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पाँच पीढ़ियों के सफ़र में कपूर ख़ानदान के कई सदस्यों ने भारतीय फ़िल्म जगत और रंगमंच को बहुत कुछ दिया. एक नज़र, इस परिवार पर... | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रंगकर्मी और प्रसारक कैलाश बुधवार को पृथ्वीराज कपूर के व्यक्तित्व को काफ़ी क़रीब से देखने का मौका. आइए, जानते हैं उनके कुछ अनुभव. | पंद्रह-बीस साल के अर्से में पृथ्वीराज जी ने कुल आठ ड्रामे पेश किए. ये तमाम ड्रामे समाज में होने वाली बुराइयों के ख़िलाफ़ एक आवाज़ थे. | कपूर खानदान की हर पीढ़ी में कुछ न कुछ ख़ास देखने को मिलता है. हालांकि आजकल कपूर ख़ानदान में पुरुषों से ज़्यादा महिलाएँ नाम कमा रही हैं. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||