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तालेबान के ख़िलाफ़ नैटो की लामबंदी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़्रांस के राष्ट्रपति और ऑस्ट्रेलिया के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री ने अफ़ग़ानिस्तान दौरे पर तालेबान के ख़िलाफ़ जारी लड़ाई में जीत को ज़रूरी बताया है. फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी ने कहा है कि नैटो और सहयोगी देश आतंकवाद के ख़िलाफ़ एक ऐसा युद्ध लड़ रहे हैं जिसे वे किसी भी क़ीमत पर हार नहीं सकते. ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री केविन रुड ने अफ़ग़ानिस्तान में तैनात अपने देश के सैनिकों से मुलाक़ात की. उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई से मुलाक़ात में उन्हें भरोसा दिलाया ऑस्ट्रेलियाई सैनिक वहाँ लंबे अरसे तक टिके रहने के लिए तैयार हैं. रूड इराक़ से अपने कुछ सैनिकों को वापस बुलाने की घोषणा कर चुके हैं लेकिन अफ़ग़ानिस्तान के बारे में उनका कहना था कि वह वहाँ स्थायित्व और पुनर्निमाण के लिए कटिबद्ध हैं. सारकोज़ी की पहली यात्रा फ़्रांसीसी राष्ट्रपति ने अफ़ग़ानिस्तान में सबसे पहले नैटो के नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहायता दल के प्रमुख जनरल डैन मैकनील से मुलाकात की. फ़्रांस के राष्ट्रपति के तौर पर ये निकोला सार्कोज़ी की पहली अफ़ग़ानिस्तान यात्रा है. वे अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई और फ़्रांसीसी सैनिकों से भी मुलाकात कर रहे हैं. फ़्रांसीसी राष्ट्रपति महल के एक बयान में कहा गया है कि ये यात्रा अफ़ग़ानिस्तान में स्थायित्व लाने और पुनर्निमाण के काम में फ़्रांस के समर्थन को फिर से दर्शाएगी. | इससे जुड़ी ख़बरें 'युद्ध में किसी क़ीमत पर हार नहीं सकते'22 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस मुल्ला उमर ने चेतावनी दी18 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस तालेबान हमले में 15 सुरक्षाकर्मी मारे गए18 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस मूसा क़ला में लोगों का लौटना शुरु16 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'नैटो क़ैदियों को सरकार को न सौंपे'13 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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