ओलंपिक के दौरान सीटें क्यों ख़ाली?

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    • Author, फर्नांडो डूआर्टे
    • पदनाम, बीबीसी ब्राज़ील

टिकटें बिकने के आधिकारिक आकड़ों से लगता है कि रियो ओलंपिक की टिकटें ख़ूब बिकी हैं.

अगस्त के शुरुआत में आयोजन समिति ने बेहतर बिक्री का जश्न मनाया, दावा किया गया कि एक अरब डॉलर की बिक्री का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है.

रियो ओलंपिक के कम्यूनिकेशन डायरेक्टर मारियो एंड्रैडा ने इस हफ़्ते यह आकड़ा पेश किया कि 88 फ़ीसदी (आम लोगों के लिए उपलब्ध 65 लाख टिकटों में से 57 लाख) टिकटें बिक गई हैं.

हालांकि ये आकड़ें अक्सर ओलंपिक गेम्स के दौरान खाली रह जा रही सीटों से मेल नहीं खा रहे हैं.

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आइओसी) और रियो ओलंपिक 2016 की ओर से हर दिन होने वाले संयुक्त प्रेस वार्ता में यह सवाल लगातार पूछा जा रहा है.

और मारियो एंड्रैडा हमेशा कम आबादी वाले क्षेत्र होने को इसकी वजह बता रहे हैं.

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वो दलील देते हैं कि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि जिन लोगों ने टिकट ख़रीदा है, वे इवेंट देखने आएं ही.

हालांकि रियो 2016 की ओलंपिक समिति ने अभी तक आधिकारिक रूप से आकड़ों की घोषणा नहीं की है.

समिति की यह भी दलील है कि उसे कभी भी उम्मीद नहीं थी कि ब्राज़ील में इवेंट में खचाखच भीड़ होगी. ओलंपिक में कई ऐसे खेल हैं जो यहां उतने लोकप्रिय नहीं हैं, यहां तक कि उनके बारे में लोगों को पता भी नहीं है. फ़ुटबॉल और वॉलीबॉल ब्राज़ील में खेले जाने वाले मुख्य खेल हैं.

मारियो एंड्रैडा ने कहा, "हम इन खेलों का ब्राज़ील में खेल की संस्कृति को बढ़ावा देने के मौक़े के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं."

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रियो ओलंपिक के टिकट के दामों को लेकर भी आलोचना हो चुकी है. आयोजन समिति ने इसका समाधान निकालने के लिए क्रेडिट कार्ड से चार क़िस्तों में बिना किसी ब्याज के भुगतान करने की सुविधा उपलब्ध करवाई है.

मारियो एंड्रैडा स्टेडियम खाली रहने के पीछे एक कारण यह भी गिनवाते हैं कि ओलंपिक में ब्राज़ील का कोई बड़ा खिलाड़ी मेडल जीतने का दावा नहीं पेश कर रहा है.

पिछले चार ओलंपिक में ब्राज़ील ने सिर्फ़ दो मेडल जीते हैं. रियो 2016 में टीआगो ब्रैज़ ने पुरुषों के पोल वॉल्ट प्रतिस्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता है जो कि 1984 के बाद ट्रैक एंड फिल्ड में किसी पुरुष के द्वारा जीता गया ब्राज़ील का पहला गोल्ड है.

आयोजकों ने प्रायोजकों के लिए टिकट आरक्षित होने की तरफ भी ध्यान दिलाया है.

कोई स्पष्ट आकड़ा तो मौजूद नहीं है लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक़ वीआईपी मेहमानों के लिए शराब और खाने का इंतज़ाम करने वाली कंपनियों को भी उम्मीद से कम मुनाफ़ा हुआ है.

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