| ध्यान अब जीवित बचे लोगों पर केंद्रित | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में भूकंप प्रभावित इलाक़ों में मलबे में दबे लोगों को निकालने के कोशिशें अब लगभग ख़त्म हो गई हैं. अब ध्यान बीस लाख जीवित बचे लोगों को आपातकालीन राहत पहुँचाने पर केंद्रित किया जा रहा है. इस बीच पीटीआई के मुताबिक़ राहत सामग्री लेकर एक ट्रेन भारत से पाकिस्तान पहुँच गई है. ये ट्रेन शुक्रवार रात को अटारी से लाहौर पहुँची. 68 टन की इस राहत सामग्री में पाँच हज़ार कंबल, 320 तंबू और 4.5 टन पलास्टिक की चादरें शामिल हैं. भारत ने निजी संगठनों और गैर सरकारी संगठनों को भी राहत सामग्री भेजने की इजाज़त दे दी है. पाकिस्तान में राहत कार्यों की देखरेख कर रहे वरिष्ठ संयुक्त राष्ट्र अधिकारी यान एग्लैन के अनुसार भूकंप प्रभावित क्षेत्र के पुनर्निर्माण में दस साल लग सकते हैं और इसमें कई अरब डॉलर का ख़र्च आ सकता है. बीबीसी संवाददाता शाहज़ेब जिलानी ने बताया कि फौज मदद तो कर रही है लेकिन लोगों के मुताबिक ये मदद नाकाफ़ी है. हेलिकॉप्टरों की संख्या कम है जिसके चलते सभी जगह मदद नहीं पहुँच पा रही है. मौसम बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ऐसे में गैर सरकारी संगठनों की भूमिका काफ़ी अहम हो गई है. उधर राहतकर्मियों का कहना है कि जैसे-जैसे सर्दी बढ़ रही है वैसे ही राहत पहुँचाना मुश्किल हो जाएगा.
खराब मौसम के चलते राहत कार्यों में ख़ासी दिक्कत आ रही है. यूनीसेफ़ ने कहा है कि बच्चों पर भूख और मौसम की सबसे ज़्यादा मार पड़ रही है. महत्वपूर्ण है कि राहतकर्मियों के एक दल ने ग्यारह किलोमीटर चलकर सूबा सरहद के एक गाँव पहुँचने के बाद बचाव कार्यों के दौरान एक डेढ़ साल की बच्ची को बेहोश लेकिन जीवित पाया. संयुक्त राष्ट्र अधिकारी यान एग्लैन का कहना था कि संभावना है कि राहत कार्य लगभग दो महीने चलेंगे. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह जल्द से जल्द और मदद करे और राहत एजेंसियाँ मिलजुलकर काम करें. नक्शे पर भूकंप प्रभावित इलाक़े-
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