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वज़ीरिस्तान में 'संघर्षविराम' की घोषणा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के क़बायली इलाक़े दक्षिणी वज़ीरिस्तान से ख़बरें मिल रही हैं कि एक प्रमुख चरमपंथी गुट ने संघर्षविराम की घोषणा की है और शांति वार्ता में हिस्सा लेने की इच्छा ज़ाहिर की है. तहरीके तालेबान पाकिस्तान नामक संगठन ने बुधवार को इस संघर्षविराम की घोषणा की लेकिन इसके बारे में अभी ज़्यादा विवरण नहीं मिला है. इस संगठन को चरमपंथियों का ऐसा गठबंधन कहा जाता है जिसमें अनेक संगठन शामिल हैं. तहरीके तालेबान पाकिस्तान नामक इस संगठन के मुखिया बैतुल्लाह महसूद पर सरकार का आरोप है कि विपक्षी नेता बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के पीछे उनका ही हाथ है, हालाँकि महसूद ने बेनज़ीर भुट्टो की हत्या में अपना हाथ होने से इनकार किया है. बैतुल्लाह महसूद का जिस क़बायली इलाक़े में दबदबा है वह अफ़ग़ान सीमा से मिलता है. पाकिस्तान सरकार ने अभी इस संघर्षविराम की पुष्टि नहीं की है लेकिन आंतरिक मामलों के मंत्री हामिद नवाज़ ने कहा है कि राष्ट्रीय सरकार चरमपंथियों के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है. संवाददाताओं का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच अनाधिकारिक तौर पर बातचीत चल रही है और स्थानीय मौलवी इस बातचीत में मध्यस्थता कर रहे हैं. पाकिस्तान में बीबीसी संवाददाता इलियास ख़ान का कहना है कि उत्तरी और दक्षिणी वज़ीरिस्तान में लड़ाई पूरी तरह से बंद हो गई है लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह लड़ाई बर्फ़बारी की वजह से रुकी है या संघर्षविराम की वजह से. पाकिस्तानी सेना ने कहा है कि उत्तरी और दक्षिणी वज़ीरिस्तान में लड़ाई इसलिए रुकी है क्योंकि चरमपंथी फिर से इकट्ठा होकर हमलों की तैयारी करना चाहते हैं. चरमपंथियों के प्रवक्ता मौलवी मोहम्मद उमर ने बीबीसी को बताया कि संघर्षविराम अफ़ग़ान सीमा के निकटवर्ती क़बायली इलाक़ों और स्वात घाटी में लागू होगा. ग़ौरतलब है कि स्वात घाटी में भी हाल के समय में सेना तालेबान समर्थक लड़ाकों के साथ लड़ाई करती रही है. प्रवक्ता ने कहा कि उन्होंने इसलिए एकतरफ़ा संघर्षविराम की घोषणा की है क्योंकि सरकार ने वज़ीरिस्तान के कुछ इलाक़ों से सैनिक हटा लिए हैं और सैनिक अपने शिविरों में चले गए हैं जोकि चरमपंथियों की एक महत्वपूर्ण माँग रही है. रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने कहा है कि जो सैनिक पहले उन इलाक़ों में फैल गए थे जो बैतुल्लाह महसूद के नियंत्रण में थे, ऐसा लगता है कि वे सैनिक अब उन ठिकानों से हट गए हैं. संकेत बीबीसी संवागददाता का कहना है कि अब ऐसी संभावना है कि एक वरिष्ठ तालेबान कमांडर सिराजुद्दीन हक़्क़ानी अब बातचीत में हिस्सा ले सकते हैं. सिराजुद्दीन हक़्क़ानी दक्षिण-पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान से संबंध रखते हैं.
इस तरह का घटनाक्रम अमरीका और उसके नैटो सहयोगी देशों को नापसंद हो सकता है जिन्होंने इससे पहले भी वज़ीरिस्तान में किसी तरह के संघर्षविराम की आलोचना की है. एक संघर्षविराम पिछले साल यानी 2007 में ही समाप्त हुआ था. सिराजुद्दीन हक़्क़ानी के बारे में माना जाता है कि उन्होंने पाकिस्तानी सेना और बैतुल्लाह महसूद के बीच फ़रवरी 2005 में एक शांति समझौता कराया था. संवाददाताओं का कहना है कि वज़ीरिस्तान में सेना और चरमपंथियों के बीच शवों की अदला-बदली और बंधकों की रिहाई जैसी घटनाओं से भी संकेत मिलता है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत को काफ़ी महत्व दिया जा रहा है. कुछ पर्यवेक्षकों का कहना है कि पाकिस्तान में चरमपंथी गतिविधियों की समस्या अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति से नज़दीक से जुड़ी हुई है और पाकिस्तान सरकार तालेबान समर्थक चरमपंथियों का पूरी तरह सफ़ाया करने की इजाज़त तब तक नहीं दे सकती जब तक कि अफ़ग़ानिस्तान में हालात पूरी तरह से सरकार के नियंत्रण में नहीं आ जाते. पाकिस्तान अधिकारियों का कहना है कि बैतुल्लाह महसूद अल क़ायदा से जुड़े हुए हैं और पाकिस्तान में अनेक आत्मघाती हमले कराने में उनका हाथ रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें पाक हमले में 12 'चरमपंथी' मारे गए29 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस बंधक बनाए गए बच्चे रिहा हुए28 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस वज़ीरिस्तान में 40 चरमपंथी मारे गए24 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान में लड़ाई, अनेक हताहत22 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस वज़ीरिस्तान में '90 चरमपंथी' मारे गए18 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस 'चरमपंथियो ने किले पर क़ब्ज़ा छोड़ा'16 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान में कबायली नेताओं की हत्या07 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस बैतुल्ला: कट्टर कबायली चरमपंथी29 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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