किस जानवर का जबड़ा सबसे ताक़तवर

मगरमच्छ

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    • Author, एला डेविस
    • पदनाम, बीबीसी अर्थ

आपने बहुत से जानवरों को शिकार करते हुए देखा होगा, पर कभी सोचा है कि जब ये शिकारी जानवर अपने शिकार पर हमला करते हैं तो किसका झपट्टा सबसे ताक़तवर होता होगा. मगरमच्छ, शेर, सांप या शार्क का.

चलिए आज अंदाज़ा लगाते हैं कि किस जानवर का निवाला सबसे ताक़तवर होता है.

व्हेल

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व्हेल आज की तारीख़ में दुनिया की सबसे बड़ी जीव है. इसकी कई नस्लें हैं. इनमें से बोहेड व्हेल का मुंह आज दुनिया में किसी भी जानवर में सबसे बड़ा माना जाता है. लेकिन वो अपने मुंह से किसी को काटती नहीं. किसी पर मुंह से झपट्टा मारकर उसे चबाने के लिए जानवर के पास बड़ा सा मुंह, फिर उसमें ख़तरनाक नुकीले दांत और ताक़तवर पेशियां होनी चाहिए.

तो पहली बात ये है कि हर वो जानवर जिसके दांत हैं वो शिकार को चबाता नहीं. जैसे कि घोंघे की जीभ जैसे रेडुला नाम के अंग पर हज़ारों दांत होते हैं. मगर इससे वो काटता नहीं. इन दांतों को वो खरोंचने के काम में लाता है.

मछली

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इसी तरह नीली व्हेल दुनिया की सबसे बड़ी जीव है. मगर इसके दांत नहीं होते. इसके मुक़ाबले स्पर्म व्हेल के गांत काफ़ी तेज़ और बड़े होते हैं. लेकिन स्पर्म व्हेल की बाइट को भी सबसे ताक़तवर नहीं कहा जा सकता क्योंकि इसके सिर्फ़ निचले जबड़े में दांत होते हैं. आम तौर पर स्पर्म व्हेल अपने शिकार को निगलती है, चबाती नहीं.

रॉयल बेल्जियन इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरल साइंस के ओलिवियर लैम्बर्ट कहते हैं कि आज शिकार पर झपट्टा मारकर चबाने के मामले में सबसे आगे है किलर व्हेल. मगर किलर व्हेल असल में व्हेल नहीं डॉल्फ़िन की एक नस्ल है.

व्हेल

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ये 31 फुट तक लंबी होती हैं. इनके पचास के क़रीब दांत होते हैं. इन दांतों से वो अपने शिकार को चीर-फाड़ डालती हैं. ये व्हेल से लेकर सील तक को अपना शिकार बनाती हैं. लेकिन किलर व्हेल या ओर्का, हमेशा झुंड में शिकार करती हैं. ऐसे में किसी एक जानवर का सबसे ताक़तवर झपट्टा बताने की रेस में इन्हें भी नहीं गिना जा सकता.

इनके मुक़ाबले ग्रेट व्हाइट शार्क की बाइट ज़्यादा ताक़तवर होती होगी. क्योंकि इनके तीन सौ दांत होते हैं. ये सबसे ख़तरनाक शिकारी जानवर माने जाते हैं. मगर दिक़्क़त ये है कि इनके जबड़ों में हड्डियां नहीं होतीं. तो फिर कैसे माना जाए कि इनकी बाइट सबसे ताक़तवर होती है.

शार्क

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इसके लिए जानवरों के शिकार को काटने के वक़्त लगाई गई ताक़त को नापने की ज़रूरत है. ऑस्ट्रेलिया की न्यू इंग्लैंड यूनिवर्सिटी के स्टीफ़न रो ने कंप्यूटर की मदद से जानवरों के झपट्टा मारकर चबाने के वक़्त लगाए गए ज़ोर को नापा था. पता ये चला कि किसी भी शार्क के झपट्टा मारकर चबाने में ज़्यादा से ज़्यादा 18,216 न्यूटन की ताक़त लगती है.

न्यूटन वो पैमाना है जिससे किसी चीज़ पर लगा ज़ोर नापा जाता है. इसको इस तरह से समझिए कि हमारे दांत जब बहुत ताक़त लगाकर कोई चीज़ काटते हैं तो ये ज़ोर ज़्यादा से ज़्यादा 1317 न्यूटन का होता है.

धरती पर नापी गई किसी भी सबसे ताक़तवर बाइट में नंबर एक पर आते हैं मगरमच्छ. अमरीका की फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी के ग्रेगरी एरिक्सन ने मगरमच्छों की 23 नस्लों के शिकार करते वक़्त लगाई गई ताक़त को नापा था. उनकी टीम ने पाया कि मगरमच्छ अपने शिकार को चबाते वक़्त 16 हज़ार 414 न्यूटन तक का ज़ोर लगाते हैं. धरती पर ये सबसे ताक़तवर बाइट है.

लकड़बग्घा

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इससे पहले चितकबरे लकड़बग्घे के झपट्टे को सबसे ताक़तवर माना जाता था. वैसे मगरमच्छ की चबाने में लगाई गई ताक़त, शार्क से कम है. मगर शार्क की बाइट की ताक़त को कंप्यूटर से अंदाज़ा गया था. वहीं मगरमच्छ के झपट्टे को तो वाक़ई में आज़माया गया.

फिर जिन मगरमच्छों पर ग्रेगरी ने ये तजुर्बा किया था वो सबसे बड़े मगरमच्छ वाली नस्ल के नहीं थे. इससे ये कहा जा सकता है कि उनके चबाने की ताक़त और भी ज़्यादा होगी.

व्हेल

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दक्षिण अमरीका में पाई जाने वाली पिर्हाना मछली की बाइट को भी काफ़ी पॉवरफुल माना जाता है. लेकिन आज जो पिर्हाना मछलियां मिलती हैं, वो बहुत छोटी होती हैं. जबकि आज से क़रीब 90 लाख साल पहले इसकी बड़ी बहनें उसी इलाक़े में रहा करती थीं. इन्हें मेगापिर्हाना कहा गया. ये तीन फुट तक लंबी होती थीं. माना जाता है कि इनके झपट्टे में 1240 से 4749 न्यूटन तक का ज़ोर हुआ करता था.

अब जब धरती से ख़त्म हो चुके जानवरों के ताक़तवर झपट्टों की बात हो रही है तो इस रेस में कई और जानवर शामिल हो सकते हैं.

जबड़ा

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क़रीब 25 लाख साल पहले पाई जाने वाली मेगालोडॉन नाम की शार्क आज की शार्क से तीन गुने से भी ज़्यादा लंबी होती थी. ज़ाहिर है, इसकी बाइट भी काफ़ी ताक़तवर रही होगी. माना जाता है कि इसके झपट्टे में एक से दो लाख न्यूटन तक का ज़ोर लगता होगा. इतनी ताक़त लगने पर एक कार का कचूमर निकल सकता है.

जिस वक़्त ये मेगालोडॉन शार्क धरती पर रहती थी, उसी वक़्त व्हेल की भी एक नस्ल धरती पर बसर करती थी. इसका नाम वैज्ञानिकों ने लिवियाटन मेलविली रखा है. इसके कुछ कंकाल मिले हैं. इस व्हेल का जबड़ा ही क़रीब दस फुट का होता था. वहीं इस व्हेल के दांतों की लंबाई क़रीब 14 इंच होती थी.

इतने बड़े जबड़ों और इतने ख़तरनाक दांत से लैस ये व्हेल जब शिकार पर झपटती रही होगी तो अपने शिकार पर कितनी ताक़त से हमला करती होगी, इसका सिर्फ़ अंदाज़ा लगाया जा सकता है.

(अंग्रेजी में मूल लेख पढ़ने के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.com/earth/story/20160817-one-creature-had-a-bite-more-powerful-than-any-other" platform="highweb"/></link> करें, जो <link type="page"><caption> बीबीसी अर्थ</caption><url href="http://www.bbc.com/earth/uk" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.)

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