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अमिताभ से कोई मतभेद नहीं: शत्रुघ्न सिन्हा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
शत्रुघ्न सिन्हा का बोलना ही चर्चा बन जाता है. वे ख़ुद भी मानते हैं कि वे तो समाज सेवा करने राजनीति में आए थे. लेकिन विवाद उनका पीछा ही नही छोड़ते. मोहन सहगल की फ़िल्म साजन से बतौर खलनायक अपने अभिनय की यात्रा शुरू करने वाले शत्रुघ्न सिन्हा राजनीति से भी जुड़े, हालाँकि अब उन्होंने इससे थोड़ी दूरी बना ली है. अब फिल्मों के साथ-साथ उन्होंने टीवी पर भी नई शुरुआत की है. स्टार वन के लोकप्रिय शो द ग्रेट लाफ़्टर चैलेंज में वे इस बार शेखर सुमन की जगह जज की भूमिका में हैं. पिछले दिनों आइफ़ा अवार्ड और क्रिकेट पर उनकी टिप्पणी ने काफ़ी सुर्ख़ियाँ बटोरी और अमिताभ बच्चन ने भी उनका जवाब दिया. इन सब विवादों और अन्य कई विषयों पर उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश क्या टीवी पर एक शुरुआत करने का फ़ैसला सही है और वो भी एक कॉमेडी शो में? मैं हमेशा से कॉमेडी करना चाहता था और मैंने इसके लिए नरम गरम, दोस्त और हाल में अपने प्रोडक्शन की मेरा दिल लेके देखो जैसे फ़िल्मों में काम किया. जहाँ तक टीवी के बात है तो जब हमारे सिनेमा के सबसे बड़े सितारे भी टीवी पर काम कर रहे हैं तो मैं क्यों नही कर सकता. बड़े सितारे से आपका मतलब बिग बी से है. आप तो उनसे हमेशा से ही जुड़े रहे हैं, उनकी फिल्मों से भी और उनके साथ नए-पुराने विवादों से भी? नही, मेरा उनके साथ कोई विवाद नही. मैं उनका बहुत सम्मान करता हूँ. यह सही बात है कि वे मुझसे उम्र में बड़े और फ़िल्मों के मामले में छोटे हैं. पर मुझे जो बात सही लगती है मैं केवल वही बात करता हूँ. मैंने कभी कोई ऐसी बात किसी के बारे में नहीं कही, जो किसी को चोट पहुँचाएँ. मैं आज भी किसी को अपना प्रतिद्वंद्वी नहीं मानता. सब अपना-अपना काम कर रहे हैं. लेकिन पिछले दिनों मीडिया में बिग बी और क्रिकेट पर आपका जो बयान आया, वो चौंकाने वाला है? नहीं, लोगों को ऐसा लगता हैं. मैं जब पटना से पूना अभिनय के लिए गया था तब भी लोग चौंके थे कि गाल पर निशान वाला आदमी कैसे हीरो बन सकता है पर मैंने किया और आज भी मैं ऐसी चुनौतियों से नहीं डरता. आपको लगता है चुनौतियाँ आपके साथ हमेशा बनी रहती हैं चाहे फ़िल्म करियर हो या राजनीति? शायद. चेहरे पर निशान के कारण मेरी शुरुआत बतौर खलनायक हुई और राजनीति में आने पर लोगों ने कहा फ़िल्मी लोग राजनीति में शौक के लिए आते हैं. मैंने अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश की कि मैं लोगों की उम्मीदों पर खरा रहूँ. आपने जब फ़िल्मों में मधुर भंडारकर की फ़िल्म आन की तो आपने अक्षय कुमार के सहायक की तरह की भूमिका क्यों की? जबकि आप ही वे अभिनेता भी हैं जो सत्तर के दशक में अगर ज़ंजीर और दीवार जैसी फ़िल्में नहीं छोड़ते तो बिग बी कभी इतने बड़े स्टार नहीं बनते? मैं ऐसा नहीं मानता. हर आदमी अपनी क़िस्मत और मेहनत से बड़ा स्टार बनता है. आप यह भी तो कह सकते हैं कि अगर मैं कालीचरण और विश्वनाथ जैसी फ़िल्में नहीं करता तो सुभाष घई इतने बड़े निर्देशक नहीं बनते. पर आप यह तो मानेंगे कि आप ही इंडस्ट्री के पहले एंग्री यंग मैन हैं और उस वक़्त सुपर स्टार की दौड़ में आप, विनोद खन्ना और बिग बी ही थे पर बाजी उनके हाथ लगी. आपके साथ ऐसा क्यों होता है?
यह तो सब ऊपरवाले का खेल है. मैं बहुत सकारात्मक सोच वाला इंसान हूँ. मैं कभी नकारात्मक रूप से नहीं सोचता. बच्चन साब के बेटे की शादी में मेरे मिठाई लौटाने और इस बार आइफ़ा अवार्ड को लेकर मैंने जो कुछ कहा उसे लोगो ने तोड़-मरोड़ कर पेश किया. क्रिकेट पर मैंने चियर गर्ल्स को लेकर सिर्फ़ उनके पहनावे पर बात की थी पर उसे मेरे क्रिकेट के विरोध से जोड़कर देखा गया. जोधा अकबर के समय मैं और बिग एक साथ एक ही समारोह में थे. मेरी उनकी मुलाक़ात तेजी जी के निधन के बाद नही हुई थी. यह सामान्य सी बात है जब दो लोग मिलते हैं तो अच्छा लगता है . आपने अपने करियर में जो फिल्में की उनमे खलनायक से नायक बनना कितना चुनौती भरा था? यह संयोग है कि मेरी शुरुआत खलनायकी से हुई लेकिन उसके बाद मैंने आदमी सड़क का, ख़ान दोस्त, दोस्त, दो ठग, ब्लैकमेल, नौकर, क्रांति, शरारा, शान, काला पत्थर, शान, गाय और गौरी, कश्मकश और ख़ुदगर्ज़ जैसी जो फ़िल्में की उनमें आज तक लोगों को मेरा काम और संवाद याद है. बतौर खलनायक आपकी कौन सी फ़िल्मों के चरित्रों को आप बेहतर मानते हैं? निश्चित रूप से मेरे अपने का छेनु, खिलौना का बिहारी, चेतना का रमेश और ब्लैकमेल का जीवन- ऐसे किरदार थे जो ख़ुद मुझे भी परेशान करते थे. लोग उनके पर्दे पर आने पर तालियाँ तो बजाते थे पर गलियाँ भी देते थे. यह सही है कि आपको शोले का गब्बर और जय वाला रोल करने का प्रस्ताव दिया गया था? ये बीती बातें हैं. ऐसी बहुत से फ़िल्में और भूमिकाएँ हैं जो किसी के लिए लिखी गई और किसी और ने की. लेकिन बाद में वे यादगार बन गई. परिवार को लेकर क्या सोचते हैं? आपकी और आपकी पत्नी पूनम की फ़िल्मों में वापसी हुई है और आपके बेटे और बेटी भी अब बड़े हो गए हैं? हाँ. मुझे ख़ुशी होती है. हालाँकि मेरी वापसी तो राकेश रोशन की ख़ुदगर्ज़ से ही हो गई थी. पूनम जब मिस इंडिया बनी थी तो उन्होंने कोमल नाम से मेरे, जितेंद्र और जॉय मुखर्जी के साथ कुछ फ़िल्मों में काम किया था. फिर वो घर में व्यस्त हो गई. अब जोधा अकबर में उनका काम देखकर खुशी हुई. मेरे दोनों बेटे लव और कुश में से कुश राज कँवर की फ़िल्म से शुरुआत कर रहे हैं और लव निर्देशन करना चाहते हैं. मेरी बेटी सोनाक्षी के लिए कई प्रस्ताव हैं पर मैं चाहता हूँ कि उसकी शुरुआत दीपिका पादुकोण की तरह हो. आज के बदले हुए भारतीय सिनेमा के बारे में क्या सोचते हैं? जहाँ से हमने शुरू किया था वहाँ तब कुछ ही फ़िल्में और फ़िल्मकार थे जो दुनिया भर में जाने जाते थे. लेकिन अब भारतीय सिनेमा दुनिया भर का सबसे बड़ा ऐसा सिनेमा भी है जो अपने कंटेंट, संगीत और प्रगति के आधार पर सबसे तेज़ी से आगे बढ़ने वाले सिनेमा के रूप में जाना जाता है. अंत में एक बड़ा सवाल. आप अपने शो में जिन सिद्धू जी के साथ जज हैं उनके बारे बारे में कहा जाता है कि उनके अधिक बोलने के कारण शेखर सुमन ने शो छोड़ दिया? हम दोनों एक ही पार्टी के हैं अगर वे ज्यादा बोलेंगे तो मैं अपने अंदाज में उन्हें खामोश कर दूँगा. |
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