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'दुनिया भर में पर्याप्त तंबू नहीं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि दक्षिण एशिया में आए भूकंप की विभीषिका इतनी बड़ी है कि कोई सरकार उससे निबटने में सक्षम हो ही नहीं सकती. पाकिस्तान में मौजूद संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारी एंड्रयू मैकलॉयड ने बीबीसी से एक बातचीत में कहा है कि दुनिया भर में इतने गर्म तंबू ही नहीं हैं जिनमें बेघर लोग आश्रय ले सकें. उनका कहना है कि ठंड बढ़ने के साथ-साथ स्थिति चिंताजनक होती जा रही है. मैकलॉयड का कहना है कि लगभग 30 लाख लोग बेघर हो गए हैं और इतने गर्म तंबू दुनिया भर में उपलब्ध नहीं हैं. भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में रात को तापमान शून्य डिग्री से नीचे जाना शुरू हो गया है और राहत कर्मचारियों ने आगाह किया है कि अगर बेघर लोगों को आश्रय नहीं मिला तो ठंड से बहुत सारे लोगों की मौत हो सकती है. मैकलॉयड का कहना है कि दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में लगभग पंद्रह हज़ार गाँव पूरी तरह से तबाह हो गए हैं, पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के इन गाँवों तक पहुँचना काफ़ी मुश्किल है इसलिए राहत का काम चुनौतीपूर्ण हो गया है. मौसम इससे पहले, ख़राब मौसम की वजह से हेलिकॉप्टर उड़ान नहीं भर पा रहे थे जिससे लोगों को राहत सामग्री नहीं पहुँच पा रही थी लेकिन अब काम दोबारा शुरू हो गया है. मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में साफ़ मौसम रहने की सूचना दी है. नौ दिन पहले आए भूकंप की वजह से इस इलाक़े में भारी तबाही हुई थी और जैसी की ख़बरें हैं अब तक इससे 53 हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है. ख़बरें हैं कि घायल लोगों में संक्रमण फैल रहा है. नक्शे पर भूकंप प्रभावित इलाक़े-
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