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अमरीका ने जर्मनी से और सैनिक मांगे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी रक्षा मंत्रा रॉबर्ड गेट्स ने जर्मनी से अनुरोध किया है कि वह अफ़ग़ानिस्तान में लड़ रही नैटो सेना की ताक़त बढ़ाने के लिए कुछ और सैनिक भेजे. रॉबर्ट गेट्स ने आगाह भी किया है कि अगर अफ़ग़ानिस्तान में नैटो सेनाओं की मज़बूती और नहीं बढ़ाई गई तो उस देश में नैटो सेनाओं की साख़ ख़तरे में पड़ सकती है. रॉबर्ट गेट्स ने इस आशय का एक पत्र जर्मन रक्षा मंत्री फ्रेंज़ जोसेफ़ को लिखा है जिसे जर्मनी एक अख़बार ने "असामान्य रूप से सख़्त" क़रार दिया है और जर्मनी रक्षा मंत्री ने जो जवाब लिखा है उसे भी इसी तरह का सख़्त बताया गया है. संवाददाताओं का कहना है कि दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच इस पत्र व्यवहार को अफ़ग़ानिस्तान में पश्चिमी देशों के मिशन और व्यापक रूप में नैटो संगठन के सदस्य देशों के बीच संबंधों में तनाव के तौर पर देखा जा रहा है. कनाडा के प्रधानमंत्री स्टीफ़न हार्पर ने अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन को अल्टीमेटम जारी किया है कि नैटो ने अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिणी हिस्से में अगर और सैनिक तैनात नहीं किए तो कनाडा अफ़ग़ानिस्तान में अपना सैनिक मिशन समाप्त कर देगा. पत्र का मामला जर्मन अख़बार ज़ुएत्दोयशुह त्साईतुंग (Sueddeutsche Zeitung) ने कहा है कि यह पत्र दस दिन पहले भेजा गया था. अख़बार ने इस पत्र का ब्यौरा छापने का भी वादा किया है. रॉबर्ट गेट्स ने इस पत्र में जर्मन सरकार से अनुरोध किया है कि अफ़ग़ानिस्तान में कई हज़ार और सैनिक भेजने के लिए संसद की मंज़ूरी हासिल करे और उनमें से कुछ सैनिक अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिणी हिस्से में भी तैनात किए जाएँ. ग़ौरतलब है कि अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिणी इलाक़े को ज़्यादा ख़तरनाक माना जाता है.
अफ़ग़ानिस्तान में नैटो के नेतृत्व में लगभग 37 हज़ार सैनिक विभिन्न क्षेत्रों में तैनात हैं जो मुख्य रूप से तालेबान और उनके समर्थकों से लड़ाई कर रहे हैं. फिलहाल जर्मनी के 3200 सैनिक अफ़ग़ानिस्तान में तैनात हैं जो मुख्य रूप से उत्तरी हिस्से में सक्रिय हैं और कुछ जर्मन सैनिक राजधानी काबुल के आसपास भी तैनात हैं. जर्मनी की संसद की जो मंज़ूरी पहले से मिली हुई है उसके अनुसार उसके सैनिक सिर्फ़ असाधारण हालात में ही कहीं और भेजे जा सकते हैं. रॉबर्ट गेट्स के पत्र में कहा गया है कि अफ़ग़ानिस्तान में तैनात अमरीकी सैनिकों पर बहुत बोझ बढ़ गया है और इन हालात से नैटो गठबंधन में भी दरार पड़ने की नौबत नज़र आ रही है. अमरीका पहले ही वादा कर चुका है कि वह अफ़ग़ानिस्तान में 3000 अतिरिक्त सैनिक भेज रहा है. साथ ही वह अपने सहयोगी देशों फ्रांस और जर्मनी से अनुरोध कर रहा है कि वे भी कुछ अतिरिक्त सैनिक अफ़ग़ानिस्तान में भेजें. अभी तक तो नैटो के ज़्यादातर सदस्य देशों ने अपने सैनिक दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में भेजने से इनकार कर दिया है. फ्रांस के रक्षा मंत्री हर्वी मोरीन ने गुरूवार को रॉबर्ट गेट्स से वाशिंगटन में मुलाक़ात के दौरान अफ़ग़ानिस्तान के लिए एक व्यापक रणनीति बनाने का आहवान किया लेकिन अतिरिक्त सैनिक भेजने का उन्होंने कोई वादा नहीं किया. वाशिंगटन में बीबीसी संवाददाता जोनाथन बील का कहना है कि अमरीका नैटो के अपने सहयोगी देशों के साथ सार्वजनिक रूप से किसी टकराहट के रास्ते से बचता रहा है लेकिन अमरीका के एक वरिष्ट राजनयिक ने सीनेट की एक कमेटी से बातचीत में कहा, "हम नैटो के अपने सहयोगी देशों से और ज़्यादा करने की उम्मीद कर रहे हैं." इस राजनयिक ने कहा कि बहुत कम सहयोगी देशों के सैनिक अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिणी हिस्से में लड़ाई में मदद कर रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें अफ़ग़ानिस्तान ने नए दूत का विरोध किया27 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ान पत्रकार को मौत की सज़ा23 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान में अतिरिक्त तैनाती16 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस पूर्व तालेबान कमांडर अब गवर्नर07 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान में एक भारतीय की मौत03 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान में 16 पुलिसकर्मी मारे गए01 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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