BBC ISWOTY- राही सरनोबत: रिटायरमेंट के कगार से लौटकर ओलंपिक पदक की दावेदार बनने तक

राही सरनोबत

महाराष्ट्र के कोल्हापुर की रहने वाली राही सरनोबत अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में अपनी उपलब्धियों के लिए सुर्खियों में रहती हैं. उन्होंने 2019 में जर्मनी के म्यूनिख में हुए आईएसएसएफ़ वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता है. उन्होंने यह कामयाबी 25 मीटर पिस्टल शूटिंग में हासिल की.

इसके साथ ही 2021 में होने वाले टोक्यो ओलंपिक के लिए उनकी जगह पक्की हो गई है. उन्हें अर्जुन अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है.

सरनोबत ने कोल्हापुर में अपने स्कूल के दिनों में पहली बार एनसीसी कैडेट के तौर पर बंदूक पकड़ी थी. वो इसके इस्तेमाल में काफी सहज थीं. इससे उन्हें ताकत का भी एहसास आता था.

लेकिन एक खेल के तौर पर निशानेबाजी में उनकी दिलचस्पी जब बढ़ी जब उनकी स्कूल की तेजस्वनी सावंत ने 2006 में ऑस्ट्रेलिया में हुए कॉमनवेल्थ खेलों में निशानेबाजी का गोल्ड मेडल जीता था.

सरनोबत कहती हैं कि तेजस्वनी सावंत को गोल्ड मेडल जीतता देखकर वो इस खेल को लेकर प्रेरित हुई. उन्होंने इसके बाद तुरंत ही अपने शहर में निशानेबाजी की ट्रेनिंग को लेकर सुविधाओं की खोजबीन शुरू कर दी.

राही सरनोबत

मुश्किलों से यूँ बाहर निकली

सरनोबत को जल्द ही इस बात का एहसास हो गया कि कोल्हापुर में निशानेबाजी की ट्रेनिंग को लेकर सुविधाओं का अभाव है. उनका कहना है कि वो बराबर अपने कोच से अपर्याप्त सुविधाओं को लेकर शिकायत करती रहती थीं. उनके कोच तब उन्हें सुविधाओं को लेकर ज्यादा नहीं सोचने को कहते थे और अपना सबसे बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करने की बात करते थे.

सरनोबत के माता-पिता ने पूरी तरह से उनका साथ दिया. उन्होंने इस बात का पूरा ख़याल रखा कि शुरुआती हताशा की वजह से कहीं सरनोबत का अपने सपनों से मोहभंग नो हो जाए.

सरनोबत ने बेहतर सुविधाओं के लिए मुंबई में अपना वक्त ज्यादा गुजारना शुरू किया. हालांकि फिर भी उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था. इसमें प्रैक्टिस के लिए हथियार और गोलियों को लेकर जूझना भी शामिल था.

लेकिन सरनोबत ने हार नहीं मानी और राष्ट्रीय स्तर के चैम्पियनशिप में उन्होंने मेडल जीतने शुरू कर दिए.

राही सरनोबत

रिटायरमेंट के बारे में सोचने पर मजबूर

घरेलू प्रतिस्पर्धाओं में बेहतरीन प्रदर्शन के बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया. अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में उन्हें सबसे शुरुआती कामयाबी पुणे में हुए यूथ कॉमनवेल्थ गेम्स में हासिल हुई. इसका आयोजन साल 2008 में हुआ था.

इसके बाद उन्होंने ओलंपिक, कॉमनवेल्थ, एशियन गेम्स और आईएसएसएफ़ वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया.

एक खिलाड़ी के तौर पर सरनोबत ने बुरा दौर देखा लेकिन वो उन हालातों से और मज़बूत होकर बाहर निकलीं. 2015 में लगी चोट की वजह से उन्हें अपना संतोषजनक प्रदर्शन करने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. उस वक्त वो रिटायरमेंट के बारे में सोचने पर मजबूर हो गई थीं.

लेकिन जकार्ता में 2018 में हुए एशियाई खेलों में उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर उन्होंने एक बार फिर खेल जगत में शानदार वापसी की. वो एशियाई खेलों में एकल प्रतिस्पर्धा में गोल्ड जीतने वाली पहली महिला बनीं. इसके एक साल के बाद 2019 में उन्होंने आईएसएसएफ़ वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता और टोक्यो ओलंपिक के लिए अपनी सीट पक्की की.

सरनोबत की उपलब्धियों की वजह से उन्हें 2018 में अर्जुन अवार्ड से भी सम्मानित किया गया. वो मानती हैं कि यह उनकी ज़िंदगी का एक सबसे महत्वपूर्ण लम्हा था.

सरनोबत अब देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना चाहती हैं. उन्हें इस बात की भी उम्मीद है कि वो देश के सबसे बड़े खेल अवार्ड राजीव गांधी खेल रत्न की भी मज़बूत हक़दार बन सकेंगी.

(यह लेख बीबीसी को ईमेल के ज़रिए राही सरनोबत के भेजे जवाबों पर आधारित है.)

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