प्रीमियर बैडमिंटन लीग से भारतीय बैडमिंटन को कितना फ़ायदा?
- Author, आदेश कुमार गुप्त/दीप्ति बत्तिनी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
साल 2013 में पीबीएल यानि प्रीमियर बैडमिंटन लीग का एक मुक़ाबला, जगह थी दिल्ली का सिरीफ़ोर्ट स्टेडियम.
हैदराबाद हॉटशॉट्स की साइना नेहवाल और अवध वॉरियर्स की पीवी सिंधु के बीच होने वाले मैच को देखने के लिए सारी सीटें भरी हुई थीं. वो मैच तो सिंधु हार गईं लेकिन उसी शर्मीली सी सिंधु ने साल 2017 के पीबीएल के तीसरे संस्करण में चेन्नई स्मैशर्स के लिए खेलते हुए साइना नेहवाल को ना सिर्फ़ लीग मैच में वरना सेमीफ़ाइनल में भी हराया और अपनी टीम को चैंपियन भी बनाया.
इससे पहले साल 2016 में पीवी सिंधु रियो ओलंपिक में रजत पदक जीत चुकी थीं. 2017 में ही उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में भी रजत पदक जीता. 2017 में ही सिंधु वर्ल्ड सुपर सिरीज़ के फ़ाइनल्स में उपविजेता रहीं. इसके अलावा उन्होंने साल 2017 में ही कोरिया ओपन और इंडिया ओपन जीता.
सिंधु मानती हैं कि इसमें पीबीएल में मिली कामयाबी, अनुभव, ट्रेनिंग, बड़े खिलाड़ियों और शानदार कोचिंग और फ़िटनेस का भी अहम रोल था.

इमेज स्रोत, EPA
अब एक बार फिर देसी-विदेशी खिलाड़ियों से सजी पीबीएल यानि प्रीमियर बैडमिंटन लीग का छठा संस्करण शुरू हुआ.
इसका फ़ाइनल नौ फ़रवरी को खेला जाएगा.
बीबीसी से ख़ास बातचीत में पीवी सिंधु ने कहा, "ये बहुत अच्छी बात है कि इस तरह की लीग हैं. ये हमारे लिए ही नहीं युवा खिलाड़ियों के लिए भी बहुत फ़ायदेमंद है. उन्हें लोगों को जानने का मौक़ा मिलता है. जो खिलाड़ी सिंधु या साइना बनना चाहती हैं, जो बैडमिंटन में करियर बनाना चाहते हैं. वो हमारा मैच देख सकते हैं. वो देख सकते हैं कि कितनी मेहनत लगती है. खिलाड़ी ही नहीं उनके माता-पिता को भी इस तरह की लीग से फ़ायदा होगा, वो अपने बच्चों को स्पोर्ट्स में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित करेंगे."
भारतीय खिलाड़ी बीसाई प्रणीत ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में कहा कि एक जूनियर खिलाड़ी के रूप में वह पीबीएल से जुड़े और बेहद अनुभवी खिलाड़ियों के ख़िलाफ़ खेलने का आत्मविश्वास उनमें आया.
इस बार की लीग में सात टीमें हिस्सा ले रही हैं. इनमें अवध वॉरियर्स, बैंग्लुरू रैपटर्स, चेन्नई सुपर स्टार्स, हैदराबाद हंटर्स, मुंबई रॉकेट्स, नोर्थ इस्टर्न वारियर्स और पुणे 7 एसेस शामिल है.
पीबीएल का पहला आयोजन साल 2013 में हुआ था. इसके बाद साल 2016 में एक बार फिर दुनिया भर के खिलाड़ियों की नीलामी हुई और उसके बाद छह टीमों के साथ लीग को दूसरा जन्म मिला.

तब पी कश्यप ने बीबीसी से बातचीत में कहा था कि इस लीग से यह फ़ायदा हुआ है कि चीन, जापान, थाइलैंड और इंडोनेशिया के खिलाड़ियों के साथ अपने ही घर में खेलने का मौक़ा मिल रहा है. भले ही चीन के बड़े नाम वाले खिलाड़ी नहीं आए लेकिन भविष्य में वह भी आ जाएंगे.
इस बार की लीग में हिस्सा रहे चिराग़ शेट्टी कहते हैं, "मैं तीन साल से लीग में खेल रहा हूँ. पहले ही साल मुझे टॉप खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौक़ा मिला और मैंने बहुत कुछ सीखा. अब मुझे ऐसा लगता है कि मैं किसी के साथ भी खेल सकता हूँ."
पिछले 10 सालों में भारत के कई बैडमिंटन खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है चाहे वो बीसाई प्रणीत, चिराग़ शेट्टी हों, सिंधु या साइना. चिराग़ शेट्टी जैसे खिलाड़ी मानते हैं कि इसकी एक वजह है कि बैडमिंटन को भारत में अच्छे से मैनेज किया गया है और गेम को बहुत अहमियत मिली है.
पीबीएल की बात करें तो साल 2017-18 में छह टीमें थीं. लेकिन साल 2017-18 में दो टीमें बढ़ने से इनकी गिनती आठ हो गई.
साल 2018-19 में पुणे 7 एसेस के जुड़ने के साथ ही पीबीएल में टीमों की संख्या नौ हो गई.
लेकिन इस बार इसके छठे संस्करण में सात टीमें शामिल हैं.
पीबीएल को अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन संघ ने मान्यता देते हुए इसमें दुनिया भर के खिलाड़ियों को खेलने की अनुमति दी है.

इमेज स्रोत, AFP
अवध वॉरियर्स में अजय जयराम, शुभांकर डे और तन्वी लाड के अलावा अमरीका की झांग वेइवेन और हॉग-कॉग की वॉग विंग की है.
बैंग्लुरू रैपटर्स में बीसाई प्रणीत और चीन ताइपे की ताई ज़ू यिंग है.
चैन्नई सुपर स्टार्स में बीसुमित रैड्डी, लक्ष्य सेन, गायत्री गोपीचंद, मनु अत्री के अलावा इंडोनेशिया के टॉमी सुगियार्तो है.
हैदराबाद हर्टर्स में विश्व चैंपियन भारत की पीवी सिंधु, सौरभ वर्मा, एनसिकी रेड्डी और रूस के व्लादिमिर इवानोव है.
मुंबई रॉकेट्स में पी कश्यप, प्रणव चोपड़ा नॉर्थ इस्टर्न वॉरियर्स में थाईलैंड के तानोंगसाक सीनसोमबुनसुक और पुणे 7 एसेस में चिराग़ शेट्टी और रितुपर्णा दास शामिल हैं.
साल 2013 में पहले सत्र की चैंपियन टीम बनी हैदराबाद हंटर्स में अजय जयराम, शुभांकर डे और इंडोनेशिया के तौफ़िक़ हिदायत जैसे बड़े नाम हैं.
पीबीएल खिलाड़ियों के लिए पैसे का पिटारा खोलने वाली साबित हो रही है. इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि पीवी सिंधु को नीलामी में हैदराबाद हर्टर्स ने 77 लाख रूपये की बोली लगाकर अपने साथ रखा.
दुनिया की नम्बर एक खिलाड़ी चीन ताइपे की ताई ज़ू यिंग को बैगलुरू रैपटर्स ने 77 लाख रूपये में अपने साथ रखा. बैगलुरू रैपटर्स ने बीसाई प्रणीत के लिए भी 32 लाख रूपये ख़र्च किये.

इमेज स्रोत, Getty Images
चेन्नई सुपर स्टार्स ने पुरूष युगल खिलाड़ी बीसुमित रेड्डी को 11 लाख रूपये जबकि पुणे 7 एसेस ने चिराग़ शेट्टी को 15 लाख पचास हज़ार रूपये ख़र्च करके अपने साथ रखा. लेकिन साइना नेहवाल और के श्रीकांत इस बार खेलते नज़र नही आएंगे.
रही बात पीबीएल से भारतीय खिलाड़ियों को मिली नई पहचान की तो इसे लेकर पूर्व एशियन चैंपियन दिनेश खन्ना मानते हैं, "पीवीसिंधु और साइना नेहवाल तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलती ही हैं, इसके साथ-साथ दूसरे भारतीय खिलाड़ियों को भी विदेशी खिलाड़ियों के साथ खेलने, रहने और ट्रेनिंग करने का अवसर मिलता है. वैसे तो भारत के कोच भी बेहतरीन हैं लेकिन फिर भी विदेशी कोच से उन्हें मैच से पहले की तैय्यारी और नई तकनीक सीखने के मौक़े भी मिलते है."
दिनेश खन्ना आगे कहते हैं कि पीबीएल से युवा भारतीय खिलाड़ियों को बहुत लाभ मिला है जिनमें लक्ष्य सेन शामिल हैं. लक्ष्य सेन ने पिछले साल कई टूर्नामेंट भी जीते हॉलाकि उनका स्तर अधिक ऊंचा नहीं था लेकिन फिर भी वह भविष्य के सितारे हैं.
कुछ महिला खिलाड़ियों के नाम को लेकर दिनेश खन्ना कहते हैं कि गुवाहाटी की 20 साल की अस्मिता छलिहा नार्थ इस्टर्न वॉरियर्स के लिए खेलती हैं. उन्होंने पिछले साल नेपाल में और साल 2018 में टाटा ओपन इंटरनैशनल और दुबई इंटरनेशनल जीता. इनके अलावा पूर्व खिलाड़ी और कोच पी गोपीचंद की बेटी गायत्री गोपीचंद भी उभरती खिलाड़ी हैं. वह चेन्नई सुपर स्टार्ज़ में हैं.
दिनेश खन्ना यह भी मानते हैं कि पीबीएल से भारत की पुरूष युगल जोड़ी सात्विक साई राज रेंकी रेड्डी और चिराग शेट्टी को बहुत फ़ायदा मिला.

इमेज स्रोत, Getty Images
इस जोड़ी ने साल 2019 में थाइलैंड ओपन जीता तो दुनिया के 10 टॉप जोड़ीदारों में शामिल कई खिलाड़ियों को मात दी.
किसी भी लीग से सबसे बड़ा लाभ नए-नए स्टेड़ियम बनने और पुराने स्टेड़ियमों के रखरखाव से होता है. हैदराबाद में तो ख़ैर पी गोपीचंद ऐकेडमी है ही साथ ही दिल्ली को भी हर साल एक सुपर सिरीज़ कराने का अवसर मिलता है. लखनऊ में सैय्यद मोदी चैंपियनशिप होती ही है. इसके अलावा बैंगलुरू, चेन्नई और गुवाहाटी में भी शानदार स्टेड़ियम है. इन स्टेडियमों में पीबीएल के मैच खेले जाने से युवा खिलाड़ियों में बैडमिंटन खेलने का रूझान पैदा होगा.
पीबीएल में पैसा आने से खिलाड़ियों को मनोबल तो बढ़ा ही है साथ ही हर हाल में मैच जीतने की भावना से उनमें कड़ी प्रतिद्वंदिता भी पैदा हुई है.
अगर विदेशी खिलाड़ियों की बात करें तो पूर्व विश्व चैंपियन स्पेन की कैरोलिना मारिन इस बार पीबीएल में नहीं खेलेंगी. कैरोलिना मारिन भारत में बेहद लोकप्रिय हैं. सिंधु और कैरोलीना के बीच मुक़ाबले पर सबकी नज़र भी रहती है.
अब देखना है कि इस बार पीबीएल में खिलाड़ी कैसा खेलते हैं. कुछ ही महीने बाद ओलंपिक है और बड़े खिलाड़ियों को पीबीएल में अपना दम ख़म दिखाने का मौक़ा भी मिलेगा.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
















