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चुनौतियाँ भरा राजनीतिक सफ़र | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
क़रीब चार साल पहले पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के पति आसिफ़ अली ज़रदारी जेल में थे और उनके ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के कई मामले चल रहे थे. भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते पाकिस्तान में उन्हें 'मिस्टर टेन परसेंट' कहा जाने लगा था. और तो और बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद भी किसी ने नहीं सोचा था कि पाकिस्तान की राजनीति इस तरह करवट लेगी कि अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा शख़्श एक दिन पाकिस्तान का राष्ट्रपति बन जाएगा. लेकिन जब परिस्थितियाँ बदलती हैं तो कुछ ऐसी ही बदलती हैं. 11 साल जेल में रहे आसिफ़ अली ज़रदारी अब पाकिस्तान की राजनीति के सबसे शीर्ष पद पर पहुँच गए हैं. बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद हुए चुनाव में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) को सबसे ज़्यादा सीटें मिलीं और फिर गठबंधन सरकार का नेतृत्व भी पार्टी को मिल गया. तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ पर दबाव बना और पिछले महीने उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा. अब 52 वर्षीय आसिफ़ अली ज़रदारी पाकिस्तान के राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं. राजनीतिक करियर बेनज़ीर भुट्टो से विवाह से पहले आसिफ़ अली ज़रदारी का नाम राजनीतिक हलके में शायद ही कोई जानता होगा. 21 जुलाई 1956 को सिंध के एक ज़मींदार परिवार में पैदा हुए ज़रदारी ने 1987 में बेनज़ीर भुट्टो से शादी की.
राजनीति से कोई ख़ास लगाव न होने के बावजूद बेनज़ीर भुट्टो से विवाह के बाद उन्होंने अपनी स्थिति मज़बूत करने की कोशिश शुरू कर दी. धीरे-धीरे उन्होंने अपनी स्थिति मज़बूत की और एक समय सरकार में मंत्री भी बने. उन्होंने वित्त और पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की ज़िम्मेदारी संभाली. लेकिन जैसे ही बेनज़ीर भुट्टो की सरकार गिरी, ज़रदारी पहले व्यक्ति थे, जिन्हें जेल की हवा खानी पड़ी. वर्ष 1990 में उन्हें जेल भेजा गया और वे तीन साल जेल में रहे. एक बार फिर जब बेनज़ीर की सरकार बनी, तो उन्हें रिहा कर दिया गया. लेकिन 1996 में बेनज़ीर की सरकार जाने के आधे घंटे के अंदर एक बार फिर ज़रदारी जेल पहुँच गए. उसके बाद ज़रदारी ने आठ साल जेल में बिताए. लेकिन नवंबर 2004 में भ्रष्टाचार, हत्या और ड्रग की तस्करी के कुल 14 मामलों से बरी होने के बाद उन्हें रिहा किया गया. पिछले साल दिसंबर में बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद ज़रदारी एक बार फिर राजनीतिक परिदृश्य पर प्रमुखता से आए. पार्टी की कमान उन्हें मिली और फिर पार्टी को गठबंधन सरकार का नेतृत्व भी मिला. चुनौती और अब आसिफ़ अली ज़रदारी पाकिस्तान के राष्ट्रपति भी चुन लिए गए हैं. लेकिन उनके सामने कम चुनौतियाँ नहीं हैं. राजनीतिक अस्थिरता के साथ-साथ देश में बढ़ते चरमपंथ से निपटना भी उनकी सबसे बड़ी चुनौती होगी.
ज़रदारी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप भी इतनी जल्दी उनका पीछा छोड़ने वाले नहीं हैं. उन पर ये भी आरोप है कि भ्रष्टाचार के पैसों से उन्होंने इंग्लैंड के सरे में 20 बेडरूम का आलीशान घर बनवाया है. शुरू में तो बेनज़ीर भुट्टो और आसिफ़ अली ज़रदारी ने इससे इनकार किया था कि ये घर उनका है. लेकिन वर्ष 2004 में ज़रदारी ने स्वीकार कर लिया था कि ये घर उन्हीं का है. एक समय ज़रदारी पर अपने साले मुर्तज़ा भुट्टो की हत्या की साज़िश रचने का भी आरोप लगा. वर्ष 2006 में मुर्तज़ा भुट्टो की पुलिस गोलीबारी में मौत हो गई थी. इसी साल एक अदालत ने ज़रदारी को इस आरोप से बरी कर दिया था. पाकिस्तान की राजनीति में आए बदलाव की बयार ने आसिफ़ अली ज़रदारी को शीर्ष पद पर पहुँचा दिया. |
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