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भूकंप से बचे लोगों के सामने नई चुनौती | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के अधिकारियों ने माना है कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर और उत्तरी पाकिस्तान के कई इलाक़ों में अभी भी राहत पहुँचाने की कोशिश की जा रही है. लेकिन इससे बड़ी चुनौती अब यह है कि भूकंप से घायल हुए लोगों का इलाज न होने से संक्रमण फैल रहा है और घायलों की मौतों का सिलसिला शुरु होने की आशंका पैदा हो गई है. अधिकारियों का कहना है कि राहत का कार्य तेज़ी से चल रहा है. पिछले आठ अक्तूबर को आए भूकंप की वजह से इस इलाक़े में भारी तबाही हुई थी और जैसी की ख़बरें हैं अब तक इससे 54 हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है. हालांकि अभी भी सरकारी प्रवक्ता 40 हज़ार मौतों की ही पुष्टि कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि तीस लाख से अधिक लोग इस भूकंप से बेघर हुए हैं और ख़राब होते मौसम में इनकी सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है. उनका कहना है कि अभी भी पाँच लाख और तंबुओं की ज़रुरत है. चिकित्सा पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में डॉक्टरों का कहना है कि हज़ारों लोग अभी भी चिकित्सा सुविधा पहुँचने का इंतज़ार कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों का कहना है कि पहाड़ों में कई गाँव हैं जहाँ पहुँच पाना बेहद कठिन है. कुछ दूरस्थ इलाक़ों के बारे में कहा जा रहा है कि अब यदि वहाँ सहायता नहीं पहुँची तो घायलों को बचा पाना मुश्किल होगा. चाका गाँव से लौटे रेड क्रॉस के सेबेस्टियन नोवाक का कहना है कि वहाँ चिकित्सा दल पहली बार वहाँ पहुँचा और वहाँ घायलों में से 25 प्रतिशत घायलों के हाथ या पैर काटने पड़े हैं. एक महिला के बारे में उन्होंने बताया, "20 साल की एक महिला के दोनों पैर और दाहिना हाथ काट देना पड़ा यानी अब उसका बाँया हाथ भर बचा रह गया है." सेबेस्टियन ने बताया कि बच्चे, बूढ़े और महिलाओं सभी के हाथ पैर काटने पड़े हैं. संयुक्त राष्ट्र के आपात सुविधा मुहैया करवाने वाली टीम के मैनेजर एंड्रयू मैक्लॉड ने बीबीसी से कहा, "भूकंप पीड़ित इलाक़ों में 15 हज़ार से अधिक गाँव हैं और वहाँ पहुँचना कठिन भी है." उन्होंने कहा कि भूकंप से जो इलाक़ा प्रभावित है वह सूनामी प्रभावित इलाक़ों की तुलना में ज़्यादा विस्तृत है. ठंड की चुनौती पिछले 24 घंटों में दुनिया भर से राहत सामग्री पहुँची है और अब दर्जनों हेलिकॉप्टर इसे भूकंप पीड़ित इलाक़ों तक पहुँचाने में लगे हुए हैं. हेलिकॉप्टरों से कई दुर्गम इलाक़ों से घायलों और पीड़ित परिवारों को हज़ारों लोगों को निकाला गया है और अभी भी काम जारी है. कई इलाक़ों में टेंट और कंबल गिराए गए हैं. लेकिन अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान सरकार और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती भूकंप के कारण बेघर हुए 30 लाख लोगों को ठंड से पहले छत उपलब्ध करवाना है. क्योंकि हिमालय की तीखी ठंड का मौसम अब दस्तक ही दे रहा है. पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर और उत्तरी पाकिस्तान के कई इलाक़ों में ठंड पड़नी तो शुरु भी हो चुकी है और पिछले दिनों के ख़राब मौसम ने इसमें इज़ाफ़ा ही किया है. नक्शे पर भूकंप प्रभावित इलाक़े-
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