एशियन गेम्स में कितना चमकेंगे भारत के ये एथलीट

    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

चीन के हांगज़ो शहर में 19वें एशियाई खेलों का आयोजन हो रहा है. इसमें बहुप्रतिक्षित एथलेटिक्स के मुक़ाबले इसी सप्ताह 29 सितंबर से शुरू होंगे. इनका समापन 5 अक्तूबर को होगा.

इन एशियाई खेलों में 100 से अधिक पदक जीतने का सपना संजोए पूरे भारतीय दल को भी एथलेटिक्स के मुक़ाबले शुरू होने का शिद्दत से इंतज़ार है. दरअसल पदक तालिका में भारत को असली रंगत एथलेटिक्स से ही मिलने की उम्मीद है.

इसकी ख़ास वजह है भारत को 2018 के एशियन गेम्स में एथलेटिक्स के 20 पदकों समेत 16 स्वर्ण, 23 रजत और 31 कांस्य पदक मिले थे. इस तरह भारत ने कुल 70 पदक अपने नाम किए थे.

भारत ने पिछले एशियाई खेलों में एथलेटिक्स में आठ स्वर्ण, नौ रजत और तीन कांस्य पदक जीते थे.

भारत के स्वर्ण पदक विजेताओं में शॉट पुट में तेजिन्दरपाल सिंह तूर, नीरज चोपड़ा ने जैवलिन थ्रो, मंजीत सिंह ने 800 मी., राजीव अकोकिया- मोहम्मद अनस - हिमा दास - एमआर पुव्वम्मा ने 4 गुणा 400 मी. रिले मिश्रित, अरपिंदर सिंह ने पुरुषों की त्रिकूद, स्वपना बर्मन ने महिला हेप्टथलॉन, जिनसन जॉनसन ने पुरुषों की 1500 मी. दौड़, एमआर पुव्वप्पा, सरिताबेन गायकवाड़, हिमा दास और वीके विस्मया ने महिलाओं की 4 गुणा 400 मीटर रिले शामिल थे.

नीरज चोपड़ा- इतिहास बना सकते हैं

भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा को आज गोल्डन आर्म थ्रोअर भी कहा जाता है.

उन्होंने पिछले टोक्यो ओलंपिक के अलावा विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीता है. उनसे स्वर्ण पदक की उम्मीद तो है ही, साथ ही वह एक अनोखे रिकार्ड की बराबरी भी कर सकते हैं.

अगर वह हांगज़ो में अपने ख़िताब का बचाव करते हैं तो वह ऐसा कारनामा करने वाले पहले भारतीय और कुल दूसरे जैवलिन थ्रोअर होंगे.

उनसे पहले पाकिस्तान के मोहम्मद नवाज़ ने साल 1954 के मनीला और 1958 के टोक्यो एशियन गेम्स में लगातार दो बार जैवलिन थ्रो में स्वर्ण पदक जीते थे.

इन दो एशियाई खेलों में एक तरह से जैवलिन थ्रो में पाकिस्तान की तूती बोली, क्योंकि जहॉ मोहम्मद नवाज़ ने स्वर्ण पदक जीते वहीं पाकिस्तान के ही जलाल ख़ान ने रजत पदक अपने नाम किए थे.

लंबी दूरी के धावकों पर है दारोमदार

हांगज़ो एशियाई खेलों में भारत के कुल 655 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं. इनमें एथलेटिक्स के 35 पुरुष और 33 महिला खिलाड़ियों सहित 68 खिलाड़ी शामिल हैं.

ट्रैक इवेंट में जिनसन जॉनसन और अजय कुमार सरोज 1500 मी. में हिस्सा लेंगे. इन दोनों धावकों में पदक जीतने की क्षमता है, ख़ासकर जिनसन जॉनसन में.

उन्होंने पिछले एशियाई खेलों में भी इसी स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था. तब उन्होंने 3:44:72 का समय निकाला था.

बहरीन के मोहम्मद अयूब ने रजत और भारत के मंजीत सिंह ने कांस्य पदक जीता था. इसके अलावा जिनसन जॉनसन ने पिछले एशियाई खेलों में 800 मी. में भी हिस्सा लिया और रजत पदक जीता.

स्वर्ण पदक भारत के ही मंजीत सिंह के हिस्से आया. जिनसन की यह कामयाबी बताती है कि वह मध्यम और लंबी दूरी में पूरा दमख़म रखते हैं.

एशियाई खेलों के अलावा जिनसन 2015 में वुहान में हुई एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 800 मी. में रजत और 2017 में भुवनेश्वर में हुई एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 800 मी. में कांस्य पदक जीत चुके हैं.

जिनसन जॉनसन 32 साल के हैं और यह शायद उनका आख़िरी एशियन गेम्स हो, इसलिए वह पदक जीतकर इसे यादगार बनाना चाहेंगे.

1500 मी. में ही जिनसन के साथ अपनी चुनौती पेश करेंगे अजय कुमार सरोज. अजय 26 साल के युवा धावक हैं. अनुभव की उनके पास कोई कमी नहीं है.

वह साल 2015 के सैफ़ खेलों में कांस्य और साल 2016 के इन्हीं खेलों में स्वर्ण जीत चुके हैं. एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी वह 2019 दोहा में रजत, 2017 भुवनेश्वर और 2023 बैंकाक में स्वर्ण पदक अपने नाम करने में कामयाब रहे.

कई विधा में माहिर हैं अविनाश साब्ले

5000 मी. और 3000 मी. स्टीपलचेस में अविनाश साब्ले से पदक की उम्मीद इसलिए की जा सकती है, क्योंकि उन्होंने पिछले साल बर्मिंघम में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में 3000 मी. स्टीपलचेस स्पर्धा में रजत पदक जीता.

और 2019 में दोहा में हुई एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में इसी स्पर्धा 3000 मी. स्टीपलचेस में भी रजत पदक जीता.

पिछले एशियाई खेलों में अविनाश साब्ले एंकल इंजरी के कारण हिस्सा नहीं ले सके थे.

3000 मी. स्टीपलचेस में वह राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक भी हैं. 5000 मी. में भी 13:25:65 के साथ उनके नाम ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड है.

वह हॉफ मैराथन के भी माहिर हैं. ऐसे में उनसे पदक की उम्मीद तो है ही.

तेजस्विन शंकर से उम्मीदें

24 साल के तेजस्विन शंकर वैसे तो एथलेटिक्स में हाई जंप में महारथ रखते हैं. वह हाई जंप में ही पिछले बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में भारत को कांस्य पदक भी दिला चुके हैं.

लेकिन वह डेकेथलॉन इवेंट में भी अपना जलवा दिखा चुके हैं. उन्होंने इसी साल बैंकाक में हुई एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में डेकेथलॉन में भारत को कांस्य पदक दिलाया.

वहां जापान के युमा मारूयामा ने स्वर्ण और थाईलैण्ड के सुथ्थीसाक सिंगखोन ने रजत पदक जीता था.

असल में डिकेथलॉन एथलेटिक्स की सबसे मुश्किल विधा है. इसमें खिलाड़ी 100 मी., लॉग जंप, हाई जंप, 400 मी., 110 हर्डल्स, शॉट पुट और 1500 मी. दौड़ सहित 10 स्पर्धाओं में हिस्सा लेता है.

इनमें मिले अंकों के आधार पर विजेता का फ़ैसला होता है. अगर तेजस्विन शंकर अपने इंवेट वाले दिन पूरी तरह फ़िट रहे तो वह भी भारत को पदक दिला सकते हैं.

पारुल चौधरी की दावेदारी

28 साल की पारुल चौधरी 5000 मी. और 3000 मी. में अपने नाम नेशनल रिकॉर्ड रखती हैं. इसलिए उनकी क्षमताओं पर कोई संदेह नहीं है.

एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उनके नाम 5000 मी. में रजत और कांस्य पदक है. रजत पदक उन्होंने इसी साल बैंकाक में हुई एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में जीता है.

साल 2019 में दोहा में हुई एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने कांस्य पदक जीता.

इसी साल उन्होंने बैंकाक में हुई एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 3000 मी. स्टीपलचेस में स्वर्ण पदक भी जीता. इससे उनकी एशियाई खेलों की तैयारी और फ़ॉर्म का पता चलता है.

पारुल चौधरी ने इसी साल अगस्त में बुडापेस्ट में हुई विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 3000 मी. स्टीपलचेस में अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय निकालते हुए नेशनल रिकॉर्ड बनाया.

इससे उन्हें 2024 में होने वाले पेरिस ओलंपिक का टिकट भी मिला.

पारुल चौधरी भी हांगज़ो में पदक की प्रबल दावेदार हैं.

हेप्टथलॉन में स्वपना बर्मन

स्वपना बर्मन हांगज़ो में शायद उम्मीदों का भार अपने कंधों पर लेकर उतरें क्योंकि वह पिछले एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक विजेता हैं.

इसके बाद उन्होंने दोहा में 2019 में हुई एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक भी जीता था.

इससे पहले साल 2017 में भुवनेश्वर में हुई एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में वह स्वर्ण पदक जीत चुकी थीं.

स्वपना बर्मन की स्पर्धा में फ़िटनेस का बड़ा रोल है, क्योंकि इसमें पदक पाने के लिए खिलाड़ी को 100 मी. हर्डल्स, हाई जंप, शॉट पुट, 200 मी., लॉग जंप और 800 मी. जैसी कुल सात स्पर्धाओं में अंक जुटाने पड़ते हैं.

जो भी हो स्वपना बर्मन और दूसरे एथलीटों ने अपना जलवा दिखाकर पदक जीतने के लिए कमर कस ली है. उनके जोश को बढ़ाने के लिए दल में नीरज चोपड़ा भी हैं.

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