बारिश रुकी पर जलस्तर बढ़ गया

चेन्नई बाढ़
    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

पिछले 48 घंटे से चेन्नई में बारिश नहीं हुई है. बादलों से पीछे से कई दिन बाद सूरज ने झांका भी फिर भी जलस्तर बढ़ रहा है. इससे बचाव कार्य में लगी संस्थाओं, सेना और एनडीआरएफ़ को दिक़्क़तें पेश आ रही हैं.

हाईकोर्ट की वकील गीता रामासेशन के अनुसार, "दो दिन से बारिश नहीं हुई है पर कई इलाकों में जलस्तर बढ़ रहा है क्योंकि स्थानीय जलाशयों से पानी छोड़ा जा रहा है. हमें बताया गया है कि 20,000 क्यूसेक पानी सिर्फ़ चेराम्बक्कम से छोड़ा गया है."

वह अपना अनुभव बताती हैं, "मेरी सड़क पर तो पानी नहीं है लेकिन 500 मीटर दूर पानी तेज़ी से बह रहा है. यह पहले भी हुआ है लेकिन समस्या कुछ और है, जिस पर पिछले हफ़्ते हाईकोर्ट ने नाराज़गी जताई थी."

उनके मुताबिक़, "नदी के बहाव क्षेत्र में ज़मीन के मालिकाना हक़ दे दिए. जब अदालत के सामने उन मकानों को नियमित करने के लिए याचिका डाली गई तो हाईकोर्ट नाराज़ हो गया."

रामासेशन कहती हैं कि ऐसी नीतियों का असर यह हुआ कि "निम्न आय वाले परिवारों को कम से कम 70,000 से 1,00,000 रुपए तक नुक़सान हुआ है. हम लोग कार वाले मध्यवर्ग या उच्च वर्ग की तो बात ही नहीं कर रहे."

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"अब ज़रा देखें कि उनके पास क्या है, भले ही वह सरकारी उपहारों के रूप में मिला हो. एक ग्राइंडर, एक मिक्सी, एक टीवी, एक-दो पंखे और एक दोपहिया. और इनमें से कुछ भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता क्योंकि उनके घरों में पांच-सात फ़ीट पानी भर चुका है. इसके अलावा उनके पास जो भी काग़ज़ात होंगे, वो पहले ही खो चुके हैं."

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इसका असर आईटी सेक्टर पर भी पड़ा है. कई कंपनियां अपने कर्मचारियों की सुरक्षा और काम चलाने के लिए अलग तरह की रणनीतियां अपना रही हैं.

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नैसकॉम की वरिष्ठ उपाध्यक्ष संगीता गुप्ता कहती हैं, "अधिकतर कर्मचारियों को छुट्टी दे दी गई है. जिनमें लोग काम कर रहे हैं, वहां पहले लोगों को बाहर निकालने की रणनीति लागू कर दी गई है और जो अहम काम कर रहे हैं वही ऑफ़िस में रुके हैं. इसके लिए उन्हें व्यवसायिक ज़रूरतों के अनुरूप रहने की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है."

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आईटी सेक्टर की अधिकतर कंपनियों में नियमपूर्वक अलग स्थानों पर काम कर रही टीमें भी हैं. संगीता के अनुसार, "लेकिन ध्यान कर्मचारियों की सुरक्षा पर है."

मगर एयरपोर्ट बंद होने के कारण जिस ग्राहक की लंदन की फ़्लाइट छूटी और जिसे सड़क मार्ग से बेंगलुरु जाना पड़ा, उसकी राय कुछ अलग थी.

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एक मल्टीनेशनल कंपनी में वरिष्ठ अधिकारी पी आनंदन कहते हैं, "सभी जानते हैं कि विकास की रफ़्तार इतनी तेज़ है कि आधारभूत ढांचा उसके साथ नहीं बदल पा रहा. अमरीका में कटरीना और दूसरे तूफ़ान देखने के बाद आपको ऐसी प्रतिक्रियाएं मिलती हैं. आपको लगता है कि हम ख़ुद अपनी आलोचना करने वाले समाज का हिस्सा हैं."

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