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माधुरी दीक्षित का संघर्ष | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
माधुरी दीक्षित की फ़िल्म आजा नचले क्या फ़्लॉप हो गई, उनका कमबैक ज्यों का त्यों रह गया. हालाँकि उन्हें और फ़िल्मों के ऑफ़र मिल रहे हैं. लेकिन जब तक उन्हें कहानी पसंद नहीं आती और उनके लिए करने को कुछ ठोस नहीं होता, माधुरी आसानी से फ़िल्म साइन नहीं करतीं. शायद इसीलिए माधुरी के वफ़ादार सेक्रेटरी रिक्कू उनके पुराने निर्माता-निर्देशकों को उनके लिए कहानी ढूँढ़ने को कह रहे हैं. हाल ही में रिक्कू ने शोमैन सुभाष घई से माधुरी के लिए अच्छी कहानी खोजने को कहा है. लेकिन ये कोशिश कितनी रंग लाएगी- ये तो आने वाला समय ही बताएगा. ***************************************************************** करण अब यशराज के साथ नहीं करण जौहर ने अपने अंकल यश चोपड़ा और भाई जैसे दोस्त आदित्य चोपड़ा का साथ छोड़ यूटीवी से हाथ मिला लिया है.
चोपड़ा और जौहर में कोई झगड़ा नहीं है. बस करण की अगली फ़िल्म माई नेम इज़ ख़ान, करण और यूटीवी मिल कर बना रहे हैं. कहने का मतलब है, जब ये फ़िल्म तैयार होगी, तो दुनियाभर में इसके वितरण का अधिकार यूटीवी के पास होगा ना कि यश और आदित्य चोपड़ा की कंपनी के पास. आज तक करण की सभी फ़िल्मों के वितरक यश चोपड़ा रहे हैं. पहली बार करण ने अपनी फ़िल्मों के अधिकार किसी और कंपनी को सौंपे हैं. करण जौहर अपने कई इंटरव्यू में यह कह चुके हैं कि वे आदित्य की वजह से फ़िल्मों में आए. आदित्य ने करण जौहर में वो प्रतिभा देखी, जो करण को ख़ुद पता नहीं था. लेकिन आजकल यूटीवी जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियाँ फ़िल्मों के वर्ल्ड राइट्स मोटी रक़म देकर ख़रीद लेती हैं, उसका मुक़ाबला शायद यश चोपड़ा की कंपनी नहीं कर सकती है. यही वजह है कि शाहरुख़ ख़ान और काजोल की माई नेम इज़ ख़ान के राइट्स यूटीवी को बेच दिए गए. ***************************************************************** बॉडी की चिंता जॉन अब्राहम जितनी चिंता कसरत वगैरह की करते हैं, उतनी शायद और किसी की नहीं करते हैं.
जब वो आउटडोर शूटिंग पर जाते हैं, तो उन्हें कहा रहना है, क्या खाना है- इन बातों की परवाह वे बिल्कुल नहीं करते. वे इस बात की चिंता ज़रूर करते हैं कि वे रोज़ कसरत कैसे करेंगे. हाल ही में जॉन अब्राहम हूक या क्रुक की शूटिंग के लिए हैदराबाद में थे. वहाँ उन्होंने निर्माता यूटीवी के लोगों से अपने लिए स्पेशल जिम लगवाया. और इस बात से यूटीवी वाले भी बिल्कुल नाराज़ नहीं हुए. आख़िर जॉन की सेक्सी बॉडी से फ़िल्म को ही फ़ायदा मिलेगा ना. वैसे भी अभिनय से ज़्यादा जॉन अपनी बॉडी, मसल्स और ख़ूबसूरती के लिए लोकप्रिय हैं. ***************************************************************** पहले वांटेड आएगी मुंबई में चर्चा ज़ोरों पर है कि सलमान ख़ान की वीर उनकी फ़िल्म वांटेड से पहले रिलीज़ हो जाएगी. लेकिन इस बात में कोई सच्चाई नहीं है.
क्योंकि वांटेड की शूटिंग ख़त्म हो चुकी है जबकि वीर अभी आधी भी तैयार नहीं है. ऐसी ख़बरें मीडिया वालों को कहाँ से मिल जाती हैं, पता नहीं. लेकिन ऐसी ख़बर छाप कर मीडिया निर्माताओं की नींद उड़ा देती है. हालाँकि वीर सलमान की ख़ुद की कहानी पर आधारित है, उन्हें वांटेड पर पूरा भरोसा है जिसकी वजह से उन्होंने उस फ़िल्म के लिए निर्माता बोनी कपूर को जितनी डेट्स की ज़रूरत थी, उतनी दी. और तो और उनके सेक्रेटरी विकास कपूर ने बताया कि वांटेड के प्रोमोशन के लिए सलमान ने उन्हें एक महीना अलग रखने को कह दिया है. वांटेड तीन जुलाई को रिलीज़ होगी जबकि वीर की तब तक शूटिंग भी पूरी नहीं होगी. ***************************************************************** टेढ़े-मेढ़े अनुराग कश्यप लेखक और निर्देशक अनुराग कश्यप कहते हैं कि जब वे ख़ुद की फ़िल्मों के लिए कहानी लिखते हैं तब उनसे सीधी कहानी नहीं लिखी जाती है, कुछ न कुछ टेढ़ी-मेढ़ी बात होती ही है.
लेकिन जब वे दूसरे निर्देशकों के लिए कहानी लिखते हैं तो वो कमर्शियल सिनेमा के दायरे में रह कर लिखते हैं. इस सप्ताह उनकी फ़िल्म गुलाल रिलीज़ होने जा रही है. चूँकि अनुराग ख़ुद इस फ़िल्म के निर्देशक भी हैं, इसलिए उसमें भी सीधी-सादी कमर्शियल कहानी नहीं है. शेखर कपूर ने ये फ़िल्म देखी है. वे कहते हैं- अनुराग भले ही अलग सोचते हैं लेकिन ऐसा सोचते हैं कि उनकी फ़िल्में देखने वाले भी सोच में पड़ जाते हैं. वो सीधा तो सोच ही नहीं सकते हैं, हर वक़्त जो दर्शक सोचते हैं, वे उससे अलग ही स्क्रीन पर देते हैं. गुलाल भी उनकी ऐसी ही अलग फ़िल्म है. आप उनकी बात से सहमत हैं या नहीं, ये तो बाद की बात है लेकिन फ़िल्म आपको तो एक बार हिला देगी. वैसे अनुराग ने तब्बू को गुलाल का वो प्रिंट ट्रॉयल देखने के लिए बुलाया था, जो सेंसर नहीं हुई थी लेकिन तब्बू आ नहीं पाईं. लगता है, तब्बू ने उनकी पाँच फ़िल्म देख ली होगी और वो फ़िल्म देखकर घबरा गई होगी कि बिना सेंसर के अनुराग कश्यप की फ़िल्म में तो ना जाने क्या-क्या होगा. सेंसर वालों ने इस फ़िल्म में कुछ सीन काटे हैं लेकिन बहुत ज़्यादा कट नहीं है. ***************************************************************** 'फ़रदीन के पास फ़िल्म नहीं' अक्सर देखा गया है कि नायिकाएँ शादी के बाद या तो फ़िल्मों में काम करना छोड़ देती है या कम कर देती हैं. तीसरी बात ये भी होती है कि उन्हें फ़िल्में कम ही मिलती हैं.
लेकिन यहाँ कहानी कुछ और ही है. फ़रदीन ख़ान हैं तो नायक. लेकिन शादी के बाद वे फ़िल्मों में कम ही नज़र आते हैं. पता नहीं, फ़रदीन अपने पारिवारिक ज़िंदगी में बहुत व्यस्त हैं या फिर शादी के बाद उन्हें निर्माता फ़िल्मों में लेते ही नहीं है. जहाँ पहले एक साल में उनकी तीन-चार फ़िल्में आ जाया करती थी, अब मुश्किल से एक या दो फ़िल्मों में ही वो नज़र आते हैं. इस सप्ताह उनकी जय वीरू रिलीज़ हो रही है. अगर ये फ़िल्म नहीं चली तो जो गिनती के निर्माता उनके साथ फ़िल्म बनाते हैं, वो भी उनकी दिशा में जाना छोड़ देंगे. |
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