गोल्ड के लिए तरसे कई महान खिलाड़ी

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हम अक्सर ओलंपिक के बारे में बात करते हुए बोल्ट, फेल्प्स या शायद लैरिसा लैटिनीना जैसे महान खिलाड़ियों का ही जिक्र करते हैं.
इस चक्कर में हम उन चुनिंदा शानदार खिलाड़ियों का नाम लेना भूल जाते हैं जो दुर्भाग्य की वजह से कभी कोई गोल्ड मेडल नहीं जीत सके.
बॉक्सिंग, फ़ुटबॉल और अमरीकी स्पोर्ट्स में ऐसे कुछ खेल हैं जिसमें ओलंपिक में मिली उपलब्धि बहुत मायने नहीं रखती.
ओलंपिक आयोजन से भी ज्यादा प्रतिष्ठा इन खेलों से जुड़े आयोजन की होती है.
बहरहाल, यहां हम आपको कुछ ऐसे महान ख़िलाड़ियों के बारे में बताने जा रहे हैं जो कभी ओलंपिक में गोल्ड मेडल नहीं जीत सके.

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जमैका की महान धाविकाओं में से एक मर्लिनो-टी ने ओलपिंक में 100 मीटर और 200 मीटर की दौड़ में शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन रजत और छह कांस्य पदक जीते.
उन्होंने सात ओलंपिक में हिस्सा लिया. उन्होंने 20 साल की उम्र में 1980 में मास्को में हुए ओलंपिक में पहली बार हिस्सा लिया.
बीजिंग ओलंपिक में 100 मीटर दौड़ के लिए वो क्वालीफाई नहीं कर पाई थीं. उस वक्त उनकी उम्र 48 साल थीं.
वो दो बार विश्व चैंपियन रहीं. लेकिन कभी भी गोल्ड मेडल नहीं जीत पाईं.

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नामीबिया के फ्रैंक फ्रेडरिक्स ने 1992 में हुए बार्सिलोना ओलंपिक में 100 मीटर और 200 मीटर की दौड़ में दूसरा स्थान हासिल किया था.
बाद के सालों में वो 200 मीटर और 400 मीटर की दौड़ में विश्व चैंपियन थे. 1996 के अटलांटा ओलंपिक से पहले उन्होंने 200 मीटर दौड़ में माइकल जॉनसन को हराया था.
माइकल जॉनसन 200 और 400 मीटर की दौड़ में वर्ल्ड चैंपियन थे. उन्होंने 200 मीटर में 17 साल पुराना विश्व कीर्तिमान तोड़ा था. लेकिन फ्रेडरिक्स ने उन्हें हराया था.
ओलंपिक में उनके गोल्ड जीतने की संभावना प्रबल मानी जा रही थी.

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लेकिन फ्रेडरिक्स अटलांटा ओलंपिक के दौरान अपना प्रदर्शन कायम नहीं रख सके और 200 और 400 मीटर दोनों ही प्रतिस्पर्धाओं में दूसरे स्थान पर रहे.
उस वक्त के पश्चिमी जर्मनी के पीटर माइकल कोल्बे एकल नौका रेस के पांच बार वर्ल्ड चैंपियन रहे और तीन बार ओलंपिक में भी हिस्सा लिया लेकिन वो कभी भी गोल्ड मेडल नहीं जीत सके.
उन्हें फिनलैंड की प्रैट कैरपीनेन ने 1976 और 1984 के ओलंपिक में मात दी थी. पश्चिमी जर्मनी ने 1980 में मास्को ओलंपिक का बहिष्कार किया था.
1988 के सियोल ओलंपिक में वो उस समय पूर्वी जर्मनी की ओर से ओलंपिक में हिस्सा ले रहे थॉमस लैंज के हाथों हार गए थे.
ऑस्ट्रेलिया के फ्रैंक बायरपायर का नाम महानतम तैराकों में शुमार किया जाता है. उन्होंने 200 मीटर से लेकर 1500 मीटर तक की प्रतिस्पर्धा में कई वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए.

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फिर भी वो कभी ओलंपिक गोल्ड मेडल नहीं जीत पाए.
उन्होंने वर्ष 1908, 1920 और 1924 में तीन अलग-अलग प्रतिस्पर्धाओं में रजत और कांस्य पदक जीता था.
ब्रिटेन की रनर पॉला रैड्क्लिफ़ लंदन मैराथन में रिकॉर्ड समय में मैराथन पूरा करके वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी हैं.
उन्होंने लंदन मैराथन में दो घंटे 15 मिनट और 25 सेकेंड का समय लिया. ब्रिटेन के मशहूर स्पोर्ट्स साइंटिस्ट प्रोफेसर ग्रेग व्हाइट उनकी इस उपलब्धि पर कहते हैं कि शायद ही कोई महिला इतने कम समय में मैराथन पूरा कर पाए.
रैड्क्लिफ़ का दस किलोमीटर के रोड रेस में भी वर्ल्ड रिकॉर्ड है.

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लेकिन ओलंपिक में उनका प्रदर्शन हमेशा निराशाजनक रहा है. वो 2004 में एथेंस ओलंपिक, 2008 में बीजिंग ओलंपिक और 2012 में लंदन ओलंपिक में कुछ नहीं कर पाई. बीजिंग ओलंपिक में तो उन्हें 23वां स्थान हासिल हुआ था.
इसके अलावा इस सूची में सोनिया ओ'सुलिवन, वीली बैंक्स, असाफा पॉवेल, मैरी डेकर-स्लेनी या हिचैम एल गुरोज जैसे नाम शामिल हो सकते हैं.
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