अग्निपथ विवाद: प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ बुलडोज़र की बात क्यों हो रही है?

इमेज स्रोत, ANI
- Author, विनीत खरे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
बिहार की उप-मुख्यमंत्री और भाजपा नेता रेणु देवी ने कहा है कि अग्निपथ योजना के विरोध में हिंसा कर रहे लोगों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए.
बेतिया में केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने उनके आवास पर हमला कर दिया था जिसमें उनके घर को काफ़ी नुक़सान पहुंचा. हमले के वक़्त रेणु देवी पटना में थीं.
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "शायद आपने तस्वीर में देखा होगा, पूरे घर के जितने शीशे वग़ैरह हैं, सभी का टूटना, फूटना... गाड़ी का सत्यानाश (हो गया).... एक लोहे का गेट है इसलिए थोड़ा बच गया, नहीं तो और घर में घुसने की पूरी कोशिश हुई, आगे से लेकर पीछे से भी की गई."
रेणु देवी के मुताबिक़ हमले के वक़्त घर में उनकी बहनों, परिवार के अन्य लोगों और घर में काम करने वालों को मिलाकर कुल सात या आठ मौजूद लोग थे.
उन्होंने हिंसा में विपक्ष का हाथ बताया और कहा, "छात्र अगर आंदोलन करते हैं, क्या पेट्रोल बम हाथ में लेकर चलेंगे, क्या पेट्रोल हाथ में लेकर चलेंगे? ये तो बहुत ग़लत बात है. यही विपक्ष के लोग गुंडागर्दी करवा रहे हैं."
"हमारे यहां कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. अभी तक नहीं हुई है. हम भी मांग करते हैं कि कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए."
हालांकि कांग्रेस ने इन प्रदर्शनों में किसी भूमिका से इनकार किया है.
ये पूछे जाने पर कि क्या उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली की तर्ज़ पर बिहार में भी बुलडोज़र इस्तेमाल किया जाना चाहिए, रेणु देवी ने कहा, "निश्चित रूप से होना चाहिए. पढ़ने-लिखने वाले बच्चे ऐसा नहीं कर सकते."

इमेज स्रोत, Getty Images
भारतीय सेना में भर्ती की नई योजना अग्निपथ के विरोध में देश के कई हिस्सों में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए हैं.
विरोध प्रदर्शनों के कारण बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और तेलंगाना समेत अन्य राज्यों में में 300 से अधिक ट्रेनों की आवाजाही बाधित हुई है. प्रदर्शनकारियों ने प्लेटफ़ॉर्म पर खड़ी ट्रेन की कोचों में आग लगा दी गई है.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 1
उत्तर प्रदेश के बलिया, बुलंदशहर के अलावा मध्य प्रदेश के ग्वालियर से भी विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें आई हैं.
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट YouTube समाप्त, 1
क्या अग्निपथ प्रदर्शनों के ख़िलाफ़ भी होगा बुलडोज़र का इस्तेमाल?
उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने प्रयागराज और सहारनपुर में हिंसा पर कहा था कि उपद्रवियों के ख़िलाफ़ बुलडोज़र का इस्तेमाल जारी रहेगा.
योगी आदित्यनाथ के मीडिया एडवाइज़र मृत्युंजय कुमार ने हाल में एक बुलडोज़र की तस्वीर के साथ ट्वीट किया था, "उपद्रवी याद रखें, हर शुक्रवार के बाद एक शनिवार ज़रूर आता है..."
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 2
अप्रैल में मध्य प्रदेश के खरगौन हिंसा पर राज्य के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा था, "खरगौन के गुनाहगारों से सख़्ती से निपटा जाएगा. वहां जिन घरों से पत्थर आए हैं, उन घरों को पत्थर का ढेर बनाएंगे."
अब इस तरह के सवाल पूछे जा रहे हैं कि क्या जहांगीरपुरी, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के खरगौन की तर्ज़ पर अग्निपथ के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने वालों के ख़िलाफ़ भी बुलडोज़र का इस्तेमाल होगा?
सरकारों द्वारा बुलडोज़रों के इस्तेमाल को क़ानूनी चुनौती दी गई है और मामला विभिन्न अदालतों में है.
कांग्रेस के सलमान निज़ामी ने ट्वीट करके पूछा, "इनके कपड़े देखिए मोदी जी. बुलडोज़र कहां हैं?"
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 3
साल 2019 में नागरिकता क़ानून के विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, "ये आग लगाने वाले कौन हैं, वो उनके कपड़ों से ही पता चल जाता है."
बीबीसी से बातचीत में सलमान निज़ामी कहते हैं, "अगर बुलड़ोज़र चलाना है तो सब पर चलाइए ना. दंगाई-दंगाई है. धर्म के आधार पर आप क्यों देख रहे हैं? जब मुसलमान प्रदर्शन करता है तो आप बुलडोज़र चलाते हैं लेकिन कल जब अग्निपथ के प्रदर्शन हुए, ट्रेनें जलीं, तो उन पर बुलडोज़र नहीं चला."
सलमान निज़ामी के मुताबिक़, "किसानों ने आंदोलन किया. देश में इससे पहले भी बहुत से दंगे हुए हैं. आप एक समुदाय के पीछे पड़े हैं ताकि आप उनकी आवाज़ को दबा सकें."
एक्टिविस्ट सफ़ूरा ज़र्गर ने ट्विटर पर लिखा, "पुलिस ने इन दंगाइयों पर गोली क्यों नहीं चलाई? बड़ी संख्या में में एफ़आईआर नहीं की? रिकवरी कब होगी? एनएसए/यूएपीए? षड्यंत्र? कम से कम बुलडोज़र ही चला लो?"
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 4
पत्रकार रोहिणी सिंह ने लिखा, "मुझे पूरा यक़ीन है कि योगी आदित्यनाथ बुलडोज़र की तैयारी कर रहे होंगे."
वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई कहते हैं, "बुलडोज़र डर और धमकाने का प्रतीक बन गया है क्योंकि इसका इस्तेमाल चुन कर किया जाता है. जब कोई मुसलमान दंगा करता है तो आप बुलडोज़र का इस्तेमाल करते हैं और अब जब युवा दंगा कर रहे हैं, तब आप उनके बारे में क्या करेंगे? आप एक ख़तरनाक उदाहरण पेश कर रहे हैं."
इसी विषय पर आरएसएस के मुखपत्र आर्गनाइज़र से जुड़े एक पत्रकार निशांत आज़ाद ने लिखा, "बुलडोज़र का इस्तेमाल विकास दुबे, सुरेंदर भाटी, अनिल दुजाना, बदन सिंह बड्डो, एमएलए विजय कुमार और कई अपराधियों के ख़िलाफ़ किया गया जो हिंदू हैं, इसलिए ये कहना बंद कीजिए कि योगी सरकार इसे एक समुदाय के ख़िलाफ़ इस्तेमाल कर रही है."
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 5
भाजपा का पक्ष
बीबीसी से बातचीत में भाजपा प्रवक्ता अपराजिता सारंगी के मुताबिक़ ये कहना सही नहीं है कि बुलडोज़र किसी बात का प्रतीक बन गया है.
सारंगी के मुताबिक़ जिस तरह से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के खरगौन आदि में बुलडोज़र का इस्तेमाल हुआ वो स्थिति अभी लागू नहीं है.
वो कहती हैं, "हर चीज़ में बुलडोज़र की बात नहीं करनी चाहिए, और ये उसका सही इस्तेमाल नहीं है. ये ग़लत है... क़ानून हमें जो भी कहता है, लोगों के ख़िलाफ़ उसी आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए."
सारंगी कहती हैं, "लोगों को क्या परेशानी हो रही है, हम उसका ध्यान रखते हैं और मुझे पूरा यक़ीन है कि रक्षा मंत्रालय जनता के विचारों पर ध्यान दे रहा है. अगर किसी संशोधन की ज़रूरत है, तो वो होगा."
मध्य प्रदेश में प्रदर्शन और तोड़-फोड़ की ख़बरों पर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के मुताबिक़ ग्वालियर में जहां कुछ लोगों ने विरोध व्यक्त किया और कुछ पुराने टायरों में आग लगा दी गई हिंसा कहीं नहीं हुई.
अग्निपथ के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों में बुलडोज़र के इस्तेमाल के सवाल पर वो कहते हैं, "किससे तुलना कर रहे हो आप इन बच्चों की?"
लेकिन बिहार में भाजपा नेता और उप-मुख्यमंत्री रेणु देवी हिंसक भीड़ के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई और बुलडोज़र के इस्तेमाल की हिमायत करती हैं.
वो कहती हैं, "बिहार में सबसे ज़्यादा उपद्रव हो रहा है. ट्रेन किसकी है? समाज की है. जनता की गाढ़ी कमाई की है.... छात्र बहुत सेंसिटिव होते हैं, वो कभी ट्रेन को आग नहीं लगा सकते हैं. वो कभी किसी की प्राइवेट प्रॉपर्टी को नष्ट नहीं कर सकते हैं."
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट YouTube समाप्त, 2
'क़ानून को शॉर्ट-सर्किट करना सही नहीं'
वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई कहते हैं कि प्रशासन अपराधी नहीं हो सकता.
वो कहते हैं, "आपने खरगौन में किसी ऐसे व्यक्ति का घर तोड़ा जिसे ये प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिला था. इलाहाबाद में मोहम्मद जावेद मामले में घर पत्नी के नाम है. आप प्रक्रिया को पूरा कीजिए. अगर कोई ग़ैरक़ानूनी काम हुआ है तो आप घर ढहाइए लेकिन प्रक्रिया के तहत, न किसी दंगे में ऐक्शन-रिएक्शन के तहत. प्रशासन रिएक्शन राजनीति का हिस्सा नहीं बन सकता."

इमेज स्रोत, Reuters
राजनीतिक विश्लेषक डॉक्टर वेद प्रकाश वैदिक भी मानते हैं कि अगर बुलडोज़र का इस्तेमाल करना है तो वो क़ानून के तहत होना चाहिए और उसका इस्तेमाल सभी के ख़िलाफ़ एक समान होना चाहिए.
वो कहते हैं कि सरकार कोई क़ानून बनाए या फ़ैसला लागू करे उससे पहले उससे प्रभावित होने वाले लोगों को उसे विश्वास में लेना चाहिए.
डॉक्टर वेद प्रकाश कहते हैं, "ये सरकार की कमी है. जिन पर फ़ैसले का असर होना था, उनसे कोई सलाह नहीं ली गई. कृषि क़ानूनों का असर किसानों पर असर होना था, आपने उनसे सलाह नहीं ली."
"सरकार को आर्मी यूनिट की तरह नहीं चलाया जा सकता. आप फ़ैसला ले लें और लोगों से उसे मान लेने की उम्मीद करें ऐसा नहीं हो सकता. सरकार में काम ऐसे नहीं होता, फ़ैसला लेने से पहले आपको उससे प्रभावित होने वालों की राय को भी शामिल करना होता है."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
















