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राहत कार्यों पर पड़ी ख़राब मौसम की मार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर और भारत प्रशासित कश्मीर के भूकंप प्रभावित इलाक़ों में ख़राब मौसम के कारण राहत कार्यों पर बुरा असर पड़ा है. भारी बारिश और ज़मीन धँसने के कारण पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद को जाने वाली सड़क बंद हो गई है. ख़राब मौसम के कारण कई इलाक़ों में कमोबेश यही स्थिति है. इन इलाक़ों में हेलिकॉप्टरों से राहत सामग्री पहुँचाई जा रही थी लेकिन ख़राब मौसम के कारण इसे फ़िलहाल रोक दिया गया है. कई भूकंप प्रभावित इलाक़ों में तम्बुओं की कमी है और लोगों को इस ख़राब मौसम में आसमान के नीचे ही रात गुजारनी पड़ रही है. अभी भी कई प्रभावित इलाक़ों का संपर्क बाक़ी हिस्सों से कटा हुआ है. इन इलाक़ों में टेलिफ़ोन सेवा बहाल करने में चीन के इंजीनियर जुटे हुए हैं. मुश्किलें भारतीय प्रशासित कश्मीर के उत्तरी इलाक़ों में बर्फ़बारी ने राहत कार्यों में बाधा पहुँचाई है. बीबीसी संवाददाता जिल मैकगिवरिंग ने भूकंप प्रभावित तंगदर का दौरा किया.
उनके अनुसार राजधानी श्रीनगर से तंगदर जाने में आठ घंटे का समय लगा. बर्फ़बारी के कारण सड़क मार्ग से वहाँ पहुँचने में काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. इस कारण राहत सामग्री से लदे वाहन भी देरी से वहाँ पहुँच रहे हैं. भारतीय सेना का कहना है कि इस इलाक़े में 80 फ़ीसदी घर भूकंप में तबाह हो गए हैं. दूसरी ओर मुज़फ़्फ़राबाद में संयुक्त राष्ट्र की अगुआई में राहत कार्य में जुटे अधिकारी संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि अभी भी संसाधनों की कमी राहत कार्य में आड़े आ रही है. कई अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियाँ अभी भी भूकंप प्रभावित इलाक़ों में नहीं पहुँच पाई हैं. भूकंप प्रभावित इलाक़ों में तापमान गिर रहा है और कड़कड़ाती सर्दी पड़ रही है. लेकिन तम्बुओं, कंबलों और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी दूर नहीं हो पा रही है. बीबीसी संवाददाता दमित्रा लूथरा का कहना है कि भूकंप की त्रासदी में बच गए कई लोग शायद इस विपदा में अपनी जान गँवा बैठेंगे. |
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