बिहार में शराबबंदी को लेकर नीतीश सख़्त, बोले- ना शराब आने देंगे, ना पीने देंगे

नीतीश कुमार

इमेज स्रोत, Neeraj Sahai /BBC

    • Author, नीरज सहाय
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, पटना से

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल में ज़हरीली शराब से 40 से अधिक लोगों की मौत के बाद पूर्ण शराबबंदी क़ानून की एक बार फिर उच्चस्तरीय समीक्षा की.

मौजूदा सरकार की पहली वर्षगाँठ के मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को कहा कि पूर्ण शराबबंदी को सही तरीके लागू कराया जाएगा.

जानकारों की राय है कि इस मुद्दे पर सरकार विपक्ष के दबाव में हैं.

नेता प्रतिपक्ष और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अब तक की सभी समीक्षा बैठकों को निरर्थक बताते हुए समीक्षा बैठक से पहले ही सरकार से 15 सवाल पूछे थे.

उनका आरोप था कि सरकार सिर्फ बैठकें करती है, क़ानून तोड़ने के लिए ज़िम्मेदार व्यक्ति पर कार्रवाई नहीं करती.

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नीतीश कुमार ने क्या कहा

नीतीश कुमार ने लगभग सात घंटे तक चली उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मद्य निषेध के क्रियान्वन पर विस्तृत चर्चा की और अधिकारियों को कई निर्देश भी दिए.

बैठक में नीतीश कुमार ने कहा कि शराबबंदी के क्रियान्वन में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

उन्होंने कहा कि "न राज्य में शराब आने देंगे और न किसी को शराब पीने देंगे, सभी इसी मानसिकता के साथ काम करें. जो भी सरकारी अधिकारी-कर्मचारी गड़बड़ी करते हैं उनपर सख्त से सख्त कारवाई करें. समाज में कुछ गड़बड़ करने वाले लोग होते हैं उनकी पहचान कर उन पर कारवाई करें."

उन्होंने नशामुक्ति दिवस (26 नवंबर) पर सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को एक बार फिर से शराबबंदी को लेकर पूरी मज़बूती से शपथ दिलवाने का आह्वान किया.

साथ ही सभी विधायक, विधान पार्षद और अन्य जनप्रतिनिधियों से भी शपथ लेने का आग्रह किया और कहा कि सभी को संकल्प लेकर शराबबंदी को कारगर बनाने के लिए एकजुट होकर काम करना है.

उन्होंने वर्ष 2016 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के सर्वेक्षण का जिक्र करते हुए कहा कि 2016 में पूरी दुनिया में शराब पीने की वजह से 30 लाख लोगों की मृत्यु हुई थी जो कुल मृत्यु का 5.3 प्रतिशत है.

इस दौरान पुलिस महानिदेशक एसके सिंघल ने मुख्यमंत्री द्वारा पूछे गए शराबबंदी से जुड़े प्रश्नों का जवाब दिया और आगे की जाने वाली कार्रवाई की जानकारी दी.

वहीं गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव चैतन्य प्रसाद ने विभाग द्वारा किये जा रहे कार्यों की जानकारी दी. साथ ही सभी जिलों के वरीय पुलिस पदाधिकारियों ने अपने-अपने ज़िलों में मद्य निषेध के क्रियान्वयन से अवगत कराया.

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'कठोर कार्रवाई होगी'

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों शराब आपूर्ति के मार्ग को चिन्हित कर लगातार छापेमारी की जाए और सभी थानों में चौकीदारों पर विशेष नजर रखा जाए और उन्हें गांव में गड़बड़ी करने वालों के संबंध में पूरी सूचना देने को कहा जाए.

साथ ही उन्होंने कहा कि जिन थाना प्रभारियों के काम में शिथिलता पायी गई है उन्हें 10 वर्षों तक थाना प्रभारी नहीं बनाये जाने का निर्णय लिया गया था, इस पर पूरी सख्ती से अमल की जाए

हाल के दिनों में बिहार के पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज और मुज़फ्फरपुर में ज़हरीली शराब पीने से 40 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी. वहीं इस साल राज्य में ज़हरीली शराब पीने से कुल 90 लोगों की मौत हो चुकी है.

विभागीय आंकड़ों के अनुसार अप्रैल, 2016 में राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद ज़हरीली शराब से हुई मौत का पहला मामला खजूरबन्नी, गोपालगंज में हुआ जहाँ 19 लोगों की मौत हुई थी.

पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद से राज्य में अब तक कुल 125 लोगों की मौत ज़हरीली शराब पीने से हो चुकी है.

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