अग्निपथ: कई राज्यों में हिंसक विरोध प्रदर्शन, बलिया में दो महीने के लिए धारा 144 लागू

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देश के अलग-अलग हिस्सों में सेना में भर्ती से जुड़ी 'अग्निपथ स्कीम' को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों की वजह से तीन सौ से ज़्यादा ट्रेनों का आवागमन प्रभावित हो गया है.
बीते तीन दिनों से जारी विरोध प्रदर्शनों में तमाम स्थानों पर रेलवे स्टेशन और ट्रेनों को नुकसान पहुंचाया गया है.
तेलंगाना, बिहार और उत्तर प्रदेश में प्रदर्शनकारियों ने ट्रेनों को आग के हवाले कर दिया.

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उत्तर प्रदेश के बलिया ज़िले में अग्निपथ योजना को लेकर विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने अगले दो महीने के लिए धारा 144 लागू कर दी है.
बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा से बात करते हुए बलिया की ज़िलाधिकारी सौम्या अग्रवाल ने इस ख़बर की पुष्टि की है.
प्रशासन ने समाचार एजेंसी एएनआई के माध्यम से 12 निर्देशों की एक सूची साझा की है जिनका इस अवधि के दौरान पालन किया जाना है.
इस निर्देश के अनुसार, "जुमे की नमाज़ के बाद अलग-अलग स्थानों पर हुई हिंसक घटनाएं, अग्निपथ योजना के विरोध और आगामी तेयोहार बकरीद और मोहर्रम को देखते हुए शांति भंग होने की संभावना है. इसलिए 17 जून 2022 से लेकर दो महीने तक अवधि के लिए बलिया में धारा 144 लागू रहेगी."
इस दौरान सार्वजनिक स्थानों पर पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने पर मनाही होगी, न कोई जलूस निकाला जाएगा और न ही कोई धरना प्रदर्शन होगा. हालांकि ये नियम सामाजिक रीति-रिवाज़ों और जुमे की नमाज़ पर लागू नहीं होगा.
बता दें कि बलिया में शुक्रवार सुबह युवाओं ने अग्निपथ स्कीम का विरोध करते हुए रेलवे स्टेशन पर खड़ी दो ट्रेनों में तोड़फोड़ की थी.
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पूर्व मध्य रेलवे ने शुक्रवार शाम बुलेटिन जारी करके बताया है कि अब तक 214 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है. इसके साथ ही 78 ट्रेनों का आंशिक समापन किया गया है.
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बिहार के आरा ज़िले में रेलवे स्टेशन जलाने के बाद 3 लाख रुपये लूटे जाने की बात सामने आ रही है.
इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने मोहिउद्दीन नगर में जम्मू तवी एक्सप्रेस में आग लगा दी और लखीसराय जंक्शन में खड़ी एक ट्रेन को भी आग के हवाले कर दिया.
वहीं, उत्तर प्रदेश में प्रदर्शनकारियों ने बलिया ज़िले में स्टेशन पर खड़ी बलिया-सियालदह एक्सप्रेस और बलिया-लोकमान्य टर्मिनस एक्सप्रेस में तोड़फोड़ की.
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सिकंदराबाद में मौजूद बीबीसी संवाददाता सुरेखी अबूरी ने बताया है कि तेलंगाना के हैदराबाद के गांधी अस्पताल के सुपरिंटेंडेंट ने बताया है कि अग्निपथ योजना के विरोध के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई है जबकि 14 लोग घायल हुए हैं. घायलों को अस्पताल में एडमिट कराया गया है. इनमें से दो लोगों की सर्जरी की गई है.
इसी बीच रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने युवाओं से अपील की है कि रेलवे राष्ट्र की संपत्ति है, इसे किसी तरह से नुक़सान न पहुंचाया जाए, ये सभी की ज़िम्मेदारी है.
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क्या है अग्निपथ योजना

- योजना के तहत 90 दिनों के भीतर क़रीब 40 हजार युवकों का चयन किया जाएगा.
- उन्हें 6 महीने की ट्रेनिंग दी जाएगी
- भर्ती होने के लिए उम्र 17.5 साल से 21 साल के बीच होनी चाहिए.
- युवाओं के विरोध के बाद योजना के पहले बैच के लिए अधिकतम आयु सीमा दो साल बढ़ाई गई है.
- शैक्षणिक योग्यता 10वीं या 12वीं पास होगी
- इस स्कीम के तहत भर्तीचार सालों के लिए होगी
- पहले साल की सैलरी प्रति महीने 30 हज़ार रुपये, चौथे साल प्रति महीने 40 हज़ार रुपये होगी
- चार साल बाद सेवाकाल में प्रदर्शन के आधार पर मूल्यांकन होगा और 25 प्रतिशत लोगों को नियमित किया जाएगा

क्या कहते हैं प्रदर्शनकारी
अग्निपथ योजना का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों का कहना है कि चार साल की नौकरी के बाद उनका भविष्य सुरक्षित नहीं है और पिछले दो साल से रुकी हुई भर्तियों को भी बहाल किया जाना चाहिए.
इसी तरह नेता और विशेषज्ञों की राय भी इस योजना को लेकर बंटी हुई है. कोई इसे युवाओं और सेना के लिए बेहतरीन योजना बता रहा है तो कोई इसे युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी ख़तरनाक बता रहा है.

योजना के समर्थन में तर्क
उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ़्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने अग्निपथ योजना को युवाओं के लिए बेहतरीन मौक़ा बताया है. वो सैन्य अधिकारी भी रहे हैं.
उन्होंने कहा, "मेरा पूरा जीवन फौज में बीता है. मेरे पिताजी भी फौज में रहे हैं. मैंने खुद 40 साल तक सेना में नौकरी की है. अग्निपथ योजना और अग्निवीर की मुझे बहुत खुशी है. सबसे पहले मैं ये बताना चाहता हूं कि मैंने कई सेवारत अधिकारियों, जवानों, जेसीओ और सेवानिवृत्त अधिकारियों से भी बात की है, सभी में एक खुशी है कि हमारे सुरक्षाबलों में युवाओं की संख्या बढ़ेगी, उनकी स्किल बढ़ेगी. जो हमारे राष्ट्र की सबसे बड़ी संपत्ति है यूथ, उनके लिए ये बहुत अच्छा मौक़ा है."
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वहीं, कूटनीतिक मामलों के जानकार ब्रह्म चेलानी ने अग्निपथ योजना के समर्थन में कई ट्वीट किये हैं.
उन्होंने लिखा है, "कई देशों की सेनाएं बड़े पैमाने पर छोटे कार्यकाल वाले सैनिकों पर निर्भर करती हैं. सैनिकों की भर्ती के नए नियमों के साथ भारतीय सेना को और मूलभूत सुधारों की ओर बढ़ना चाहिए. सेना को बदलते ख़तरों के बीच अपनी अपरंपरागत युद्ध क्षमताओं और साइबर और खुफ़िया इकाइयों का विस्तार करने की ज़रूरत है."
"भारत वाहिद मुल्क नहीं है जहां छोटे कार्यकाल के लिए सैनिकों की नियुक्तियां हो रही हैं. अमेरिकी सेना ने अल्पकालिक भर्तियों के अपने विकल्पों का दायरा बढ़ाया है. उदाहरण के लिए, अमेरिकी सेना नए सैनिकों को बुनियादी और उन्नत प्रशिक्षण के बाद सक्रिय ड्यूटी पर केवल दो साल के लिए भेजती है."
उन्होंने कहा, "भारत का लोकतंत्र किसी भी सुधार का विरोध करने का मौक़ा देता है, चाहे वो अपकालिक और युवा सैनिकों की तैनाती ही क्यों हो. नए भर्ती नियम सेना में सैनिकों की औसत आयु 32 से घटाकर 25 करने में मदद करेंगे. सबसे बेहतर जवान को को स्थायी पदों के लिए चुना जाएगा और बाकी पुलिस और अन्य सेवाओं में शामिल हो सकते हैं."
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सड़क परिवहन राज्य मंत्री और पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने कहा, "अगर आप सेना में आना चाहते हैं तो इसकी प्रक्रिया वही रहेगी. आपका टेस्ट होगा, आपकी फ़िज़िकल और मेडिकल जांच होगी. आप यहां पिकनिक के लिए नहीं आ रहे हैं, आप सेना में आ रहे हैं और ये कठिन है. जो भी सेना में आना चाहता है उसे अपनी योग्यता साबित करनी होगी. आपको मुश्किल जगहों पर तैनात किया जा सकता है. प्रक्रिया वहीं रहेगी इसमें कोई शक़ नहीं है."

एक टेलीविज़न चैनल से बात करते हुए उन्होंने कहा, "योजना अभी आई ही है. इसे शुरू तो होने दें, इसमें पहली नियुक्तियां होने दें. ये देखें कि ये योजना कैसे काम करती है. सुधार सभी योजनाओं में होते हैं. शॉर्ट सर्विस कमीशन को पांच साल के लिए शुरू किया गया था और बाद में उसे कोई पेंशन और चिकित्सकीय सुविधा नहीं मिलती थी. यह पैसे या सरकारी नौकरी की सुरक्षा का सवाल नहीं है. हमें यह देखने की ज़रूरत है किन चीजों को हमारी राजनीतिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं बदलना चाहिए."
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कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने अग्निपथ योजना का समर्थन किया है.
उन्होंने ट्वीट किया, "अग्निपथ भर्ती प्रक्रिया को लेकर चिंतित युवाओं के साथ मेरी सहानुभूति है. वास्तविकता यह है कि भारत को अत्याधुनिक हथियारों से लैस एक युवा सशस्त्र बल की ज़रूरत है. संघ के सशस्त्र बल रोजगार गारंटी कार्यक्रम नहीं होने चाहिए."
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बीजेपी सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौर ने अधिकतम आयु सीमा दो साल बढ़ाने को लेकर ट्वीट किया और इसे सराहनीय निर्णय कहा है.
उन्होंने लिखा, "इस वर्ष ऊपरी आयु सीमा 21 से बढ़ाकर 23 वर्ष कर दी गई है. कोरोना महामारी के कारण दो वर्षों से रुकी भर्ती को देखते हुए सरकार के इस निर्णय से युवाओं को बड़ा लाभ मिलेगा. अग्निवीर बनने को लेकर युवाओं में उत्साह."
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तीनों सेना के प्रमुख भी अग्निपथ योजना का समर्थन कर रहे हैं.
समाचार एजेंसी एनआई के अनुसार एयर फोर्स प्रमुख एयर चीफ़ मार्शल वीआर चौधरी ने कहा है कि इस यौजना के तहत एयर फोर्स नई नियुक्तियां 24 जून से शुरू करेगा.
वहीं आर्मी प्रमुख जनरल मनोज पांडेय ने कहा है कि इसी साल दिसंबर से अग्निवीरों की ट्रेनिंग शुरू की जाएगी और अगले साल के मध्य तक उन्हें सेवा में बहाल कर दिया जाएगा.
नेवी प्रमुख अडमिरल आर हरि कुमार ने इस योजना को बदलाव लाने वाला कदम कहा है.
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योजना के विरोध में तर्क
लेकिन, कुछ पूर्व अधिकारी ऐसे भी हैं जिन्हें इस योजना में खूबियां कम और कमियां ज़्यादा नज़र आ रही हैं.
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के सहयोगी रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना पर सवाल उठाए हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ अमरिंदर सिंह ने सेना में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना पर पुनर्विचार का सुझाव दिया है. साथ ही कहा कि उन्हें हैरानी है कि सरकार को ऐसे बड़े बदलाव क्यों करने पड़े.
समाचार एजेंसी यूएनआई के मुताबिक़ कैप्टन अमरिंदर सिंह का कहना है कि चार साल की नौकरी किसी जवान के लिए बहुत छोटी अवधि की है.
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लेफ़िटनेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए पूर्व सैन्य अधिकारी शंकर प्रसाद ने कहा, "एक पहलू से देखा जाए तो नौकरियों के लिए ये अच्छी स्कीम है. इससे शायद सरकार को वित्तीय फायदा होगा. खर्चा कुछ घटेगा."
उन्होंने लिखा, "लेकिन, दूसरी तरफ़ इसका असर राष्ट्रीय सुरक्षा पर होगा. इसमें चार साल के लिए भर्ती होगी और इसमें छह महीने की ट्रेनिंग होगी. बाकी बचे साढ़े तीन साल तो छुट्टी निकालकर क़रीब दो से ढाई साल बचेंगे. अब इसमें 17 से 21 साल की उम्र का लड़का क्या सैनिक बनेगा? पश्चिम और पूर्वोत्तर में हमारे देश की बॉर्डर है. देश के भीतर भी कहीं-कहीं विद्रोह की स्थिति है. इसलिए इन सब चीज़ों से निपटने के लिए हमें प्रशिक्षित और उत्साहित सैनिक चाहिए."
"कुछ साल पहले भारतीय सेना ने एलओसी पार करके कुछ अभियान किए थे. उस किस्म के अभियान में क्या ये बच्चे काम कर पाएंगे? दूसरी बात अगर हमारे पास उच्च तकनीकी उपकरण हैं तो ये लड़के तकनीकी रूप से मुश्किल से ही योग्य होंगे, वो ऐसे उपकरणों को कैसे सीख पाएंगे. बेसिक सैन्य प्रशिक्षण आज नौ महीने का होता है. अब इसे छह महीने कर रहे हैं, उसके बाद तुरंत ये लड़के यूनिट में भेज दिए जाएंगे. अब वो यूनिट किन स्थितियों में तैनात होगी और ये वहां कितना काम कर पाएंगे."

वहीं कांग्रेस सांसद दीपेंदर सिंह हुड्डा ने इस योजना को देश की सुरक्षा और युवाओं के लिए ख़तरनाक बताया है.
उन्होंने कहा, "अग्निपथ योजना देश की सुरक्षा और नौजवानों के भविष्य के लिए घातक है. सरकार फौरन इसे वापिस ले. इसके ख़िलाफ़ प्रधानमंत्री जी को पत्र लिखने जा रहा हूं. पहले किसानों के लिए किया संघर्ष,अब जवानों के लिए करेंगे. राष्ट्र सुरक्षा व युवाओं की पवित्र भावनाओं से खिलवाड़ नही होने देंगे."
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कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि सरकार की वित्तीय हालत बिगड़ रही है और पैसा बचाने के लिए वो ये कदम उठा रही है.
उन्होंने लिखा, "सरकार ये क्यों नहीं कहती कि हम वेतन और पेंशन नहीं दे सकते, इससे हमारी वित्तीय हालात बदतर होती जा रही है इसलिए ये पैसा बचाने के लिए अगली पीढ़ी के नौजवान जो सेना में भर्ती होना चाहते हैं उनके भविष्य से हम खिलवाड़ कर रहे हैं."
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पंजाब के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी से नेता भगवंत मान ने कहा है कि सैनिकों को भाड़े पर नहीं रखा जा सकता.
उन्होंने कहा, "हम सैनिकों को भाड़े पर नहीं रख सकते. हम उन्हें 21 साल की उम्र में कैसे पूर्व सैनिक बना दें? वो मुश्किल हालातों में देश की रक्षा करते हैं. राजनेता कभी सेवानिवृत्त नहीं होते, केविल सैनिक और जनता रिटायर करते हैं. हमें भाड़े पर सैनिक नहीं चाहिए. अग्निपथ योजना को वापस लिया जाना चहिए."
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बिहार में बीजेपी की सहयोगी पार्टी जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह ने भी इस संबंध में ट्वीट किया है.
उन्होंने लिखा है, "अग्निपथ योजना के निर्णय से बिहार सहित देशभर के नौजवानों, युवाओं एवं छात्रों के मन में असंतोष, निराशा व अंधकारमय भविष्य (बेरोजगारी) का डर स्पष्ट दिखने लगा है. केंद्र सरकार को इस पर अविलंब पुनर्विचार करना चाहिए क्योंकि यह निर्णय देश की रक्षा व सुरक्षा से भी जुड़ा है."
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