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बुधवार, 16 जनवरी, 2008 को 09:59 GMT तक के समाचार
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अफ़ग़ानिस्तान में अतिरिक्त तैनाती
अमरीकी फ़ौज
अमरीका के नेतृत्व वाली फौजों ने 2001 के अंत में तालेबानी सरकार को गिरा दिया था.
अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने कहा है कि आगामी वसंत में अमरीका के लगभग 3,200 अतिरिक्त सैनिक अफ़ग़ानिस्तान भेजे जाएंगे.

पेंटागन के एक वक्तव्य में कहा गया है कि इनमें से 2,200 मरीन सैनिक अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिणी हिस्से में तालेबान के साथ लड़ने में नैटो सैनिकों की मदद करेंगे.

पेंटागन ने कहा है कि इन अतिरिक्त सैनिकों को क़रीब सात महीनों के लिए वहाँ तैनात किया जाएगा. बाकी एक हज़ार सैनिक अफ़ग़ान सुरक्षा बलों की मदद करेंगे.

अफ़ग़ानिस्तान में पहले ही अमरीकी सेना के क़रीब 26,000 सैनिक मौजूद हैं, जिनमें से आधे नैटो के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहायता बल (इनसाफ़) के साथ काम कर रहे हैं.

बढ़ता विद्रोह

अफ़ग़ानिस्तान में तैनात अंतरराष्ट्रीय सेनाओं के कमांडर महीनों से कहते रहे हैं कि उन्हें तालेबान विद्रोहियों से निपटने के लिए अतिरिक्त फौज की ज़रूरत है क्योंकि तालेबान का विद्रोह पिछले दो साल से बढ़ता ही जा रहा है.

पेंटागन के एक प्रवक्ता ग्यौफ़ मोरैल ने पिछले सप्ताह, कहा था, "हमारे सहयोगी देश इस स्थिति में नहीं हैं कि अतिरिक्त सैनिक अफ़ग़ानिस्तान भेज सकें इसलिए हम ही इस अतिरिक्त भार को वहन करने के बारे में विचार कर रहे हैं."

प्रवक्ता ने कहा कि हमारा विचार है कि तालेबान विद्रोहियों से मुक़ाबला करने के लिए फ़ौज को सर्दियों में बर्फ़ पिघलने के बाद भेजा जाए.

 क़रीब 2,200 मरीन सैनिक देश के दक्षिणी हिस्से में तालेबान के साथ लड़ने में नैटो की मदद करेंगे. इन्हें क़रीब सात महीनों के लिए वहाँ तैनात किया जाएगा, बाकी एक हज़ार सैनिक अफ़ग़ान सुरक्षा बलों की मदद करेंगे
पैंटागन

मंगलवार को जारी पेंटागन के बयान के अनुसार सेना की यह अतिरिक्त तैनाती कुछ समय के लिए दक्षिण अफ़ग़ानिस्तान में अंतरराष्ट्रीय सेना की ज़रूरतों को पूरा कर देगी.

पेंटागन के बयान के मुताबिक, नैटो देशों के एक सदस्य होने के नाते अमरीका अपनी और से यह सुनिश्चित करना चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय सेना के पास पर्याप्त सैनिक हों ताकि पिछले छह सालों से तालेबान के ख़िलाफ़ अफ़ग़ान और नैटो के प्रयासों की बदौलत हासिल हुए परिणाम व्यर्थ न हो जाएं.

बयान के अनुसार यह सुनिश्चित करने के लिए भी बात की जाएगी कि भविष्य में अमरीका या दूसरे किसी साथी की ओर से फौज भेजने की ज़रूरत को कम किया जा सके.

अफ़ग़ानिस्तान पर अमरीका के नेतृत्व वाली फौजों के हमले ने 2001 के अंत में तालेबान सरकार को गिरा दिया था.

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