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कई दिन बाद, दो बच्चे जीवित पाए गए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में विनाशकारी भूकंप के बाद, कई दिन मलबे में दबे रहने के बावजूद, दो बच्चों के जीवित पाए जाने के समाचार मिले हैं. एक डेढ़ साल की बच्ची को भूकंप के बाद सातवें दिन और एक पाँच साल के लड़के को भूकंप के 63 घंटे बाद मलबे से जीवित निकाला गया है. डेढ़ साल की बच्ची को शुक्रवार को उत्तरी इलाक़े के मानसेरा ज़िले में बालीमंग में मलबे में से निकाला गया. राहतकर्मियों के 25 सदस्यों के दल ने जब बच्ची को मलबे के नीचे से निकाला तो वह बेहोश थी. लेकिन जब डाक्टर मज़हर हुसैन के नेतृत्व वाली टीम ने बच्ची का प्राथमिक उपचार किया तो वह होश में आ गई और रोने लगी. ख़बर है कि उस बच्ची की माँ और दो भाई घटनास्थल पर ही मृत पाए गए. लेकिन उसके पिता जीवित हैं और अपनी बच्ची को पा लेने के बाद ख़ुश हैं. 63 घंटे बाद निकाला एक पाँच साल के बच्चे शमीर शाहजहान को 63 घंटे मलबे में दबे रहने के बाद फ्रांसीसी राहतकर्मियों ने बाहर निकाला. बालाकोट शहर में एक स्कूल के मलबे से जब शमीर को निकाला गया तो उनके कपड़े फट गए थे और वे डर के कारण बिलकुल चुप हो गए थे. शाहीन फ़ाउँडेशन स्कूल के मलबे से जीवित निकाला जाने वाला या आख़िरी बच्चा था. स्कूल की इमारत के मलबे में 350 बच्चे दब गए थे लेकिन कुल पाँच बच्चों को ही जीवित निकाला जा सका. इमारत के गिर जाने के काफ़ी देर तक तो बच्चों के रोने की आवाज़े मलबे के नीचे से सुनाई दे रही थीं लेकिन भार उठाने के उपकरणों के अभाव में मलबे के आसपास एकत्र हुए बच्चों के माता-पिता भी कुछ न कर पाए. |
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