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कश्मीर सीमा खोलने की हिमायत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के प्रधानमंत्री सरदार सिकंदर हयात ख़ान ने पाकिस्तान सरकार से कहा है कि भूकंप के इस मुश्किल समय में भारत प्रशासित कश्मीर से लगी सीमा खोलने के बारे में अगर कोई शंका है तो उसे छोड़कर सीमा खोल दी जाए. बीबीसी हिंदी के कार्यक्रम आपकी बात बीबीसी के साथ के एक विशेष अंक में उन्होंने कहा, "मैं आमादा हूँ और मैं ज़िम्मेदारी लेता हूँ हुकूमते पाकिस्तान की, मुल्के पाकिस्तान की... अगर उनकी कोई शंका है तो उसे छोड़ें और सीमा खोल दें." उधर इसी कार्यक्रम में शामिल भारत प्रशासित कश्मीर में सत्तारूढ़ पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि अगर पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने भारत की मदद स्वीकार की होती तो कई जानें बचाई जा सकती थीं. सीमाएँ खोलने के बारे में नीतिगत स्तर पर किसी परेशानी के बारे में पूछे जाने पर सिकंदर हयात ने कहा, "मेरे विचार से तो ये मुल्के पाकिस्तान या हुकूमते पाकिस्तान या आज़ाद कश्मीर की हुकूमत के सामने कोई दिक़्क़त नहीं है." वहीं महबूबा मुफ़्ती का कहना था कि वह उड़कर पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में पहुँचना चाहती हैं. उन्होंने कहा, "कोई रास्ता बताइए किस तरह आप अपनी पाकिस्तान की सरकार को समझा सकते हैं. हम भी कोशिश करेंगे भारत सरकार से बात करने की जिससे इस मुश्किल के वक़्त एक दूसरे की मदद की जा सके." सिकंदर हयात ने कहा, "नियंत्रण रेखा से लगे कई इलाक़े ऐसे हैं जहाँ तक पहुँचने में हमें अब भी दिक़्क़त आ रही है. मौसम की ख़राबी की वजह से हमारे हेलिकॉप्टर वहाँ नहीं पहुँच पा रहे हैं और अब भी वहाँ तक़रीबन 2000 लोग फँसे हुए हैं."
पाकिस्तानी कश्मीर के प्रधानमंत्री सिकंदर हयात का कहना था, "इस काम में थोड़ी हिम्मत की बात है, पहल करने की बात है और इन्हीं दिनों ये काम करने की बात है कि अगर हम लोगों को इजाज़त दें एक दूसरे की मदद करने की.... मैं तो कहता हूँ कि मैं उड़कर वहाँ पहुँच जाऊँ और लोगों की मदद करूँ." सिकंदर हयात ख़ान ने भारत और पाकिस्तान के लंबे समय तक ख़राब रहे रिश्तों के बारे में पूछे जाने पर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कही कुछ पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा, "मुझे याद है कि वाजपेयी जी ने कश्मीर में कहा था, दोस्त बदले जा सकते हैं मगर पड़ोसी नहीं बदले जा सकते. माज़ी को भूलिए, अगर हम बहस में उलझे रहेंगे तो लोग मरते रहेंगे." पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती ने सीमा खोले जाने की स्थिति में चरमपंथियों के सीमा पार करने की आशंका को ख़ारिज करते हुए कहा, "शक का हल तो हकीम लुक़मान के पास भी नहीं था. अब पहले से काफ़ी चीज़ें बदल गई हैं. इस समझौते के दौर में हमें एक दूसरे पर विश्वास करना ही है." |
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