|
पृथ्वीराज कपूर: एक सफ़रनामा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आधुनिक हिंदी थिएटर और सिनेमा के पितामह पृथ्वीराज कपूर का जन्म तीन नवंबर,1906 को लायलपुर, पंजाब (अब पाकिस्तान में स्थित है) में हुआ था. पिता दीवान बशेश्वरनाथ कपूर की नौकरी पेशावर में होने की वजह से पृथ्वीराज की पढ़ाई पेशावर के एडवर्ड कॉलेज में हुई. शुरू से ही पृथ्वीराज कपूर की थिएटर में रुचि थी और वो कॉलेज के दिनों से ही रंगमंच की दुनिया से जुड़ गए थे. करियर वर्ष 1927 में पृथ्वीराज कपूर मुंबई आ गए जहाँ उनको अपने करियर के शुरुआती दिनों में अतिरिक्त कलाकारों की तरह भी काम करना पड़ा. उनकी पहली फ़िल्म तो बेधारी तलवार थी लेकिन उनकी पहचान वर्ष 1931 में रिलीज़ हुई पहली आवाज़ वाली भारतीय हिंदी फ़िल्म 'आलम आरा' से बनी जिसमें पृथ्वीराज कपूर ने सहायक अभिनेता की भूमिका निभाई थी. 'द्रौपदी', 'विद्यापति', 'मुगले आज़म', 'रुस्तम-सोहराब', 'नानक नाम जहाज़ है' और 'कल, आज और कल' जैसी कई फ़िल्मों में पृथ्वीराज कपूर ने यादगार भूमिका निभाई.
वर्ष 1944 में उन्होंने पृथ्वी थिएटर की शुरुआत की जिसमें क़रीब 150 लोग एकसाथ काम करते थे. पृथ्वी थिएटर ने देश के लगभग सभी हिस्सों में जा-जाकर नाटक खेले. पृथ्वी थिएटर के यादगार नाटकों में शकुंतला, दीवार, पठान, गद्दार, आहुति, कलाकार, पैसा और किसान मुख्य हैं जिसे आम-जनता ने काफी सराहा. अपने 16 वर्ष के इतिहास में पृथ्वी थिएटर ने अपने नाटकों के क़रीब 2662 शो किए. सम्मान पृथ्वीराज कपूर को भारत सरकार ने वर्ष 1969 में पद्म भूषण के नागरिक सम्मान से सम्मानित किया था. इसके बाद वर्ष 1972 में पृथ्वीराज कपूर को मरणोपरांत भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े पुरस्कार दादा साहेब फाल्के सम्मान (1971) से सम्मानित किया गया. अवसान 29 मई, 1972 को कैंसर की बीमारी से लड़ते हुए इस महान कलाकार ने दुनिया को अलविदा कह दिया. इनकी मौत के 15 दिनों बाद ही 14 जून को इनकी पत्नी रामशरणी ने भी देह त्याग दी. पृथ्वीराज कपूर की फ़िल्में वर्ष 1929- बेधारी तलवार, वेडिंग नाइट, दाँव-पेंच | इससे जुड़ी ख़बरें पृथ्वीराज, एक संवेदनशील और समाजसेवी व्यक्तित्व02 नवंबर, 2006 | पत्रिका 'पापाजी जैसा कोई दूसरा नहीं मिला'02 नवंबर, 2006 | पत्रिका 'भाग्यशाली हूँ कि कपूर ख़ानदान में पैदा हुआ'02 नवंबर, 2006 | पत्रिका 'अभी बहुत कुछ जानना-बताना बाक़ी है'02 नवंबर, 2006 | पत्रिका 'आलमआरा' से 'ओंकारा' तक का सफ़र02 नवंबर, 2006 | पत्रिका 'इस ख़ून में ही कुछ ख़ास बात है'02 नवंबर, 2006 | पत्रिका 'यादें, जो कभी धुंधली नहीं पड़ सकतीं'02 नवंबर, 2006 | पत्रिका | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||