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शनिवार, 01 मार्च, 2008 को 18:57 GMT तक के समाचार
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'कश्मीर' बाद में सुलझा लेंगे: ज़रदारी
आसिफ़ अली ज़रदारी
बेनज़ीर भुट्टो की मौत से पहले ज़रदारी नेपथ्य में रहते आए हैं
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता आसिफ़ अली ज़रदारी ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान को दशकों पुराने कश्मीर मसले को सुलझाने से पहले आर्थिक संबंध मज़बूत बनाने चाहिए.

पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के पति ज़रदारी ने कहा है कि एक बार दोनों देशों के रिश्ते मज़बूत हो जाएँ तो फिर विवादित विषयों को सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए.

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने हाल ही में हुए चुनाव में सबसे अधिक सीटें जीती हैं और वह पाकिस्तान में अपना प्रधानमंत्री बनाने जा रही है.

उल्लेखनीय है कि भारत और पाकिस्तान दोनों ही कश्मीर पर अपना दावा जताते हैं और 1947 में हुए विभाजन में अलग हुए दोनों देशों के बीच तीन बार युद्ध हो चुका है जिसमें से दो युद्ध कश्मीर के विवाद को लेकर हुए हैं.

अब तक पाकिस्तान के नेता कहते रहे हैं कि कश्मीर का मसला सबसे अहम है और इसको सुलझाए बिना दोनों देशों के संबंध मज़बूत नहीं हो सकते.

जबकि भारत मानता है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है.

अहम बदलाव

कश्मीर के मसले को फ़िलहाल दरकिनार करने का ज़रदारी का बयान पाकिस्तान के दृष्टिकोण से अहम बदलाव के संकेत देता है.

भारत के टेलीविज़न चैनल सीएनएन-आईबीएन के एक कार्यक्रम में पत्रकार करण थापर को दिए गए एक साक्षात्कार में आसिफ़ अली ज़रदारी ने कहा है कि भारत-पाकिस्तान के संबंधों को कश्मीर विवाद में 'बाँधकर नहीं रखा जा सकता'.

 दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाकर और एक दूसरे पर व्यापारिक निर्भरता को बढ़ाकर दोनों देशों में डर के माहौल को कम किया जा सकता है
आसिफ़ अली ज़रदारी

उन्होंने कहा कि दोनों देश 'इंतज़ार कर सकते हैं' और आने वाले पीढ़ियाँ इस विवाद को सुलझा सकती हैं जब दोनों देशों के बीच 'विश्वास का माहौल' बन जाए.

'डेविल्स एडवोकेट' कार्यक्रम में पीपीपी नेता ने कहा कि कश्मीर पर पाकिस्तान का एक मत है और भारत की अपनी राय है लेकिन दोनों ही देश 'असहमत होने के लिए सहमत' हो सकते हैं.

उन्होंने कहा, "ऐसा देशों के बीच होता है."

यह पूछे जाने पर कि क्या पीपीपी इस बात के लिए तैयार है कि कश्मीर के मसले को वैसे ही दरकिनार कर दिया जाए जैसा कि भारत और चीन ने अपने संबंधों को मज़बूत बनाने के लिए सीमा के विवाद को कर दिया है, तो उन्होंने कहा, "यक़ीनन"

इस बात से असहमत होते हुए कि कश्मीर मसले का हल पाकिस्तान में सैन्य शासन के रहते सबसे अच्छे ढंग से हो सकता था, पीपीपी नेता ने कहा, "दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाकर और एक दूसरे पर व्यापारिक निर्भरता को बढ़ाकर दोनों देशों में डर के माहौल को कम किया जा सकता है."

उन्होंने स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के बीच अब तक की सबसे अच्छी समझ बनी थी और कहा, "मैं दोनों देशों के बीच संबंध को ऐसे स्तर तक ले जाना चाहता हूँ जहाँ दोनों ही ओर से डर का माहौल ख़त्म हो जाए."

यह पूछे जाने पर वे जो कह रहे हैं उसे क्या पाकिस्तान के दूसरे राजनीतिक दलों का समर्थन मिलेगा, उन्होंने कहा, "मैं समझता हूँ कि मैं जिस आर्थिक निर्भरता की बात कर रहा हूँ, उसके बारे में किसी ने पाकिस्तान को नहीं बताया कि वे किस स्थिति में हैं और उन्हें क्या हासिल हो सकता है."

यह पूछे जाने पर कि वर्ष 2006 में पीपीपी और नवाज़ शरीफ़ की पार्टी के साथ जो सहमति बनी थी उसके अनुसार दोनों पार्टियों ने प्रतिबद्धता ज़ाहिर की थी कि कश्मीर के मसले को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के आधार पर सुलझाया जाएगा, ज़रदारी ने कहा, "मैं किसी मुद्दे से बंधकर नहीं रहना चाहता."

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री भारत की यात्रा पर आएँगे और दूसरे दलों के नेता भी उनके साथ आएँगे.

उल्लेखनीय है कि पीपीपी ने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के साथ मिलकर सरकार बनाने जा रही है और पीपीपी को अपना प्रधानमंत्री नियुक्त करना है.

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