बिहार में शराब के ख़िलाफ़ नया सरकारी फ़रमान, शिक्षक क्यों हैं परेशान

- Author, राहुल कुमार गौरव
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
बिहार में शराबबंदी क़ानून के बावजूद ज़हरीली शराब पीकर मरने का सिलसिला जारी है. अब शराब माफ़ियाओं पर नियंत्रण के लिए बिहार सरकार ने एक नई घोषणा की है.
बिहार शिक्षा विभाग के नए निर्देश के मुताबिक़ शिक्षक गण चोरी छिपे शराब पीने वालों या शराब बेचने वालों की सूचना मद्यनिषेध विभाग के मोबाइल नंबर पर देंगे, जिनकी जानकारी गुप्त रखी जाएगी.
सरकारी चिट्ठी में कहा गया है कि प्राथमिक, माध्यमिक समेत सभी स्कूलों के शिक्षक अपने आस-पास शराब पीने वाले और शराब बेचने वालों की सूचना सरकारी अधिकारियों को देंगे.
इसके लिए फ़ोन नंबर भी जारी किए गए हैं जिसमें दो मोबाइल नंबर दिए गए हैं और दो टोल फ़्री नंबर भी. इस मामले को लेकर शिक्षक नाराज़ हैं और उन्होंने बिहार में कई जगह विरोध प्रदर्शन भी किया है.
हालांकि सरकार का कहना है कि शराबबंदी को सफल बनाने के लिए शिक्षकों से सिर्फ़ अपील की गई है.

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'शिक्षकों पर बढ़ेगा जान का ख़तरा'
सहरसा ज़िले में बिहरा क्षेत्र के सेवाश्रम पटोरी की शिक्षिका अंजू महतो कहती हैं, "आपको पता है बिहार में कितने आरटीआई ऐक्टिविस्टों की मौत की ख़बरें आती हैं. सरकार अब यही काम शिक्षकों को दे रही है. बस सरकारी आदेश में लिखा है कि जानकारी देने वालों का नाम गुप्त रखा जाएगा, लेकिन बहुत आसानी से बड़े-बड़े कार्यालय से नाम लीक हो जाते हैं. इससे उनकी हत्या तक हो जाती है. तो क्या गारंटी है कि शिक्षकों का नाम लीक नहीं होगा?"
सुपौल ज़िले के मेघनाथ झा कन्या मध्य विद्यालय की शिक्षिका दुलारी देवी कहती हैं, "हमारा काम बच्चों को शिक्षित करना है, न कि ऐसे उल जुलूल कार्यों को करना जिससे स्वयं और परिवार के सदस्यों की जान पर बेवजह का ख़तरा हो. क्या बिहार सरकार की पुलिस और ख़ुफ़िया विभाग इतने कमज़ोर हो गए हैं जो इस प्रकार का आदेश सरकार को जारी करना पड़ता है?"
गड़ौल उच्च विद्यालय सहरसा की शिक्षिका किरण देवी कहती हैं, "बिहार में शराबबंदी के बाद भी शराब धड़ल्ले से बिक रही है. ज़हरीली शराब पीने से मौत का क्रम नहीं रुक रहा है. आपको शराब माफ़ियाओं की ताक़त का अंदाज़ा इससे लग जाएगा. आप ही बताइए जिन माफ़ियाओं के सामने सरकार और पुलिस नतमस्तक है, उनका हम शिक्षक, और उसमें भी महिलाएं क्या बिगाड़ पाएंगी."
शिक्षिका किरण देवी कहती हैं, "सरकार ने कहा है सूचना गुप्त रखी जाएगी. लेकिन जब ख़ुद सरकारी महकमे के लोगों के लिप्त पाए जाने की ख़बरें आती हैं तो सूचना कैसे गुप्त रखी जा सकेगी? अगर ग़लती से भी मेरा नाम आ गया तो मेरे परिवार की स्थिति कैसी हो सकती है यह बताने की ज़रूरत नहीं है और हमको सुरक्षा के लिए हथियार भी नहीं दिया गया है."
शिक्षकों की क़िल्लत
बिहार में वैसे भी शिक्षकों की भारी कमी है. आंकड़ों के मुताबिक़ पहली से 12वीं कक्षा तक स्कूलों में 3.15 लाख शिक्षकों के पद ख़ाली हैं. इसका असर ये है कि 3,276 प्रारंभिक स्कूल केवल एक-एक और 12,507 स्कूल केवल दो-दो शिक्षकों के भरोसे हैं.
शिक्षकों की भारी क़िल्लत के बीच बार-बार सरकार की ओर से दिया जा रहा ग़ैर शैक्षणिक आदेश बिहार की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को और भी ख़राब हालत में पहुंचा सकता है.
छात्रों के बाद अब शिक्षकों का आंदोलन
बिहार में छात्रों का आंदोलन अभी ठंडा भी नहीं पड़ा है कि सरकार की ओर से शराबबंदी से जुड़ा यह आदेश, शिक्षकों को आंदोलन के लिए मजबूर कर रहा है.
पटना, बेगूसराय और अन्य ज़िलों में 30 जनवरी को बिहार में शराबबंदी को लेकर शिक्षा विभाग के फ़रमान का शिक्षकों ने विरोध किया.
शिक्षकों ने अपर मुख्य सचिव के आदेश की प्रति जलाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी.
टीईटी प्रारंभिक शिक्षक संघ बिहार के प्रदेश संयोजक राजू सिंह बीबीसी से कहते हैं, "पढ़ाने की जगह शिक्षकों को कोरोना काल में क्वारंटीन सेंटर में दवा बांटने और खुले में शौच रोकने के लिए कहा जाता है. इस बार का निर्णय तो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और हास्यास्पद है. अगर सरकार ये आदेश शीघ्र वापस नहीं लेती है तो हम आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे."
वहीं टीईटी शिक्षक संघ के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अमित विक्रम कहते हैं, "शिक्षकों को शराब पीने और बेचने वालों को चिन्हित करने के साथ इसकी सूचना देने से संबंधित शिक्षा विभाग का आदेश तुग़लकी फ़रमान है.''
बिहार के मधेपुरा ज़िले के राजकीय कन्या मध्य विद्यालय मधेपुरा में पदस्थापित मिन्नी गुप्ता कह रहीं हैं, "दो साल से कोरोना के कारण पढ़ाई बाधित है. बिहार के गांव में ऑनलाइन पढ़ाई न के बराबर है. इस अवधि में जो नुक़सान हुआ है छात्रों का, उसका शिक्षकों की सहायता से किस तरह भरपाई हो, सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए. लेकिन सरकार हमें कभी खुले में शौच रोकने के लिए भेजती है तो कभी शराबियों को पकड़ने के लिए."
सरकार का पक्ष
शिक्षकों के विरोध प्रदर्शन के बाद राज्य के शिक्षा मंत्री विजय चौधरी ने मीडिया के सामने सफ़ाई देते हुए कहा कि, "शिक्षकों को शराब पकड़ने के लिए कोई टारगेट नहीं दिया गया है. बस शराबबंदी को सफल बनाने के लिए शिक्षकों से अपील की गई है. ये सब अनावश्यक का भ्रम उत्पन्न किया जा रहा है."
बिहार सरकार के द्वारा शिक्षकों को दिया गया यह पहला काम नहीं है जिसका विरोध हो रहा है. इससे पहले बिहार में खुले में शौच करने वालों को खोजने और रोकने का काम भी सरकारी शिक्षकों को सौंपा गया था, जिसकी काफ़ी आलोचना हुई थी.
बिहार में सरकार ने शिक्षकों को शिक्षा के अलावा और भी कई ड्यूटी दी है, जैसे-
- क्वारंटीन सेंटर पर ड्यूटी
- कोरोना की दवा बांटने की ड्यूटी और मास्क चेकिंग
- पशुगणना और जनगणना
- मानव श्रृंखला
- खुले में शौच रोकने का काम
- पोषाहार का वितरण
- मिड डे मील का काम
- बच्चों का नामांकन करना और उनके बारे में पूरी जानकारी रखना, इत्यादि.
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