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मंगलवार, 03 जून, 2008 को 09:36 GMT तक के समाचार
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'तालेबान विरोधी अभियान अभावग्रस्त'
नैटो सैनिक (फ़ाइल फ़ोटो)
नैटो अभियान के प्रमुख संसाधनों की कमी की बात पहले भी कहते रहे हैं
अफ़ग़ानिस्तान में नैटो गठबंधन सेना के अभियान (आईएसएएफ़) के पास संसाधनों के अभाव का एक और ताज़ा बयान सामने आया है.

पिछले 15 महीनों से अभियान का नेतृत्व कर रहे जनरल डेन मैकनील ने कहा है कि नैटो सेना का अभियान अभावग्रस्त है.

डेन मैकनील अमरीकी जनरल हैं और अभी तक अफ़ग़ानिस्तान में नैटो के अभियान की बागडोर उनके हाथ थी और मंगलवार को यह कमान उन्होंने छोड़ दी है.

मंगलवार को मैकनील ने नैटो आईएसएएफ़ की ज़िम्मेदारी एक अन्य अमरीकी जनरल डेविड मैककिरमैन को सौंप दी है.

फिलहाल नैटो आईएसएएफ़ के अभियान में 40 देशों के कुल 53 हज़ार सैनिक काम कर रहे हैं पर मैकनील का कहना है कि यह संख्या और इनके लिए उपलब्ध संसाधन पर्याप्त नहीं हैं.

पाकिस्तान से अपील

उन्होंने कहा कि तालेबान जैसे चरमपंथी संगठन से निपटने के लिए अफ़ग़ानिस्तान में नैटो अभियान को और मज़बूत करने की ज़रूरत है.

इसके लिए वहाँ और अधिक सैनिकों और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी पड़ेगी.

साथ ही उन्होंने पाकिस्तान से भी अपील की कि पाकिस्तान तालेबान पर और दबाव बनाने का काम करे.

जनरल मैकनील की अफ़ग़ानिस्तान में बहुत प्रतिष्ठा है और उन्हें स्पष्टवादी समझा जाता और वह राजनीति से दूर रहते हैं.

 यदि बगावत को दबाने के लिए बने नियमों का पालन ठीक प्रकार से किया जाए तो अफ़ग़ानिस्तान में ही 400 हज़ार सैनिकों की ज़रूरत होगी
जनरल डेन मैकनील

जब उन्होंने फ़रवरी 2007 में वहाँ काम संभाला था तब नैटो आईएसएएफ़ के पास 33 हज़ार सैनिक थे और अब 53 हज़ार सैनिक होने के बावजूद वह कह रहे हैं कि यह संख्या पर्याप्त नहीं है.

जनरल मैकनील ने कहा है कि यह कम संसाधनों के साथ लड़ा जाने वाला युद्ध है. इसमें और ज़्यादा लोगों की ज़रूरत है, और ज़्यादा वायुयानों की ज़रूरत है, ज़्यादा गुप्तचरों और धन की ज़रूरत है.

संसाधनों की कमी

उन्होंने कहा कि यदि बगावत को दबाने के लिए बने नियमों का पालन ठीक प्रकार से किया जाए तो अफ़ग़ानिस्तान में ही 400 हज़ार सैनिकों की ज़रूरत होगी.

ग़ौरतलब है कि तालेबान चरमपंथियों से निपटने के लिए पिछले 15 महीनों से लगातार अमरीकी सेना के नेतृत्व में नैटो गठबंधन सेना तालेबान विरोधी अभियान चला रही है.

इस बीच अनेक तालेबान कमांडर मारे गए हैं और बगावत को दबाने की रणनीति विकसित हुई है. इसमें दुनिया के कई देशों की सेना और संसाधन इस्तेमाल हो रहे हैं.

पर पिछले कुछ महीनों के दौरान नैटो के अधिकारियों की ओर से संसाधनों और सैनिकों की कमी की चिंता व्यक्त की जाती रही है.

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