पीएम मोदी मार्क टली के निधन पर बोले- वह पत्रकारिता की एक प्रभावशाली आवाज़ थे

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भारत में बीबीसी के पूर्व संवाददाता और वरिष्ठ पत्रकार सर मार्क टली का रविवार को नई दिल्ली में निधन हो गया.
दशकों तक मार्क टली की आवाज़ ब्रिटेन और दुनिया भर में बीबीसी के चाहने वालों के लिए जानी-पहचानी थी. एक संवाददाता के तौर पर वो भारत में काफ़ी लोकप्रिय थे.
उन्होंने युद्ध, अकाल, दंगे और हत्याएं, भोपाल गैस त्रासदी और ऑपरेशन ब्लू स्टार जैसी कई घटनाओं को कवर किया था.
उन्होंने साल 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस को भी कवर किया था, जहाँ एक बड़ी भीड़ ने उन्हें कई घंटों तक एक कमरे में बंद कर लिया था. बाद में एक स्थानीय अधिकारी और एक हिंदू पुजारी ने उनकी मदद की.
मार्क टली के निधन पर कई लोगों ने शोक व्यक्त किया है.
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पीएम मोदी से लेकर केंद्रीय मंत्री और पत्रकारों ने किया याद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्क टली के निधन पर दुख जताया है. उन्होंने एक्स पर लिखा, "सर मार्क टली के निधन से दुख हुआ. वह पत्रकारिता की एक प्रभावशाली आवाज़ थे. भारत और यहां के लोगों से उनका जुड़ाव उनके काम में साफ़ दिखता था. उनकी रिपोर्टिंग और उनके विचारों ने सार्वजनिक विमर्श पर एक स्थायी असर छोड़ा है. उनके परिवार, दोस्तों और असंख्य प्रशंसकों के प्रति संवेदनाएं."
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "मशहूर पत्रकार मार्क टली के निधन से बहुत दुख हुआ. कोलकाता में जन्मे पत्रकार ने बीबीसी के लिए भारत को कवर किया. वह भारत से बहुत प्यार करते थे और भारत को अपना मानते थे. हम उन्हें अपने ही लोगों में से एक मानते थे. उनके परिवार, दोस्तों और अनगिनत चाहने वालों के प्रति मेरी संवेदनाएं."
प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया ने भी मार्क टली के निधन पर दुख व्यक्त किया है.
अपने सोशल मीडिया पोस्ट में प्रेस क्लब ने लिखा, "ख़बर की गहराई से रिपोर्टिंग और भारत के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य की गहरी समझ रखने वाले मार्क टली का ख़ासकर बीबीसी के साथ अपने कार्यकाल के दौरान पत्रकारिता में योगदान अमूल्य है. वह रेडियो पत्रकारिता के एक अग्रणी दिग्गज थे."
"उनकी रिपोर्टिंग ने उन्हें पूरे दक्षिण एशिया में उन्हें बहुत ज़्यादा विश्वसनीयता दिलाई…उन्होंने उपमहाद्वीप की कई बड़ी घटनाओं को कवर किया, जिसमें इमरजेंसी और ऑपरेशन ब्लू स्टार के अलावा इस क्षेत्र में कई प्रधानमंत्रियों की हत्याएं शामिल हैं."
केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "मशहूर पत्रकार और लेखक मार्क टली के निधन से बहुत दुख हुआ. हमारे पूरे उपमहाद्वीप में कई पीढ़ियों तक, उनकी शांत और जानी-पहचानी आवाज़ ख़बरों का पर्याय थी.
"कोलकाता में जन्मे टली ने बीबीसी के लंबे समय तक भारत में संवाददाता और ब्यूरो चीफ़ के तौर पर इस क्षेत्र के इतिहास के कुछ सबसे अहम पलों पर रिपोर्टिंग की. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे."

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मशहूर लेखक और इतिहासकार विलियम डेलरिंपल ने मार्क टली के निधन पर लिखा है, "मार्क टली पत्रकारों में एक बहुत बड़ी हस्ती थे और अपनी पीढ़ी के सबसे बड़े भारत प्रेमी थे. वह एक बहुत ही मिलनसार, उदार, नेक, दयालु और मददगार इंसान भी थे, जिनके चरणों में मुझे कई सालों तक बैठने का सम्मान मिला."
"उन्होंने मुझे भारत की बारीकियों और सूक्ष्म जानकारी के बारे में समझाया. बीबीसी इंडिया की आवाज़ के तौर पर उनकी जगह कोई नहीं ले सकता था, वह ऐसे इंसान थे जो सत्ता के सामने खड़े होने और सच बोलने के लिए तैयार रहते थे, चाहे वह कितना भी मुश्किल क्यों न हो. निजी और पेशेवर, दोनों तरह से उनकी बहुत, बहुत कमी खलेगी."
मार्क टली का जन्म साल 1935 में भारत के कोलकाता (उस समय कलकत्ता) में हुआ था, यानी भारत में ब्रिटिश शासन के दौर में. उनके पिता एक बिज़नेसमैन थे. उनकी माँ का जन्म बंगाल में हुआ था. उनका परिवार पीढ़ियों से भारत में व्यापारी और प्रशासक के तौर पर काम करता आ रहा था.
मार्क टली को हिन्दी का भी काफ़ी अच्छा ज्ञान था, जो एक दुर्लभ उपलब्धि थी और इसी वजह से कई भारतीय लोग उन्हें काफ़ी पसंद करते थे. जिनके लिए वह हमेशा "टली साहब" थे.
मार्क टली की पत्रकारिता और भारत के प्रति उनके लगाव ने उन्हें देश के कई बड़े राजनेताओं, संपादकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की दोस्ती दी.
'मुझ जैसे कई लोग उनकी आवाज़ सुनते हुए बड़े हुए'

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कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने एक्स पर लिखा, "मुझ जैसे कई लोग उनकी आवाज़ सुनते हुए और उनकी किताबें पढ़ते हुए बड़े हुए. मैं उसी इलाके में रहने लगा जहाँ वह सालों तक रहे और जिसे उन्होंने बहुत प्यार किया. आपकी यात्रा मंगलमय हो, पद्म श्री सर मार्क टली."
भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने सोशल मीडिया पर लिखा, "दशकों तक भारत में बीबीसी का चेहरा रहे मार्क टली के निधन के बारे में जानकर दुख हुआ. उन्होंने भारत को अपना घर बना लिया था."
टीएमसी सांसद और पूर्व पत्रकार सागरिका घोष ने लिखा, "मार्क टली के निधन की ख़बर सुनकर बहुत दुख हुआ. वे दशकों तक भारत में बीबीसी का चेहरा थे. मार्क मेरे लिए एक निजी प्रेरणा थे, जो सच बोलने की अपनी कमिटमेंट के लिए जाने जाते थे. उन्होंने 1970 के दशक के भारत के बारे में अपनी गहरी समझ और किस्से मेरे साथ खुलकर शेयर किए, जो इंदिरा गांधी की मेरी बायोग्राफी के लिए थे."
द हिन्दू ग्रुप की निदेशक मालिनी पार्थसारथी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "मार्क टली के निधन की ख़बर सुनकर दु:ख हुआ, उन्हें भारत के प्रति उनके जुनून और समर्पण के लिए प्यार से 'टली साहब' कहा जाता था...वह एक लीजेंड और आइकॉन थे. वे शायद उन कुछ लोगों में से एक थे जिन्होंने ब्रिटिश राज से एक आज़ाद देश बनने तक भारत के बदलाव को सच में समझा…"
वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने लिखा, "दुखद खबर. हमारे समय के महान इतिहासकार, आदरणीय सर मार्क टली, जो दशकों तक भारत में बीबीसी की आवाज़ थे, अब नहीं रहे. टली साहब, आप हममें से कई लोगों के लिए प्रेरणा थे. एक ऐसे इंसान जो भारत और यहाँ के लोगों से बहुत प्यार करते थे, और साथ ही ताकतवर लोगों को सच का आइना भी दिखाते थे."
वरिष्ठ पत्रकार वीर सांघवी ने मार्क टली के निधन पर दुख ज़ाहिर किया है. उन्होंने एक्स पर लिखा, "मार्क टली के निधन पर शोक. वह अपनी पीढ़ी के शायद सबसे महान रेडियो पत्रकार थे, जिन्होंने भारत को दुनिया तक पहुंचाया और बीबीसी को भारत में वह विश्वसनीयता दिलाई, जो कभी उसके पास थी."
वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा ने एक्स पर लिखा, "भारत से गहरा लगाव रखने वाले और बीबीसी के दिग्गज पत्रकार मार्क टली अब नहीं रहे. बीबीसी में उनके दोस्त और लंबे समय तक साथ काम करने वाले सतीश जैकब ने फ़ोन पर यह दुखद ख़बर दोस्तों को दी."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















