बिहार: सोन के दियारा में 'पीले सोने' पर संघर्ष, वर्चस्व की लड़ाई या कुछ और है मामला?

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    • Author, विष्णु नारायण
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, पटना (बिहार) से

साल 2000 में बिहार से झारखंड अलग हो गया. झारखंड के हिस्से में प्राकृतिक संसाधनों वाले अधिकांश इलाके़ और खदान चले गए. बिहार में बच गया बालू.

इसकी अहमियत का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सोन नदी के बालू को बोलचाल की भाषा में 'पीला सोना' कहा जाता है.

आरोप है कि बालू खनन को लेकर अपराध और भ्रष्टाचार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. वैध और अवैध खनन को लेकर सूबे में आए दिन ख़ूनी संघर्ष की घटनाएं देखने को मिलती हैं. बुधवार (28 सितंबर) रात राजधानी पटना ज़िले में बिहटा के दियारा इलाक़े में भारी गोलीबारी हुई जो लगभग 12 घंटे तक जारी रही.

पटना पुलिस ने बताया है कि गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई. हालांकि, स्थानीय मीडिया में आई खबरों में मरने वालों की संख्या ज़्यादा बताई गई है.

स्थानीय अख़बारों में छपी ख़बरों में दावा किया गया है कि 'गोलीबारी में पाँच लोग मारे गए.' इसे लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है.

रिपोर्टों में दावा किया गया है कि गोलीबारी बालू खनन में सक्रिय दो माफ़िया गुटों के बीच वर्चस्व स्थापित करने और बालू घाटों पर क़ब्जे़ को लेकर हुई.

बिहार में खनन और वर्चस्व की लड़ाई कोई नई बात नहीं है. चाहे ट्रक, पोकलेन (मशीन) और नाव ज़ब्त किए जाएं, प्रशासन चाहे ड्रोन से निगरानी करे या ख़ुद डीएम और एसपी ही छापेमारी क्यों न करें लेकिन फिर भी खनन माफ़िया के हौसले टूटते नहीं.

जानकार दावा करते हैं कि प्रशासन की कार्रवाई का कुछ देर तक असर रहता है लेकिन फिर सब कुछ सामान्य गति से चलने लगता है.

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इमेज कैप्शन, घटनास्थल पर कई जगह ख़ून गिरे हुए मिले.
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बिहटा में गोलीबारी

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राजधानी पटना के बिहटा थाना क्षेत्र में पड़ने वाले अमनाबाद दियारा इलाक़े में बुधवार रात बालू माफ़ियाओं के बीच 'ख़ूनी संघर्ष' हुआ.

रिपोर्टों के मुताबिक, 'बालू खनन और उठाव को लेकर शत्रुघ्न राय और श्रीराय गुट के बीच सैकड़ों राउंड गोलियां चलीं.' कई जगह ख़ून के धब्बे देखे गए. हालांकि पटना के एसएसपी मानवजीत सिंह ढिल्लों ने बताया, "इस गोलीबारी में सिर्फ़ एक व्यक्ति की मौत हुई."

मृतक का नाम विमलेश कुमार है. विमलेश आरा ज़िले के रहनेवाले थे और घाट पर मज़दूरी करते थे. पुलिस ने मौके़ से 50 से अधिक ख़ाली खोखे बरामद किए हैं.

एडीजी जेएस गंगवार ने शुक्रवार (30 सितंबर) को इस मामले पर मीडिया से बातचीत की.

एडीजी जेएस गंगवार

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एडीजी ने क्या कहा?

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एडीजी जेएस गंगवार बताया, "देखिए पुलिस ने घटनास्थल पर जाकर पड़ताल की और पाया कि यह फौजिया और सिपाही गिरोह के बीच हुआ संघर्ष है. सिपाही गिरोह का सरग़ना पहले से ही जेल में है. गिरोह के बाक़ी लोगों ने अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए गोलीबारी की. पुलिस इस मामले को लेकर संजीदा है. हम खनन विभाग के साथ समन्वय और टास्क फ़ोर्स बनाकर काम कर रहे हैं."

अपराधियों के बेख़ौफ़ होने को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, "देखिए हम लोग लगातार कार्रवाई कर रहे हैं. जून से अब तक खुदाई रुकी रहती है. जुलाई के महीने में ही नौ एफ़आईआर और 14 छापेमारी हुई है. 57 वाहनों को ज़ब्त किया गया है. 20 लाख का दंड वसूला गया है."

उन्होंने आगे कहा, "जुलाई से अब तक सैकड़ों पोकलेन मशीन ज़ब्त की गई हैं. 44 एफ़आईआर दर्ज हुई हैं. कई गिरफ़्तारियाँ भी हुई हैं. रही बात गोलीबारी की तो घटना स्थल के निरीक्षण के बाद यह स्पष्ट होता है कि दो गुटों के बीच गोलीबारी हुई है. ख़ून के धब्बे मिले हैं. जांच जारी है. 50 खोखे मिले हैं. परिजनों के बयान के आधार पर पुलिस ने एक मौत की पुष्टि की है. मृतक का नाम विमलेश कुमार है. पुलिस आसपास के इलाक़ों और अस्पतालों में जांच कर रही है."

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इमेज कैप्शन, घटनास्थल से चले हुए कारतूस के कई खोखे मिले.
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पहले भी चली हैं गोलियां

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सोन के दियारा इलाक़े में बालू खनन को लेकर पहली बार ख़ूनी संघर्ष नहीं हुआ है.

इसी साल जनवरी में भी दो व्यक्ति बालू माफ़ियाओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई में मारे गए थे. तब इस संघर्ष का वीडियो भी वायरल हुआ था. काफ़ी शोरगुल भी हुआ था. लॉ एंड ऑर्डर को लेकर सरकार को घेरने की कोशिशें की गईं. लेकिन कई लोगों का आरोप है कि ऐसा लगता नहीं कि माफ़ियाओं को इससे कोई ख़ास फ़र्क पड़ा.

खनन में माफियाओं की सक्रियता पर वरिष्ठ पत्रकार कन्हैया भेलारीने बीबीसी से कहा, "देखिए बालू के वैध, अवैध खनन और पत्थर की तुड़ाई, कोई बंद नहीं करा सकता. चाहे जिसकी भी सरकार हो. राज्य में शराबबंदी के बाद बालू खनन राजस्व वसूली का सबसे बड़ा ज़रिया है तो प्रदेश भर में अलग-अलग इलाके़ में माफ़िया इसमें कूद पड़े हैं. जब इतने लोग एक ही कारोबार में कूदेंगे तो वर्चस्व की लड़ाई होगी ही. हालिया गोलीबारी उसी का परिणाम है."

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इमेज कैप्शन, कारतूस के खाली पैकेट.
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निवेशकों का सम्मेलन और विपक्ष के सवाल

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बिहार में गुरुवार (29 सितंबर) को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव समेत प्रदेश के आला अधिकारी 'बिहार इन्वेस्टर्स मीट' में शिरकत कर रहे थे.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले उद्योगपतियों को आश्वस्त करने की कोशिश में लगे थे कि 'करप्शन, क्राइम और कम्युनलिज़्म' के सवाल पर सरकार किसी भी तरह के समझौते के मूड में नहीं है.

वो अपना और तमाम डीएम, एसपी के नंबर उद्योगपतियों से साझा कर रहे थे. क़ानून व्यवस्था के मोर्चे पर मुस्तैदी साबित करने के लिए एनसीआरबी के आंकड़े साझा कर रहे थे. लेकिन इनके बीच दियारा इलाक़े की गोलीबारी की ख़बरें सरकार के दावों पर सवालिया निशान लगा रही थीं.

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विपक्ष के नेता क़ानून व्यवस्था को लेकर सरकार को घेरने में जुटे हैं. दियारा इलाके़ में हुई गोलीबारी पर बेतिया के सांसद और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने ट्विटर पर लिखा, "एक तरफ़ मुख्यमंत्री जी उद्योगपतियों को कह रहे हैं कि बिहार में निर्भीक होकर रहिए और वहीं से 40 किलोमीटर दूर बालू माफ़ियाओं की लड़ाई में सैकड़ों राउंड गोलियां चल रही हैं."

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता मनोज शर्मा ने शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता की.

उन्होंने बीबीसी से कहा, " सरकार के लिए यह बड़ी ही हास्यास्पद स्थिति है. एक तरफ़ सरकार इन्वेस्टर्स मीट के माध्यम से उद्योगपतियों को राज्य में बुलाने में लगी है और वहां से चंद किलोमीटर की दूरी पर अपराधियों का हौसला इस क़दर बढ़ा हुआ है कि सैकड़ों राउंड गोलियां चलाई जा रही हैं. कई लोग घायल हैं और कई की मौत हुई है. निश्चित तौर पर इस सरकार का इक़बाल बिल्कुल ही ख़त्म हो चुका है."

भाजपा प्रवक्ता मनोज शर्मा

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बिहार के बालू की बाहर भी है माँग

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बिहार और उसके पड़ोसी राज्यों में सोन और दूसरी नदियों से निकले बालू की निर्माण कार्य में ख़ासी माँग होती है.

मध्य प्रदेश के अमरकंटक से निकलकर गंगा में मिलने वाली सोन नदी के बालू में मिट्टी बहुत कम होती है. इससे कन्सट्रक्शन में सीमेंट तो कम लगता ही है, इसका जोड़ भी मज़बूत होता है.

पीला सोना कहे जाने वाले सोन के बालू की माँग और उससे जुड़े अपराध पर टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज़, पटना केन्द्र के पूर्व चेयरपर्सन प्रोफे़सर पुष्पेन्द्र सिंह ने बीबीसी से बातचीत की.

वो कहते हैं, "देखिए सोन के बालू की क्वालिटी काफ़ी उम्दा होती है. दूसरी बात यह कि कंस्ट्रक्शन लाइन में अभी सैचुरेशन नहीं आया है. चारों तरफ़ घर और सड़क बन रही हैं. इसलिए सोन के बालू की माँग है. रही बात क्राइम की तो इससे कई लोग कमा रहे हैं. कोई बड़ा पूंजीपति तो इसमें लगा नहीं है तो छोटी पूंजी वाले लोग आपस में टकरा रहे हैं. यही आपसी टकराहट कई बार अलग-अलग तरीके़ से सामने आ जाती है."

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इमेज कैप्शन, पुलिस ने बालू की अवैध खुदाई में लगी कई गाड़ियों को ज़ब्त किया है.
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एनजीटी की रोक के बावजूद जारी है खनन

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देश भर में पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों को बचाने से जुड़े मामलों के प्रभावी और तुरंत निपटारे के लिए 2010 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल क़ानून बनाया गया. यह क़ानून वन्य और जलीय जीवों के संरक्षण के लिए बना है.

बरसात का मौसम कई जलीय जीवों के लिए प्रजनन का समय होता है तो एनजीटी इस दौरान नदियों में खनन पर भी रोक लगाता है.

इस बार भी एक जून से 30 सितंबर तक बालू खनन को लेकर एनजीटी ने रोक लगाई थी लेकिन सूबे की तमाम नदियों में बालू खनन नहीं रुका. जब खनन जारी है तो बालू से लदी ओवर लोडेड गाड़ियां भी जगह-जगह पकड़ी जा रही हैं और वर्चस्व की लड़ाई भी रह-रहकर सतह पर आ जाती है.

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क्यों नहीं रुकता अवैध ख़नन?

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ग़ौरतलब है कि खान एवं भूतत्व मंत्री रामानंद यादव की बर्ख़ास्तगी की मांग को लेकर भाजपा सांसद और पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी लगातार हमलावर रहे हैं.

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उन्हें राजद कोटे से मंत्री बनाए जाने पर सुशील मोदी ने कई जगह बयान दिया था. मोदी ने आरोप लगाया था कि सीएम नीतीश कुमार ने 'दूध की रखवाली का ज़िम्मा बिल्ली को' दे दिया है. उन्होंने ये आरोप भी लगाया, "बालू से होने वाली अवैध कमाई से राजद की तिजोरी भर रही है. लालू परिवार और बालू माफ़ियाओं के बीच क़रीबी संबंध हैं."

हालांकि पिछली सरकार में खान और भूतत्व विभाग भाजपा के ज़िम्मे था. बृजकिशोर बिंद मंत्री थे. तब भाजपा के ही एक अन्य नेता और पूर्व मंत्री रामाधार सिंह ने मंत्री पर बालू माफ़ियाओं से मिले होने और रिश्वतख़ोरी का आरोप लगाया था.

उस आरोप को तत्कालीन मंत्री बृजकिशोर बिंद ने सिरे से ख़ारिज कर दिया था और दावा किया था कि विभाग ने लक्ष्य से अधिक राजस्व वसूली की है.

जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार

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क्या कह रहे हैं जदयू प्रवक्ता?

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विपक्ष के ताबड़तोड़ हमले और ऐसे मामलों को रोकने में शासन प्रशासन की नाकामी के सवाल पर सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल जनता दल यूनाइटेड के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने बीबीसी से बातचीत की.

उन्होंने कहा, " इस बात से तो हम इनकार नहीं कर रहे कि घटना नहीं हुई है लेकिन प्रशासन इस मामले में त्वरित कार्रवाई कर रहा है. इस इलाके़ की भौगोलिक स्थिति भी इसमें देखने वाली चीज़ है. चूंकि यह नदी का इलाक़ा है और टापू जैसी जगह बन गई है तो हर जगह पुलिस नहीं हो सकती. छापेमारी जारी है. कई लोगों को पकड़ा गया है."

उनके अनुसार, "इस पूरे मामले में देखने वाली बात यह भी है कि माइनिंग ऐक्ट काफ़ी कमज़ोर है. लोग अवैध काम करते पकड़े जाते हैं और 4-5 महीने में छूट जाते हैं. रही बात भाजपा के नेताओं की बयानबाज़ी की तो क्या उनके समय में ऐसी घटनाएं नहीं होती थीं? भाजपा के नेताओं ने तो लंबे समय तक इस विभाग को संभाला है. तब तो वे लोग ऐसा नहीं बोलते थे."

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