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प्रियंका चोपड़ा के साथ एक मुलाक़ात | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी हिंदी सेवा के विशेष कार्यक्रम 'एक मुलाक़ात' में हम भारत के जाने-माने लोगों की ज़िंदगी के अनछुए पहलुओं से आपको अवगत कराते हैं. इस हफ़्ते हमारे साथ हैं बहुत ही खूबसूरत और सफल अभिनेत्रियों में से एक प्रियंका चोपड़ा, जो जितनी ग्लैमरस हैं उतनी ही फ़िट भी हैं. आप इतनी ग्लैमरस, मशहूर और सफल हैं. कैसा लगता है? ज़्यादातर लोग समझते हैं कि खूबसूरती की दुनिया खूबसरत ही होती है लेकिन ऐसा नहीं है. जितनी आसान ज़िंदगी दिखती है उतनी है नहीं. आपके पिता आर्मी में हैं, तो फिर बचपन में यात्रा तो खूब की होगी? जी हां, बचपन में हमलोग बहुत यात्रा करते थे. हर दो साल बाद पापा का तबादला हो जाता था और हमलोग नई जगह पहुँच जाते थे. इसलिए नए शहरों में जाने और नए दोस्त बनाने की आदत सी हो गई थी. इसका फ़ायदा भी बहुत होता है. नए माहौल और नए लोगों के बीच जल्दी घुलना-मिलना आ जाता है. सिर्फ़ दोस्त बनाती थीं या स्कूल में पढ़ाई-लिखाई भी करती थीं? पढ़ाई का शौक किसी भी बच्चे को नहीं होता और मैं भी अलग नहीं थी. लेकिन मुझे मैथ्स (गणित) का बहुत शौक था. मैं साइंस की स्टूडेंट थी और किसी बात को लेकर नाराज़ हो जाती थी तो कमरा बंद करके मैथ्स करने लगती थी. और गाने का भी शौक था? हां, मैं हर साल कुछ नया बनना चाहती थी. कभी डॉक्टर, कभी इंजीनियर तो कभी झाड़ू-पोछा करने का मन करता था तो बाई बनना चाहती थी लेकिन अभिनेत्री कभी नहीं बनना चाहती थी. मैं पहली बार किसी ऐसी शख़्सियत का इंटरव्यू कर रहा हूं जो बाई बनना चाहती थीं लेकिन इतनी बड़ी अभिनेत्री बन गईं. मैथ्स से मॉडलिंग की दुनिया में कैसे आईं? शुरू में मैंने मॉडलिंग नहीं की थी. पहली बार मैं सीधे मिस इंडिया बनने के लिए रैंप पर चली थी. मेरा पहला पोर्टफ़ोलियो भी मिस इंडिया के लिए ही हुआ था. जब मैं ग्यारहवीं क्लास में थी तो मेरे भाई और मम्मी ने मिस इंडिया के लिए मेरे फ़ोटोग्राफ़्स भेज दिए थे. वहाँ से मुझे फ़ोन आया कि आप मिस इंडिया के प्रीलिम्स के लिए आ जाइए. मैं मिस इंडिया के प्रीलिम्स में गई और फिर फ़ाइनल भी जीत गई. मिस इंडिया बनने के बाद मैंने तीन-चार महीने मॉडलिंग की और फिर मिस वर्ल्ड में गई और वहां भी जीत गई. वापस आई तो फिर फ़िल्मों में आने लगी और मुझे लगा कि साथ में मॉडलिंग करने में भी क्या जाता है तो मैंने यह भी किया. और पढ़ाई का क्या हुआ? मैंने अपनी स्कूलिंग पूरी कर ली और उसके बाद पत्राचार से जयहिंद कॉलेज दाख़िला लिया लेकिन आगे की पढ़ाई पूरी नहीं कर सकी. एक-दो अपवाद को छोड़ दिया जाए तो सौंदर्य प्रतियोगिता जीतकर अभिनेत्री बनने आईं लड़कियां ज़्यादा कामयाब नहीं हो पाईं. ऐसा कुछ नहीं है और यह सब पर लागू नहीं होता. यह व्यक्ति की किस्मत और प्रतिभा पर निर्भर करता है. अगर आप सुष्मिता और ऐश्वर्या के करियर को देखें तो दोनों धूम-धड़ाके के साथ फ़िल्म जगत में आई थीं लेकिन दोनों के करियर एकदम अलग-अलग दिशा में गए. जरूर नहीं है कि सौंदर्य प्रतियोगिता जीतने वाला हर कोई मॉडलिंग और फ़िल्म में ही आए. कई मिस इंडिया और मिस वर्ल्ड डॉक्टर, इंजीनियर, जर्नलिस्ट भी बनी हैं. सुष्मिता ने जब बड़ा ताज जीता था तो लोगों को लगा था कि ऐश्वर्या को क्यों नहीं मिला और आज लोगों को लगता है कि सुष्मिता उतनी सफल क्यों नहीं हुईं. आप क्या कहेंगी? देखिए एक कहावत है वक़्त से पहले और किस्मत से ज़्यादा किसी को नहीं मिलता. सबकी तक़दीर पहले से लिखी हुई है इसलिए आप किसी का उदाहरण देकर इस बारे में कुछ नहीं कह सकते. सुष्मिता और ऐश्वर्या दोनों ने फ़िल्मों में अच्छा काम किया है. सुष्मिता उस समय मिस यूनिवर्स बनीं जब लोगों को उम्मीद थी कि ऐश्वर्या बनेंगी. यह सब किस्मत की बात है. तो किस्मत में भरोसा करती हैं आप? बिल्कुल, मुझे स्कूल से सीधे कोई अभिनेत्री बना सकता है तो वह किस्मत या भगवान ही हैं. कोई ब्यूटी क्वीन जिसको आप बहुत पसंद करती हैं. डायना हेडन, मैं उनको बहुत अच्छे से जानती भी नहीं लेकिन बहुत पसंद करती हूँ. मैं जब मिस वर्ल्ड के लिए अकेली लंदन में थी तो हालचाल पूछने के लिए उनका हमेशा फ़ोन आता था. उस समय वह भी लंदन में पढ़ाई कर रही थीं. प्रतियोगिता से एक दिन पहले भी उन्होंने मुझे फ़ोन किया और कई टिप्स दिए. जीतने के बाद भी उन्होंने वहां मेरी और मेरे माता-पिता की मदद की. मेरे हिसाब से एक मुक़ाम पर पहुँचने के बाद भी जब आप विनम्रता को नहीं भूलते हैं तो वही सफलता है. इसलिए मैं डायना को बहुत पसंद करती हूँ. क्या आप भी ऐसी ही हैं या फिर यह कहना आसान है और स्टार होने के नाते रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ऐसा करना मुश्किल है? मैं ऐसा नहीं मानती. आप जिस तरह की ज़िंदगी जीना चाहते हैं जी सकते हैं. काम से से जुड़ी कुछ मुश्किलें ज़रूर होती हैं. हमारे पेशे में प्राइवेसी को बचाना ज़रूरी होता है. इसके बावजूद आप जिस तरह के इंसान हैं उसी तरह रह सकते हैं और इस पर कोई नियंत्रण नहीं लगा सकता. लोग कहते हैं कि इस पेशे में आकर बदलना तो पड़ता ही है और कुछ लोगों से ऐसे ही बात करनी होती है, एटीट्यूड दिखाना ही पड़ता है. इसके उलट मैं मानती हूँ कि आप जितना अधिक विनम्र रह सकें उतना अच्छा होता. फ़िल्मों में शुरुआत कैसे हुई? मिस वर्ल्ड बनने से पहले वीनस की ओर से मेरे पास ‘हमराज़’ में काम करने के लिए प्रस्ताव था. मेरी पहली फ़िल्म ‘हमराज़’ होनी थी लेकिन मैं मिस वर्ल्ड बनने के बाद इसे कर नहीं सकी. अब्बास-मस्तान और मैंने यह तय किया कि बाद में हम कोई फ़िल्म साथ करेंगे और ‘ऐतराज’ की. जब प्रस्ताव मिलने लगे तो मैंने सोचा कि करके देखते हैं और इस तरह फ़िल्मों में आ गई. अपनी कौन सी फ़िल्म सबसे अधिक पसंद है? 'मुझसे शादी करोगी' मुझे काफ़ी पसंद है और लोगों ने भी ख़ूब पसंद किया था. इसके अलावा 'कृष' भी मुझे बहुत पसंद आई.
कॉमेडी, भाव प्रधान और एक्शन सभी तरह के रोल किए हैं आपने. लेकिन प्रियंका चोपड़ा के नज़दीक क्या है? लोग कहते हैं कि आप भारत की कैथरीन ज़ेटा जोंस हैं. यह बताना तो बहुत मुश्किल है. मुझमें थोड़ा-बहुत सबकुछ है. मैंने थोड़ा-बहुत एक्शन 'डॉन' में किया था और अब 'द्रोण' में कर रही हूँ. इसके अलावा मैंने किसी भी फ़िल्म में एक्शन नहीं किया है. मैंने सोचा नहीं था कि एक्शन कर पाऊंगी लेकिन जब किया तो बहुत मज़ा आया. तो क्या इसके लिए जिम गई थीं और वेटलिफ़्टिंग की थीं? वेटलिफ़्टिंग की ज़रूरत नहीं होता है, बस शरीर को फुर्तीला बनाना होता है. इसके लिए मार्शल आर्ट और गतका की ट्रेनिंग ली थी. डांस आराम से कर लेती हैं क्या? सबलोग अच्छे डांसर नहीं होते. जब मैंने फ़िल्मों में शुरुआत की थी तो मैं अच्छा डांस नहीं कर पाती थी. मैंने डेढ़ साल तक कथक सीखा. अच्छा डांस करने के लिए अपने ऊपर विश्वास होना चाहिए. अगर ख़ुद पर विश्वास हो और आप ग़लत स्टेप भी करेंगे तो वह स्टाइल बन जाएगा. क्या आपको लगता है कि साथ काम करने वाले फ़िल्मी सितारे प्रतिस्पर्धा से ऊपर उठकर अच्छे दोस्त हो सकते हैं? मुझे लगता है कि हर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा है और इसकी ज़रूरत भी है. अगर प्रतिस्पर्धा नहीं हो तो कोई अच्छा काम करने और सफल होने की कोशिश ही नहीं करेगा. कोई अगर कहता है कि प्रतिस्पर्धा में उसका विश्वास नहीं है तो या तो वो झूठ बोल रहे हैं या फिर उनको सफल होना नहीं आता. इसलिए प्रतिसपर्धा तो होनी चाहिए लेकिन यह भी ज़रूरी है कि वह स्वस्थ हो. कभी-कभी दांव पर इतना कुछ लगा होता है कि ग़लतफ़हमी हो जाती है. लेकिन लोग अगर इन सब चीज़ों पर ध्यान न दें और काम से काम रखें तो आपकी सारी ऊर्जा काम में लगेगी. ऐसा कोई निर्माता, निर्देशक जिसके साथ काम आप बहुत काम करना चाहती हैं लेकिन अब तक काम ही नहीं किया है? ऐसे बहुत से लोग हैं. यश चोपड़ा, करन जौहर और संजय लीला भंसाली हैं. करन की कंपनी के प्रोडक्शन में बनी फ़िल्म में काम किया है लेकिन डायरेक्शन में बनी फ़िल्म में काम नहीं किया है. ये ऐसे लोग हैं जिनके साथ हर नया कलाकार काम करना चाहता है. यह लिस्ट देखकर मुझे काफ़ी आश्चर्य हो रहा है कि आप टॉप स्टार हैं और इन लोगों के साथ काम तक नहीं किया है. यह ज़रूरी नहीं है कि इन लोगों के साथ काम करके ही कोई टॉप स्टार बन सकता है. मैं भाग्यशाली हूँ कि लोगों ने मेरी फ़िल्मों को पसंद किया है. इसके लिए मैं किस्मत को ढेर सारा और कठिन मेहनत को थोड़ा-सा श्रेय दूंगी. ऐसा कोई अभिनेता जिसके साथ काम करने की तमन्ना है? मैंने आमिर ख़ान के साथ काम नहीं किया है और उनके साथ रोल करने की बहुत इच्छा है. इसके अलावा मैंने सैफ़ अली ख़ान के साथ भी नहीं किया है. ऐसी कोई अभिनेत्री जिसके साथ काम करने की बहुत ज़बरदस्त इच्छा हो? काजोल के साथ काम करने की बहुत इच्छा है. मैं उनकी ज़बरदस्त प्रशंसक हूं. मुझे लगता है कि मैं तो उनके सामने खड़ी भी नहीं हो पाऊंगी और मेरी बोलती बंद हो जाएगी. लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो मैं उनके साथ काम करना चाहूँगी. कोई ऐसा रोल जो करना चाहेंगी? मैंने लगभग सब तरह के रोल किए हैं लेकिन पीरियड फ़िल्मों में काम नहीं किया है, अगर ऐसा कोई मौक़ा मिला तो ज़रूर करना चाहूँगी. फ़िल्म इंडस्ट्री की कौन सी बात आपको नापसंद हो? बिना कारण के जो अफ़वाह उड़ जाती हैं वह मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है. मेरे साथ तो ऐसा कई बार हो चुका है कि मैं जिस आदमी को जानती भी नहीं या जो बात हुई ही नहीं उससे जुड़ी अफ़वाह उड़ जाती है. अगर कुछ है ही नहीं और आपके बारे में कोई कुछ भी कहे तो इसका असर पड़ता है क्या? अगर आपके बारे में कोई बुरा कहे तो असर तो पड़ता ही है. मैं भी एक इंसान हूं, किसी की बहन और किसी की बेटी हूँ. अगर किसी बात से मेरे परिवार को असर पड़ता है तो मैं भी प्रभावित होऊँगी ही. अगर मैं अकेले होती तो मुझे इन बातों की चिंता नहीं होती. ऐसी कोई बात जिसकी वजह से फ़िल्म इंडस्ट्री बहुत पसंद है? हमारी फ़िल्म इंडस्ट्री की एक ख़ासियत है कि आप कभी भी अकेला महसूस नहीं करते. अगर आप किसी भी समस्या में हैं तो पूरी इंडस्ट्री आपके साथ खड़ी हो जाती है. ऐसा सबके साथ होता है या फिर आप बड़े स्टार हों तभी होता है? मैंने देखा है कि पुराने स्टार या पुराने तकनीशियन भी किसी समस्या में हों तो पूरी इंडस्ट्री उनके साथ होती है. ऐसा मैंने किसी इंडस्ट्री में नहीं देखा है. अगर आप अभिनेत्री नहीं होतीं और मैथ्स की प्रोफ़ेसर नहीं बनना चाहतीं, तो क्या बनतीं? मैं एयरोनॉटिकल इंजीनियर बनना चाहती थी. मैं मैथ्स, फ़ीजिक्स और केमिस्ट्री लेकर पढ़ रही थी. आपकी पसंद किस तरह की होगी? यानी आपको किस तरह का लड़का पसंद होगा? मेरी पसंद बहुत ख़ास है. अगर ‘ड्रीम मैन’ के बारे बात करूं तो लिस्ट बहुत लंबी हो जाएगी. मैं मोटामोटी आपको बता देती हूँ. उसे अच्छा दिखना ही चाहिए लेकिन उससे ज़्यादा ज़रूरी है कि उसका व्यक्तित्व शानदार हो. हँसना मुझे बहुत अच्छा लगता है इसलिए उसका ख़ुशमिज़ाज होना ज़रूरी है. उसे लंबा होना चाहिए और वह जब मुझसे कोई बात कहे तो ईमानदारी के साथ कहे. आपका पसंदीदा पहनावा? साड़ी, क्योंकि जितनी ख़ूबसूरत कोई औरत साड़ी में लगती है उतनी किसी और ड्रेस में नहीं लग सकती. आपका पसंदीदा मेकअप? काजल या मसकारा. आपकी पसंदीदा फ़िल्म? दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे. |
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