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बुधवार, 19 अक्तूबर, 2005 को 08:10 GMT तक के समाचार
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कश्मीर में फ़ोन सेंटरों पर लंबी क़तारें
मुख़्तियार अहमद
जम्मू के मुख़्तियार अहमद सुविधा का लाभ उठाने वाले पहले व्यक्ति थे
भारत प्रशासित कश्मीर में सरकार की ओर से स्थापित टेलीफ़ोन केंद्रों के सामने बुधवार की सुबह से लोगों की लंबी क़तारें लगी हैं, इन फोन केंद्रों पर नियंत्रण रेखा के दूसरी तरफ़ बात करने की मुफ़्त सुविधा दी जा रही है.

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में रहने वाले अपने रिश्तेदारों का हाल जानने के लिए बेचैन लोगों के लिए भारत सरकार ने यह सुविधा उपलब्ध कराई है.

नियंत्रण रेखा के बीच पंद्रह वर्ष के अंतराल के बाद टेलीफ़ोन संपर्क जुड़ा है, पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद मुफ़्त फ़ोन करने की यह सुविधा अगले पंद्रह दिनों दिन जारी रहेगी.

वैसे अधिकारियों का कहना है कि यह सुविधा आगे भी बढ़ाई जा सकती है.

जम्मू के उस्ताद मोहल्ला में रहने वाले मुख़्तियार अहमद पहले व्यक्ति थे जिन्होंने इस सुविधा का उपयोग किया, उन्होंने अपने मामा के परिवार को फ़ोन किया.

जैसी आशंका थी उन्हें दुखद समाचार ही मिला, उनके 17 रिश्तेदार भूकंप की चपेट में आकर मारे जा चुके हैं और बाक़ी बचे लोग मुज़फ़्फ़राबाद छोड़कर रावलपिंडी चले गए हैं.

निराशा

श्रीनगर से बीबीसी संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन का कहना है कि बहुत सारे लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा क्योंकि मुज़फ़्फ़राबाद में ज़्यादातर फ़ोन काम नहीं कर रहे थे, बहुत सारे लोगों के रिश्तेदार मुज़फ़्फ़राबाद छोड़कर पाकिस्तान के दूसरे शहरों में चले गए हैं.

कई लोगों का संपर्क दूसरी ओर से नहीं हो पाया

मुख़्तियार का कहना है कि वे ख़ुद मुज़फ़्फ़राबाद जाकर अपनी आँखों से सब कुछ देखना चाहते हैं.

ऐसे चार टेलीफ़ोन केंद्र खोले गए हैं और सभी केंद्रों पर भारी भीड़ लगी है, ये केंद्र श्रीनगर, जम्मू, उड़ी और तंगधार में खोले गए हैं.

इन टेलीफ़ोन केंद्रों को पुलिस कंट्रोल रूम या पुलिस थाने के अंदर खोला गया है ताकि सुरक्षा व्यवस्था बेहतर हो सके.

तंगधार में यह सुविधा अभी शुरू नहीं हो पाई है, अधिकारियों का कहना है कि इसमें अभी कुछ दिन लग सकते हैं.

नियंत्रण रेखा के दोनों तरफ़ फ़ोन करने की सुविधा पंद्रह वर्ष पहले "सुरक्षा कारणों से" बंद कर दी गई थी, भारत सरकार को आशंका थी कि चरमपंथी इस सुविधा का दुरूपयोग कर सकते हैं.

पिछले कुछ समय से जम्मू कश्मीर के सभी दलों के नेताओं ने माँग की थी कि यह फ़ोन सेवा बहाल की जानी चाहिए, इसके बाद भारत के प्रधानमंत्री के आदेश पर यह सुविधा बहाल की गई.

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