बिहार: सारण में ज़हरीली शराब पीने से 29 की मौत, विधानसभा में हंगामा

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- Author, चंदन कुमार जजवाड़े
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, बिहार से
बिहार के सारण ज़िले में मंगलवार शाम कथित रूप से ज़हरीली शराब पीने की वजह से कम से कम 29 लोगों की मौत हो गयी है.
सारण ज़िले के डीएम राजेश मीणा ने बीबीसी हिंदी से बात करते हुए कहा कि 'अब इस मामले में 29 लोगों की मौत हो चुकी है. और 9 लोगों का छपरा में इलाज चल रहा है, वहीं 11 को पटना भेज दिया गया है. इनमें कई लोग गंभीर हैं.'
उन्होंने ये भी बताया है कि 'कुछ लोगों को आंखों से दिखना बंद हो गया है और उल्टियां हो रही हैं.'
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, ये मामला सामने आने के बाद छपरा के थाना प्रभारी रीतेश मिश्र और कांस्टेबल विकेश तिवारी को निलंबित कर दिया गया है.
मंगलवार देर रात इस इलाक़े में कुछ लोगों ने कथित तौर ज़हरीली शराब पी जिसके बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी. इन लोगों को छपरा के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया.
इससे पहले छपरा के एसपी संतोष कुमार ने बुधवार को बीबीसी को बताया था कि 'अंतिम सूचना मिलने तक 16 लोगों का पोस्टमॉर्टम हुआ था. कुछ लोग बीमार भी हैं, इसलिए ये संख्या बढ़ सकती है.'
ऐसी भी ख़बरें आई हैं कि लोग अलग-अलग जगहों पर चुपचाप इलाज करा रहे हैं क्योंकि बिहार में शराब पीना अपराध है.
एसपी संतोष कुमार ने बीबीसी को बुधवार को बताया था कि 'पुलिस इलाके में लोगों से कह रही है कि अगर कोई व्यक्ति कहीं और इलाज करवा रहा है तो वो सामने आए. दस मृतकों के परिवार वालों ने अब तक शराब पीने की बात स्वीकार की है. हम टीम बनाकर जांच कर रहे हैं और लोगों को जागरुक भी कर रहे हैं. पूरे छपरा में तलाशी अभियान चला रहे हैं, खासकर प्रभावित इलाके में. "
इन मौतों के बाद स्थानीय लोगों में भी आक्रोश देखा जा रहा है.
बिहार में विपक्षी पार्टियां इन मौतों का कारण ज़हरीली शराब का सेवन बता रही हैं. ये मुद्दा बिहार से दिल्ली तक सुर्ख़ियों में आ गया है.
बीजेपी सांसद सुशील मोदी ने कहा, "मैं मानता हूं कि ज़हरीली शराब की वजह से दूसरे राज्यों में भी लोग मर सकते हैं. आपने (नीतीश कुमार) बिहार में जब शराबबंदी लागू करने का निर्णय लिया, तो फिर कैसे इतनी बड़ी संख्या में लोग मर रहे हैं, इतनी बड़ी संख्या में लोग जेल कैसे जा रहे हैं?
हम शराबबंदी के समर्थन में हैं मगर इसकी समीक्षा किए जाने की ज़रूरत है. मुख्यमंत्री को इस विफलता की ज़िम्मेदारी लेकर सदन में और भाजपा के विधायकों से क्षमा मांगनी चाहिए."
वहीं, नीतीश कुमार ने इस मुद्दे पर कहा, "ज़हरीली शराब से तो शुरू से लोग मरते हैं, ज़हरीली शराब से अन्य राज्यों में भी लोग मरते हैं. लोगों को सचेत रहना चाहिए क्योंकि जब शराब बंदी है तो ख़राब शराब मिलेगी ही. जो शराब पियेगा वो मरेगा ही. इस पर पूरी तरह से कार्रवाई होगी. मैंने अधिकारियों को कहा है कि ग़रीबों को न पकड़ें जो लोग इसका व्यवसाय कर रहे हैं उन्हें पकड़ें. शराब बंदी कानून से कई लोगों को फायदा हुआ है कई लोगों ने शराब छोड़ दी है."
बिहार विधानसभा में बुधवार को इस मुद्दे पर हंगामा देखा गया है.
बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक ट्वीट में दावा किया था कि बिहार में ज़हरीली शराब के 14 लोगों की मौत हो गई है, लेकिन सवाल करने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बौखला गए.
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बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा है कि शराबबंदी के पहले भी ज़हरीली शराब से लोगों की मौत हो रही थी. बीजेपी बिहार में सालों तक सत्ता में साझेदार रही, उसने इसके लिए क्या किया वो भी बताना चाहिए.
छपरा के सिविल सर्जन सागर दुलाल सिन्हा ने बीबीसी को बताया, "पोस्टमॉर्टम के लिए लाये गये शवों को देखकर लगता है कि यह पॉइज़निंग का मामला है."
सिविल सर्जन के मुताबिक़ विसरा सैंपल इकट्ठा किये जा रहे हैं. इनकी जांच सारण पुलिस की तरफ़ से मुज़फ़्फ़रपुर के लैब में करवाई जाएगी. उसके बाद ही मौत के सही कारण का पता लग पाएगा.

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बिहार में शराबबंदी
- बिहार में अब तक शराबबंदी क़ानून तोड़ने के मामले में कुल पांच लाख़ से ज़्यादा केस दर्ज हो चुके हैं (505951)
- बीते छह साल बिहार में क़रीब ढाई करोड़ लीटर (24226060) अवैध शराब ज़ब्त की गई है
- इस दौरान शराबबंदी क़ानून तोड़ने के मामले में साढ़े छह लाख़ से ज़्यादा (655770) लोगों की गिरफ़्तारी भी हुई है.
(आंकड़े 21 नवंबर 2022 तक के हैं)


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केवल नवंबर महीने में ही सरकारी एजेंसियों ने तीन लाख़ लीटर से ज़्यादा शराब ज़ब्त किया है. बिहार राज्य में साल 2016 में शराबबंदी लागू की गई थी.
यानी सख़्त क़ानून के बाद भी बिहार में शराबबंदी कानून को तोड़ने के मामले कम नहीं हो रहे हैं.
बिहार में ज़हरीली शराब पीने के होने वाली मौत पहले भी कई बार हो चुकी है.
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