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गुरुवार, 20 अक्तूबर, 2005 को 16:17 GMT तक के समाचार
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स्थिति सूनामी से भी बदतर: संयुक्त राष्ट्र
पाकिस्तान
भूकंप में पर्याप्त राहत सामग्री लोगों तक नहीं पहुँची है
संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ राहत संयोजक यान एगलैंड ने कहा है कि दक्षिण एशिया के भूकंप प्रभावित इलाक़ों में स्थिति दिसंबर में आए सूनामी से भी बदतर है.

यान एगलैंड ने आरोप लगाया है कि दाता देशों की ओर से ज़रूरत के मुताबिक़ सहायता न मिलने के कारण दक्षिण एशिया के भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़ रही है.

संयुक्त राष्ट्र का कहना कि सिर्फ़ पाँच प्रतिशत वित्तीय सहायता ही पहुँच पाई है. यान एगलैंड ने कहा कि वित्तीय सहायता में कमी और राहत सामग्री भेजने में आ रही मुश्किलों के कारण स्थिति दिसंबर में आए सूनामी से भी बदतर है.

उन्होंने कहा कि भूकंप में ज़्यादा लोग घायल हुए हैं और कई इलाक़ों में बच गए लोगों तक सहायता नहीं पहुँच पा रही क्योंकि वहाँ राहत कर्मी नहीं पहुँच पा रहे हैं.

एगलैंड ने कहा, "भूकंप के कारण दुर्गम इलाक़ों में सूनामी की तुलना में कहीं ज़्यादा लोग फ़ँसे हुए हैं. सूनामी से कहीं ज़्यादा लोग घायल हैं. जैसे-जैसे दिन और हफ़्ते बीतते जा रहे हैं वैसे-वैसे लोगों की मौत हो रही है और राहत के लिए वित्तीय सहायता और संसाधन नहीं आ रहे हैं."

यान एगलैंड ने अपील की कि घायलों को सुरक्षित जगह पहुँचाने के लिए बड़ी योजना चलाने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि जाड़े से पहले बेघर हुए 30 लाख लोगों के लिए भी राहत सामग्री पहुँचानी चाहिए.

लेकिन पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख़ुर्शीद महमूद कसूरी ने बीबीसी को बताया कि ऐसे बहुत कम लोग हैं जिन तक राहतकर्मी नहीं पहुँच पाए हैं.

आशंका

पाकिस्तान में आधिकारिक रूप से भूकंप में मरनेवालों की संख्या क़रीब 50 हज़ार बताई जा रही है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि मरनेवालों की संख्या इससे दोगुनी तक हो सकती है और तीस लाख लोग बेघर हैं जिनके लिए बहुत कुछ किया जाना बाक़ी है.

 भूकंप के कारण दुर्गम इलाक़ों में सूनामी की तुलना में कहीं ज़्यादा लोग फ़ँसे हुए हैं. सूनामी से कहीं ज़्यादा लोग घायल हैं. जैसे-जैसे दिन और हफ़्ते बीतते जा रहे हैं वैसे-वैसे लोगों की मौत हो रही है और राहत के लिए वित्तीय सहायता और संसाधन नहीं आ रहे हैं
यान एगलैंड, संयुक्त राष्ट्र राहत अधिकारी

एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि बड़े शहरों को छोड़ दिया जाए तो भूकंप प्रभावित इलाक़ों में स्थिति अच्छी नहीं है और लोगों तक सहायता नहीं पहुँच पा रही है.

इस बीच पाकिस्तान में एक स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा है कि पाकिस्तान के भूकंप प्रभावित इलाक़ों में टेटनस के 18 मामले सामने आए हैं.

डॉक्टर इरफ़ान नूर ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के लिए टेटनस पर एक रिपोर्ट तैयार की है. डॉक्टर इरफ़ान नूर ने बीबीसी को बताया कि पाकिस्तान के सूबा सरहद के बालाकोट इलाक़े से ऐसे मामले सामने आए हैं.

उन्होंने बताया कि टेटनस ने ज़्यादातर बच्चे प्रभावित हुए हैं. डॉक्टर इरफ़ान नूर ने चेतावनी दी कि इस समय जो स्थिति है उससे तो यही अंदाज़ा होता है कि लोगों को अच्छी तरह से टीके नहीं दिए गए हैं.

मंगलवार को पाकिस्तान ने टेटनस के टीके के लिए अपील की थी. अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान में तुरंत टेटनस के एक लाख टीकों की आवश्यकता है.

66बारूदी सुरंग की चेतावनी
चेतावनी है कि भूकंप ने नियंत्रण रेखा के पास बारूदी सुरंगों को खिसका दिया होगा
66तुरंत उपचार ज़रुरी
तत्काल उपचार की व्यवस्था नहीं की गई तो घायलों की हालत बिगड़ सकती है.
66कूटनीति अब भी जारी है
भूकंप के बावजूद भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीति बिना रुके जारी है.
66सीमा खोलने की हिमायत
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के प्रधानमंत्री ने की सीमा खोलने की हिमायत.
66कश्मीरियों की पीड़ा
वो दिन कब आएगा जब कोई सीमा रेखा से बटे कश्मीरियों की पीड़ा समझेगा.
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