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पाकिस्तान में होगी चरमपंथ पर बहस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान सरकार ने कहा है कि इस्लामी चरमपंथ से निपटने के लिए आम राय तैयार करने के मक़सद से संसद में बहस कराई जाएगी. पाकिस्तान सरकार की सूचना एवं प्रसारण मंत्री शीरी रहमान ने बताया कि जनमत तैयार करने के लिए संसद में इस मसले पर बहस कराई जा सकती है. चरमपंथियों की तरफ़ से लगातार मिल रही चुनौतियों पर पाकिस्तान की गठबंधन सरकार के कई वरिष्ठ सदस्यों ने बुधवार को इस्लामाबाद में एक बैठक की. पिछले दिनों अमरीका और अफ़ग़ानिस्तान की तरफ़ से पाकिस्तान की आलोचना की गई है. जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान सरकार चरमपंथियों से निपटने के लिए सख्त कदम नहीं उठा रही है. कुछ दिनों में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी अपनी पहली अमरीका यात्रा पर जाने वाले हैं. उससे पहले सभी वरिष्ठ नेताओं ने चरमपंथ के मुद्दे पर चर्चा की. क़बाइली नेताओं से बात शीरी रहमान ने बताया कि चरमपंथियों गतिविधियों पर काबू पाने के लिए क़बाइली इलाक़ों में लोगों से बात करनी होगी. उन्होंने कहा कि सेना इसका कोई हल नहीं है. इस बैठक में मौजूद गठबंधन के सभी नेताओं ने एक बार फिर दोहराया कि पाकिस्तान की सीमा के अंदर किसी भी तरह की आतंकवादी हमले और विदेशी सेनाओं के किसी भी तरह के हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे. शीरी रहमान ने बताया कि बैठक में इस बात पर चर्चा की गई कि पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक स्थायित्व सबसे पहले है और किसी को भी इससे खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा. अमरीका का दबाव इसी महीने अमरीका के रक्षा सचिव रॉबर्ट गेट्स ने कहा था कि वो अफ़ग़ानिस्तान में सेना की अतिरिक्त टुकड़ी भेजना चाहते हैं ताकि अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तान की तरफ़ से हो रही चरमपंथी घुसपैठ को रोका जा सके. पिछले दिनों ही अमरीकी कांग्रेस में एक बिल भी पेश किया गया था जिसमें सिफ़ारिश की गई थी कि पाकिस्तान में नागरिक करार को बढ़ाने के लिए अमरीकी मदद को तीन गुना कर दिया जाए और दोनों देशों के पारंपरिक सैन्य समझौतों से पीछे हट जाया जाए. अमरीका का ये क़दम उस झुंझलाहट को भी दर्शाता है जिसमें पाकिस्तान ने तालेबान समर्थित चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कोई सख़्त क़दम नहीं उठाया. ये चरमपंथी पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान सीमा पर अपनी गतिविधियाँ चलाते रहते हैं. वैसे अमरीका इस बात पर भी नज़र रखे हुए है जिसमें पाकिस्तान केंद्र सरकार प्रशासित कबाइली इलाक़ों में शांति समझौते कर रहा है. |
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