत्रण बनाने का प्रयास किया. इस कारण लक्ष्य को भी अपने आक्रामक अंदाज में खेलने का मौका नहीं मिल सका.

लेकिन उन्होंने गेम में पहली बार 8-7 की बढ़त बनाई. इसके बाद अन्होंने ड्रॉप शॉटों और स्मैशों के सही तालमेल से खेल पर नियंत्रण बनाए रखा और 17-17 की बराबरी के बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और गेम को 21-17 से अपने पक्ष में कर लिया.

मात्र 20 साल के लक्ष्य सेन और 28 वर्षीय किदाम्बी श्रीकांत असल में देश में दो पीढ़ियों का प्रतिनिधित्व करते हैं. लक्ष्य देश के तेजी से उभरते खिलाड़ी हैं, वह अपने आक्रामक अंदाज से यह दिखाने में सफल रहे हैं कि आने वाला कल उनका ही है.

उन्होंने अपने करियर में खेले 226 मैचों में से 168 जीते हैं और 56 हारे हैं. वहीं किदाम्बी श्रीकांत विश्व रैंकिंग में शीर्ष तक ही नहीं पहुंच चुके हैं बल्कि देश के पुरुष खिलाड़ियों में सबसे ज्यादा सुपर सीरीज खिताब जीतने वाले हैं, लेकिन पिछले डेढ़-दो साल से वह अपनी खोई रंगत को पाने के प्रयास में जुटे हैं. इस साल की शुरुआत से ही वह फिर से लय में नजर आने लगे हैं.

श्रीकांत

इमेज स्रोत, Getty Images

ऐसे बनी श्रीकांत की ज़िदगी

किदाम्बी श्रीकांत गुंटूर के रहने वाले हैं. उनके पिता 2008 में जब उन्हें गोपीचंद अकादमी में ले गए, उस समय उनके बड्रे भाई नंदगोपाल इसी अकादमी में खेला करते थे. गोपीचंद ने उन्हें युगल और मिश्रित युगल में खिलाना शुरू कर दिया.

इसी दौरान 2013 में इंडियन बैडमिंटन लीग का आयोजन हुआ. श्रीकांत और उस समय दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी किदाम्बी श्रीकांत एक ही टीम में थे. दोनों को एक दिन साथ अभ्यास करते देख ली चोंग वेई के कोच तेई जो बोक को लगा कि श्रीकांत बिलकुल ली चोंग वेई की तरह खेलते हैं.

उन्होंने उसे एकल में खेलने की सलाह दी. वहीं गोपीचंद भी उनके स्पार्क से वाकिफ थे, उन्होंने श्रीकांत को एकल का अभ्यास कराना शुरू कर दिया, जिसका परिणाम आज सभी के सामने है.

लक्ष्य सेन

इमेज स्रोत, AFP

इमेज कैप्शन, लक्ष्य सेन

लगातार दूसरी बार भारत लौटेगा दो पदकों के साथ

भारत की पदक की सबसे बड़ी उम्मीद पीवी सिंधु के क्वार्टर फाइनल में हार जाने पर बैडमिंटन प्रेमियों में थोड़ी निराशा जरूर आई थी. लेकिन किदाम्बी श्रीकांत और लक्ष्य सेन ने पदक जीतकर दो पदकों के साथ लौटना पक्का कर दिया है.

भारत ने 2019 की चैंपियनशिप में भी दो पदक जीते थे, लेकिन पुरुष सिंगल्स में भारत ने पहली बार दो पदक जीते हैं.

विश्व के नंबर एक खिलाड़ी केंटो मोमोटा और चीन तथा इंडोनेशिया के कुछ दिग्गज खिलाड़ियों की अनुपस्थिति में भारत के तीन पदक जीतने की भी संभावना बन रही थी. लेकिन एचएस प्रणय क्वार्टर फाइनल में हार गए.

वीडियो कैप्शन, बैडमिंटन चैंपियन रह चुके प्रकाश पादुकोण के अनसुने किस्से

पादुकोण लाए पहला पदक

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय पहचान बनाने वाले पहले खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण हैं. वह भारत के लिए विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में पहले पदक जीतने वाले भी हैं.

प्रकाश ने 1983 में कंस्य के रूप में यह पदक जीता था. प्रकाश इस चैंपियनशिप के दौरान जिस तरह की फॉर्म में दिख रहे थे, उससे लग रहा था कि वह इस बार सोना ही लेकर आएंगे. उन्होंने सेमीफाइनल की राह में चार मैच जीतने के दौरान सिर्फ एक गेम गंवाया. उन्होंने सेमीफाइनल में सुगियार्तो के ख़िलाफ़ भी ज़ोरदार शुरुआत करके पहला गेम जीत लिया.

लेकिन अगले दो गेम हारने से उन्हें कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा था, पर उनकी इस सफलता पर देश खुशी से झूम उठा था, क्योंकि इस चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले पहले भारतीय थे.

प्रकाश पादुकोण

इमेज स्रोत, Getty Images

प्रकाश पादुकोण के कांस्य पदक जीतने के 36 साल बाद यानी 2019 में बी साई प्रणीत ने इस प्रदर्शन को दोहराया. इस दौर में सायना नेहवाल और पीवी सिंधु से ही सफलता पाने की उम्मीद की जाती थी.

भारतीय पुरुष खिलाड़ियों से पदक की उम्मीद बंद हो गई थी. लेकिन प्रणीत ने सेमीफ़ाइनल में स्थान बनाकर सभी को हैरत में डाल दिया. यह सही है कि तत्कालीन नंबर वन खिलाड़ी केंटो मोमोटा के ख़िलाफ़ सेमीफाइनल में वह संघर्ष नहीं कर सके थे, लेकिन कांस्य पदक जीतने में जरूर सफल रहे.

सिंधु ने बनाया पाँच पदक का रिकॉर्ड

भारत ने इस विश्व चैंपियनशिप में इस साल से पहले तक कुल 10 पदक जीते हैं, जिसमें से आधे यानी पांच पदक जीतने वाली अकेली पीवी सिंधु हैं.

सिंधु हालांकि चीन के ताइपे की खिलाड़ी ताई जू यिंग का तोड़ नहीं निकाल पाने की वजह से इस बार क्वार्टर फाइनल में हार गई, पर सिंधु ने 2019 की चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी धाक जमा दी थी.

इस स्वर्ण के साथ पांच पदक जीतकर वह चीनी खिलाड़ी झांग निंग के पांच पदकों के विश्व रिकार्ड की बराबरी पर आ गई थीं. इस बार उनके सामने झांग निंग का रिकॉर्ड तोड़ने का मौका था लेकिन वह क्वार्टर फाइनल में हार कर कर इस मौके को गंवा बैठी हैं.

पीवी सिंधु

इमेज स्रोत, Getty Images

सायना के नाम भी है रिकॉर्ड

सायना नेहवाल विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप के फाइनल में स्थान बनाने वाली पहली खिलाड़ी हैं. उन्होंने जकार्ता में 2015 में हुई चैंपियनशिप में फाइनल तक चुनौती पेश की थी. लेकिन केरोलिना मारिन को हरा ना पाने के कारण गोल्ड जीतने का उनका सपना पूरा नहीं हो सका, उन्हें रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा था.

वह दो साल बाद ग्लास्गो में एक बार फिर इस चैंपियनशिप में उतरीं. पर इस बार वह कांस्य पदक ही जीत सकीं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)