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'नागरिक मर रहे हैं अफ़ग़ानिस्तान में' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान में नैटो के नेतृत्ववाली सेना ने कहा है कि पिछले 12 महीनों के दौरान तालेबान के हमलों में मारे गए नागरिकों की संख्या बढ़ी है. नैटो के अधिकारियों ने कहा है कि तालेबान चरमपंथियों ने इस साल के पहले साढ़े तीन महीनों में 240 अफ़ग़ानी नागरिकों को मार डाला है. यह संख्या पिछले साल की इसी अवधि में मारे गए नागरिकों की संख्या की लगभग छह गुना है. उन्होंने कहा है कि इनमें से ज़्यादातर मौतें अंतरराष्ट्रीय सेना पर तालेबानियों के आत्मघाती हमलों के दौरान हुई हैं. अधिकारियों ने यह भी कहा कि ऐसे नागरिकों की संख्या में भी कमी आई है जिन्हें नैटो के नेतृत्व वाली सेना ने मारा है लेकिन इन आँकड़ों पर स्थानीय संगठनों से विवाद बना हुआ है. सैन्य अधिकारियों की मानें तो सेना के हमलों में मारे गए आम नागरिकों की तादाद पिछले एक वर्ष में 31 से घटकर चार हो गई है. पर सेना के इस आकड़े को सुरक्षा मामलों की पड़ताल करने वाले एक स्थानीय संगठन ने ग़लत बताते हुए कहा है कि पिछले एक वर्ष के दौरान अंतरराष्ट्रीय सेना के हमलों में क़रीब 60 नागरिक मारे गए हैं. ग़ौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय सेना के हमलों में आम लोगों की मौत के मामलों की तीखी आलोचना होती रही है और इसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय सेना और अफ़ग़ानिस्तान सरकार के बारे में एक नकारात्मक सोच लोगों के बीच पनपी है. | इससे जुड़ी ख़बरें अफ़ग़ानिस्तान में तीन हमले23 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस तालेबान हमले में 11 पुलिसवालों की मौत14 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस 'ख़बर का असर अच्छा नहीं होगा'29 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस मिसाइल हमले में कई हताहत16 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस कंधार में आत्मघाती हमला, 100 की मौत17 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस वज़ीरिस्तान में 'संघर्षविराम' की घोषणा07 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस 'अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति चिंताजनक'30 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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