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जय वीरू और शोले | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़रदीन ख़ान और कुणाल खेमू ने ये सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनकी नई फ़िल्म जय वीरू की तुलना कोई सुपरहिट फ़िल्म शोले से करेगा. और इन दोनों फ़िल्मों को एक ही तराज़ू पर रखने वाला कोई नहीं ख़ुद शोले के निर्माता जीपी सिप्पी के नाती साशा सिप्पी हैं. मानो या ना मानो साशा ने जय वीरू के निर्माता श्याम बजाज को क़ानूनी नोटिस भेजी है कि उन्होंने शोले की कहानी को चुराकर फ़िल्म बनाई है. और ऐसा क्यों? शायद सिर्फ़ इसलिए कि शोले और जय वीरू दोनों दो दोस्तों की कहानी है और दोनों फ़िल्मों में दोस्तों के नाम जय और वीरू हैं. अगर आप जय वीरू के कलेक्शन सुनेंगे तो डर के मारे आप की चीखें निकल जाएँगी. ऐसी फ़िल्म की तुलना शोले से करना बेवकूफ़ी से कम नहीं है. इससे पहले साशा सिप्पी ने रामगोपाल वर्मा के ख़िलाफ़ भी क़ानूनी कार्रवाई की थी जब वे शोले से प्रेरित होकर रामगोपाल वर्मा की आग बना रहे थे. अब ये साशा सिप्पी की आग कब बुझेगी? **************************************************************** निर्देशक बना नायक अगर निर्देशक फ़रहान अख़्तर नायक बन सकते हैं तो निर्देशक कुणाल कोहली क्यों नहीं? जी हाँ, अब बारी है फ़ना, हम तुम और थोड़ा प्यार थोड़ा मैजिक जैसी फ़िल्मों के निर्देशक कुणाल कोहली की.
कुणाल अपनी अगली फ़िल्म के लिए नील नितिन मुकेश को साइन करना चाहते थे. लेकिन जब नील ने उनकी फ़िल्म में काम करने से मना कर दिया तो कुणाल ने अपने आप को लाँच करने की सोची. ना सिर्फ़ सोची बल्कि इस दिशा में काम भी शुरू कर दिया. क्योंकि कुणाल थोड़ा प्यार थोड़ा मैजिक से ख़ुद निर्माता भी बन गए हैं. इस नई फ़िल्म का निर्माण भी वे ख़ुद ही करेंगे. थोड़ा प्यार थोड़ा मैजिक के निर्माण में उनके भागीदार थे आदित्य और यश चोपड़ा. लेकिन नई फ़िल्म में क्या अनिल अंबानी की कंपनी बिग पिक्चर्स कुणाल का साथ देगी? ऐसा सुनने में आया है लेकिन औपचारिक घोषणा बाक़ी है. **************************************************************** नायक बना निर्देशक जहाँ निर्देशक कलाकार बन रहे हैं, वहीं कलाकार निर्देशक भी बनने के लिए तैयार हैं. परमीत सेठी एक ऐसे कलाकार हैं, जिन्होंने फ़िल्म निर्देशन में क़दम रखने का फ़ैसला कर लिया है. परमीत अपनी पहली फ़िल्म यश चोपड़ा के बैनर के लिए बनाएँगे. पाठकों को याद होगा कि परमीत ने यश चोपड़ा की फ़िल्म दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे में काम किया था. इस फ़िल्म से उन्हें ख़ूब शोहरत मिली, भले ही उन्हें फ़िल्म में काजोल न मिली हों. आदित्य चोपड़ा की इस पहली निर्देशित फ़िल्म में काजोल की सगाई परमीत से होती है लेकिन अंत में काजोल शाहरुख़ को मिलती हैं. **************************************************************** डीडीएलजे के सात सौ हफ़्ते दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे की बात निकली तो ये बताना ज़रूरी है कि ये फ़िल्म गुरुवार 19 मार्च को 700 सप्ताह पूरे कर लेगी.
जी हाँ, आदित्य चोपड़ा की पहली निर्देशित फ़िल्म लगातार 700 हफ़्तों यानी साढ़े 13 साल से मुंबई में चल रही है. दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे 20 अक्तूबर 1995 में रिलीज़ हुई थी. रिलीज़ के कुछ हफ़्तों बाद ही शाहरुख़ ख़ान और काजोल की ये फ़िल्म मुंबई के मराठा मंदिर में रिलीज़ हुई. तब से ये फ़िल्म वहाँ पर सुबह के शो में चल रही है. लाखों लोगों ने इस सिनेमाघर में इस फ़िल्म को न जाने कितनी बार देखी है. बहुत सारे लोग तो फ़िल्म के शुरू के रील देखकर बाहर निकल जाते हैं क्योंकि पूरी फ़िल्म तो वे देख ही चुके हैं. शुरू के रील में शाहरुख़ और काजोल यूरोप की यात्रा करते हैं. लोगों को यूरोप के नज़ारे देखना पसंद है. इसलिए फ़िल्म के शुरू के रील देखते हैं और उसके बाद घर या अपने काम को चले जाते हैं. ये भारत की सबसे ज़्यादा हफ़्ते चलनेवाली फ़िल्म है क्योंकि आज तक कोई फ़िल्म 700 हफ़्ते लगातार नहीं चली है. **************************************************************** दिमाग़ कहाँ छोड़ आए..? चाँदनी चौक टू चाइना के रिलीज़ होने के तुरंत बाद अक्षय कुमार ने अपने लगभग सभी इंटरव्यू में यह बात चिल्ला-चिल्ला कर कही थी कि चाँदनी चौक टू चाइना देखने के लिए लोगों को अपना दिमाग़ घर छोड़कर आना पड़ेगा. अन्यथा उन्हें फ़िल्म में मज़ा नहीं आएगा.
अब रिलीज़ के दो महीने बाद जब उस 40 करोड़ रुपए की फ़िल्म के सैटेलाइट राइट्स सिर्फ़ चार करोड़ रुपए में बिके हैं तो अक्षय की बात कितनी सच लगती है. वाकई, फ़िल्म के निर्माता वॉर्नर ब्रदर्स, रमेश सिप्पी और मुकेश तलरेजा, निर्देशक निखिल आडवाणी और नायक अक्षय कुमार ने फ़िल्म बनाते वक़्त बिल्कुल दिमाग़ नहीं लगाया होगा. अन्यथा ऐसी फ़िल्म नहीं बनाते जिसके सैटेलाइट राइट उसकी लागत के 10 प्रतिशत में बिकते. ये बात सच है कि इन दिनों सैटेलाइट राइट का बाज़ार कमज़ोर है लेकिन इतना कमज़ोर? ज़ाहिर है, बाज़ार से ज़्यादा फ़िल्म की कमज़ोरी इसमें नज़र आती है. सच अक्षय कुमार? **************************************************************** डिप्रेशन में बॉबी देओल बॉबी देओल डिप्रेशन में हैं. उसके लिए बॉबी दवाइयाँ भी ले रहे हैं. उनके डिप्रेशन की वजह क्या है, ये तो नहीं मालूम, लेकिन शायद उनकी फ़िल्मों का बॉक्स ऑफ़िस पर नहीं चलना ही कारण हो सकता है.
फ़िल्म सोल्जर के बाद ऐसा लगा था कि इंडस्ट्री को एक बहुत अच्छा नायक मिल गया था लेकिन उसके बाद बॉबी की लगभग सारी फ़िल्में बॉक्स ऑफ़िस पर पिट गई. अब तो बॉबी के पास बहुत कम काम है क्योंकि जो फ़ीस बॉबी मांगते हैं, उसमें निर्माता उन्हें साइन करने को राज़ी नहीं हैं. और तो और बॉबी और नाना पाटेकर की आने वाली फ़िल्म एक- द पॉवर ऑफ़ वन की रिलीज़ में भी अड़चन आ गई है. सुनते हैं कि ये फ़िल्म जो अगले सप्ताह 27 मार्च को रिलीज़ होने को थी, उसके ऊपर आईडीबीआई का करोड़ों रुपए का दावा है. जब तक फ़िल्म के निर्माता दावे का निपटारा नहीं करते हैं, आईडीबीआई फ़िल्म को रिलीज़ नहीं होने देगी. कुछ वर्षों पहले आईडीबीआई ने फ़िल्मों का फ़ाइनेंस करना शुरू किया था. लेकिन ऐसा कम हुआ है कि आईडीबीआई के लोन के कारण किसी फ़िल्म की रिलीज़ रुकी हो. |
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