BBC ISWOTY- आर वैशाली: शतरंज की बिसात पर दिग्गजों को मात देती चेन्नई की महिला ग्रैंड मास्टर

ग्रैंड मास्टर आर वैशाली ने महज 14 साल की उम्र में मुंबई में नेशनल वीमैन चैलेंजर्स का खिताब जीत लिया था. कई जूनियर टूर्नामेंट में जीत दर्ज करने के बाद उन्होंने पहली बार एक बड़ा खिताब अपने नाम किया. इसके बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा.
दुनिया की नज़र भी उन पर पड़नी शुरू हो गई. जब उन्होंने 2017 में एशियाई व्यक्तिगत ब्लिट्ज शतरंज चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी.
जब वो 2018 में भारतीय वीमैन ग्रैंड मास्टर बनीं तो पूर्व विश्व चैंपियन ग्रैंड मास्टर विश्वनाथन आनंद ने उन्हें बधाई देते हुए ट्वीट किया था.
आर वैशाली के परिवार में शतरंज खेलने का माहौल है. उनका 15 साल का भाई आर प्रज्ञानंद दुनिया के सबसे कम उम्र के ग्रैंड मास्टर्स में से एक हैं. 19 साल की बड़ी बहन आर वैशाली वीमैन ग्रैंड मास्टर हैं. दोनों ही भाई बहनों ने बहुत कम उम्र से शतरंज खेलना शुरू कर दिया था.
वैशाली ने अपने करियर की शुरुआत में ही साल 2012 में अंडर-11 और अंडर-13 नैशनल चैंपियनशिप जीत कर बड़ी कामयाबी हासिल की. उसी साल उन्होंने कोलंबो में अंडर-12 श्रेणी में एशियाई चैंपियनशिप और सोलवेनिया में यूथ चेस चैंपियनशिप अपने नाम किया.

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शुरुआती दौर की परेशानी
चेन्नई में शतरंज खेलने की संस्कृति काफी समृद्ध है लेकिन इसके बावजूद वैशाली बताती हैं कि उन्हें शुरुआत में आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा था क्योंकि ट्रेनिंग और यात्राओं की वजह से उन्हें यह खेल महंगा पड़ रहा था.
ट्रेनिंग के शुरुआती दिनों में उनके पास कंप्यूटर नहीं था और वो अपनी मौलिक जानकारियों और रणनीति विकसित करने के लिए किताबों पर ही निर्भर थीं.
वो शुरुआत में शतरंज के कई विकसित सॉफ्टवेयर और टूल्स से महरूम रहीं. स्लोवेनिया में 2012 में वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप जीतने के बाद वैशाली को स्पॉन्सरशिप के जरिए लैपटॉप मिला. जिसकी मदद से वो एक खिलाड़ी के तौर पर आगे और मजबूत हुई.
इसके बाद वैशाली और उनके भाई ने स्पॉन्सर्स का ध्यान अपनी ओर खींचना शुरू किया. वैशाली कहती हैं कि उनके माता-पिता ने हमेशा उनका साथ दिया.
उनके पिता ने उनकी ट्रेनिंग संबंधी ज़रूरतों को पूरा किया तो माँ टूर्नामेंट के दौरान उनके साथ बनी रहीं.
वैशाली कहती हैं कि दुनिया की सबसे कम उम्र की ग्रैंड मास्टर्स में से एक बनने की वजह से भी उनके लिए चीजें बाद में आसान हुईं.
हालांकि दोनों भाई-बहन अक्सर प्रैक्टिस साथ नहीं करते हैं लेकिन वे रणनीति पर बातचीत करने पर बहुत वक्त एक साथ बिताते हैं.
उनके भाई प्रज्ञानंद ने कई अहम सलाह देकर कई टूर्नामेंट की तैयारियों में वैशाली की मदद की है.
महिला और पुरुष खिलाड़ियों के बीच भेदभाव
उनकी करियर में अहम पड़ाव उस वक्त आया जब जून 2020 में उन्होंने पूर्व विश्व चैंपियन एंटोनिटा स्टेफानोवा को FIDE chess.com वीमेन्स स्पीड चेस चैंपियनशिप में हराया. उन्होंने इस जीत के साथ शतरंज की दुनिया में हलचल पैदा कर दी.
वैशाली कहती हैं कि लगातार मिलती कामयाबी और तारीफों की वजह से उन्हें और कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा मिलती है.
उनका मकसद अब वीमेन इंटरनेशनल मास्टर्स का ख़िताब हासिल करना है और उसके बाद ग्रैंड मास्टर पर उनकी नज़र है.
वैशाली ने शतरंज की दुनिया में खुद से एक ऊंचाई हासिल की है लेकिन वो कहती हैं कि अपने करियर के दौरान कई दूसरी महिला खिलाड़ियों को कई तरह के भेदभाव का सामना करना पड़ता है.
वो कहती हैं कि महिला खिलाड़ियों की उपलब्धि को पुरुष खिलाड़ियों की उपलब्धि की तरह नहीं देखा जाता है. महिलाओं और पुरुषों को मिलने वाली पुरस्कार राशि में यह फर्क आप देख सकते हैं.
(यह लेख बीबीसी को ईमेल के ज़रिए आर वैशाली के भेजे जवाबों पर आधारित है.)
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