‘पोखर’ में तैयार हो रहे हैं ‘ओलंपिक’ तैराक!

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- Author, रवि प्रकाश
- पदनाम, रांची से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
सोलह साल की रेखा को सांप से डर लगता है. पिछले हफ़्ते जब वह रांची से सिर्फ 14 किलोमीटर दूर स्थित अपने गांव होचर के चेकडैम में तैराकी का प्रशिक्षण ले रही थी, तभी किसी बच्चे ने वहां एक सांप को तैरते देखा.
इसके बाद रेखा में साहस ही नहीं हुआ कि वहां तैरे और उस दिन की ट्रेनिंग वहीं रुक गई. अगले दिन उसे फिर वहीं पर स्विमिंग करनी थी.
रेखा कुमारी ने कहा कि उन्हें प्रोफेशनल तैराक बनना है. वह 2020 के ओलंपिक गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं. उसे विश्वास है कि एक दिन वो ओलंपिक के लिए चुनी जाने वाली तैराकी टीम का हिस्सा बनेगी.

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इसी तरह पिंकी कुमारी और मोनू भी उसी चेकडैम में तैराकी का प्रशिक्षण लेते हैं. इन तीनों ने स्विमिंग पूल नहीं देखा है. उनके कोच उमेश कुमार पासवान ने बताया है कि प्रोफेशनल तैराक स्विमिंग पूल में तैरते हैं. इसलिए अब ये स्विमिंग पूल में तैरना चाहती हैं. उन्हें भरोसा है कि स्विमिंग एसोसिएशन उनके लिए पूल की व्यवस्था करेगा.
झारखंड स्विमिंग एसोसिएशन के जेनरल सेक्रेटरी शैलेंद्र कुमार तिवारी ने बीबीसी से कहा, "झारखंड में स्विमिंग के खिलाड़ियों के लिए पर्याप्त पूल नहीं हैं. इस कारण इन बच्चों को अपने-अपने गांवों के पोखर, डैम, चेकडैम में तैराकी की प्रैक्टिस करनी पड़ती है."
वे कहते हैं, "रांची स्थित खेलगांव के वीर बुद्धू भगत एक्वेटिक स्टेडियम के पूल में 2012 से ही तैराकी बंद है. इसके लिए उन्होंने सरकार को कई पत्र लिखे लेकिन इसका असर नहीं हुआ."
वहीं सरकार इससे इत्तेफाक नहीं रखती. झारखंड सरकार के स्पोर्ट्स डायरेक्टर रणेंद्र कुमार ने बीबीसी से कहा, "इस पूल के जीर्णोद्धार का काम तेजी से चल रहा है. सितंबर के अंतिम सप्ताह में यहां सीनियर लेवल नेशनल तैराकी चैंपिनशिप होनी है. इससे पहले पूल के रिनोवेशन का काम पूरा कर लिया जाएगा. उन्होंने बताया कि फिलहाल मोरहाबादी स्थित पूल में तैराकी की सुविधा उपलब्ध है."

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रणेंद्र कुमार ने कहा, "हम गांव-गांव मे स्विमिंग पूल नहीं बना सकते. जिन गांवों में शौचालयों की व्यवस्था नहीं हो, वहां पूल प्राथमिकता में निश्चित तौर पर शामिल नहीं होंगे. लेकिन, इसका यह मतलब नहीं है कि सरकार तैराकों को सुविधाएं नहीं देना चाहती. हम इच्छुक तैराकों को स्विमिंग एसोसिएशन के माध्यम से पूल उपलब्ध कराते हैं."
इधर, शैलेंद्र तिवारी को उम्मीद है कि 2020 और 2024 के ओलंपिक में झारखंड के तैराकों को भी भारतीय टीम में जगह मिलेगी. उनका कहना है कि लोहरदगा, साहिबगंज, सरायकेला खऱसांवा, रांची आदि जिलों में कई प्रतिभावान तैराक हैं, जो भविष्य में देश के लिए मेडल ला सकते हैं.
उन्होंने बताया कि रांची के आसपास के इलाकों में गैरसरकारी संस्था 'निमित्त' के सहयोग से प्रतिभावान तैराकों को प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है. नेशनल चैंपियनशिप के बाद डेनमार्क के सहयोग से टेलेंट हंट की योजना है. इसके बाद विदेशी कोच की मदद से भी प्रैक्टिस करायी जाएगी.

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'निमित्त' की निकिता सिन्हा ने बीबीसी को बताया कि उनकी संस्था कांके ब्लाक के होचर समेत 10 गांवों में तैराकी के इच्छुक 100 से अधिक बच्चों को प्रशिक्षण दिला रही है. उन्होंने बताया कि इन बच्चों में जज्बा है. इन्हें तैराकी का 'व्याकरण' भले ही नहीं पता हो, लेकिन इनकी तैराकी का स्टैंडर्ड काफी ऊंचा है.
होचर में इन बच्चों के कोच उमेश कुमार पासवान राष्ट्रीय स्तर की तैराकी प्रतियोगिताओं में झारखंड का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. उन्हें उम्मीद है कि चेकडैम में पर्याप्त पानी होने की वजह से वो बच्चों को तैराकी सिखा पाएंगे और ये बच्चे राष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन कर पाएंगे.
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