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बारूदी सुरंगों को लेकर चेतावनी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ग्लोबल ग्रीन पीस नाम की एक संस्था ने चेतावनी दी है कि आठ अक्तूबर को आए भूकंप ने भारत और पाकिस्तान में कई बारूदी सुरंगों को अपनी जगह से खिसका दिया होगा. संस्था का कहना है कि इससे दोनों ओर के कश्मीर को विभाजित होने वाली नियंत्रण रेखा के आसपास लोगों की जान को ख़तरा हो सकता है. उल्लेखनीय है कि भारतीय और पाकिस्तानी दोनों सेनाओं ने नियंत्रण रेखा के दोनों ओर घुसपैठ रोकने के लिए बारूदी सुरंगें बिछा रखी हैं. ग्लोबल ग्रीन पीस का कहना है कि भूकंप की वजह से जो भूस्खलन हुआ है उसने निश्चित तौर पर हज़ारों बारूदी सुरंगों को वहाँ से हटा दिया होगा जहाँ उन्हें लगाया गया होगा. यह संस्था 1998 से भारत और पाकिस्तान सरकारों से कह रही है कि वे अपने बारूदी सुरंगों को हटाना शुरु करें. अब उन्हें लग रहा है कि भूस्खलन से खिसक गए बारूदी सुरंगों से उन लोगों की जान को गंभीर ख़तरा हो सकता है जो बेघरबार हो गए हैं. संस्था ने यह चेतावनी भी दी है कि सेनाओं के पास बारूदी सुरंग के जो नक्शे हैं वो अब बहुत काम के नहीं बचे होंगे. बीबीसी के रक्षामामलों के संवाददाता का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं से बारुदी सुरंगों का खिसक जाना कोई अनहोनी बात नहीं है क्योंकि मोज़ाम्बिक में आए भारी बाढ़ के बाद ऐसा हुआ था और भूकंप से ऐसा कई बार हो चुका है. लेकिन कुछ संस्थाओं का कहना है कि इन ख़तरों को बढ़ा चढ़ाकर भी पेश नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि सूनामी के बाद भी ऐसी चेतावनियाँ जारी की गई थीं लेकिन वे सही साबित नहीं हुईं. |
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