भारत की महिला हॉकी टीम क्या एशियाई खेलों में जीत पाएगी गोल्ड?

    • Author, मनोज चतुर्वेदी
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

सविता पूनिया को जकार्ता एशियाई खेलों में किए प्रदर्शन को सुधारकर हांगझू में गोल्डन प्रदर्शन का पूरा भरोसा है.

भारतीय महिला हॉकी टीम के पिछले एक साल के शानदार प्रदर्शन से यह भरोसा बना है. भारतीय महिला हॉकी टीम यदि इन खेलों में स्वर्ण पदक जीत जाती है, तो उसे अगले साल पेरिस में होने वाले ओलंपिक खेलों में सीधे प्रवेश मिल जाएगा.

सविता भारतीय महिला हॉकी टीम के प्रदर्शन में पिछले एक दशक में आए सुधार की वजह देश में सुविधाओं में हुए ज़बरदस्त इज़ाफे़ को मानती हैं. वह कहती हैं कि खिलाड़ियों की प्रशिक्षण सुविधाओं में सुधार होने के साथ उन्हें भरपूर अनुभव भी मिला है.

सविता ने कहा, ''मैंने जब 2008 में हॉकी खेलना शुरू किया था, तब स्थितियां इतनी अच्छी नहीं थीं. वह दौर था, जब कुछ खिलाड़ी तो दो वक्त ढंग का खाना भी नहीं खा पातीं थीं. मुझे भी नौ साल खेलने के बाद नौकरी मिली थी. पर मौजूदा समय में खिलाड़ियों ने अपने परिवार के लिए अच्छे मकान बना दिए हैं. साथ ही सभी खिलाड़ियों के पास अच्छी नौकरियां भी हैं.''

कैंप में रूपिंदर ने दी मज़बूती

मौजूदा समय में पेनल्टी कॉर्नरों को गोल में बदलने की क्षमता पर परिणाम निर्भर रहने लगे हैं. भारतीय टीम ने हांगझू रवाना होने से पहले बेंगलुरु के साई सेंटर में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में इस क्षेत्र में खासी मेहनत की है. इसका परिणाम देखने को मिल सकता है.

पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलने की कला में रूपिंदर पाल की क्षमता से हम सभी सभी वाकिफ़ हैं. टोक्यो ओलंपिक में भारत को 41 साल बाद पदक दिलाने में रूपिंदर की अहम भूमिका रही थी. महिला टीम के शिविर में उनकी सेवाएं ली गईं. इससे महिला ड्रेग फ्लिकरों के विश्वास में खासी बढ़ोतरी हुई है.

टीम में शामिल दीपिका ने बताया कि रूपिंदर पाल ने हमें सिखाया कि पेनल्टी कॉर्नर पर तेजी से आगे आ रहे डिफेंडरों से गेंद को कैसे बचाएं. उन्होंने बताया कि किस तरह से फ्लिक लगाकर गोल भेदने का प्रयास करें. दीपिका कहती हैं कि रूपिंदर के सिखाने से इस क्षेत्र में काफी सुधार हुआ है.

ग्रुप चरण में दिक्कत होने की संभावना कम

भारतीय टीम को दक्षिण कोरिया, मलेशिया, हांगकांग और सिंगापुर के साथ पूल-ए में रखा गया है. रैंकिंग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए प्रदर्शनों के आधार पर देखें तो भारत को किसी भी टीम से कोई खास खतरा नहीं दिखता है.

भारतीय टीम इन खेलों में एफआईएच रैंकिंग में सातवें नंबर की टीम के तौर पर भाग लेने जा रही है. इसमें भाग लेने वाली टीमों में से कोई भी उससे आगे नहीं है. पूल टीमों में सिर्फ दक्षिण कोरिया 12वीं और मलेशिया 19वीं रैंक की टीम है. भारत को मलेशिया से तो शायद कोई दिक्कत न हो पर दक्षिण कोरिया परेशान करने की क्षमता रखती है.

भारत पूल की पहली दो टीमों में स्थान बनाकर सेमीफाइनल में तो पहुंच जाएगी. लेकिन इस दौर में पिछली चैंपियन जापान या मेजवान चीन से मुकाबला होने की संभावना बनेगी. दोनों ही टीमें खासी टफ हैं. जापान रैंकिंग में भले ही भारत से तीन स्थान नीचे है, पर वह हमेशा ही भारत की कड़ी परीक्षा लेता रहा है. जहां तक चीन की बात है तो वह टफ टीम होने के साथ-साथ अपने घर में खेल रही होगी, इसलिए उसे हराने के लिए बेस्ट देने को तैयार रहना होगा.

वंदना, सलीमा और नवनीत की तिकड़ी

सलीमा टेटे और नवनीत कौर दोनों ही मिडफील्डर हैं. दोनों को तेज फर्राटा लगाने के लिए जाना जाता है. सलीमा के बारे में कहा जाता है कि वह यदि गेंद लेकर निकलें तो उन्हें पकड़ना आसान नहीं होता है. वहीं नवनीत कौर खेलते समय दिमाग का भी अच्छा इस्तेमाल करती हैं. आमतौर पर भारतीय हमले बनाने में इन दोनों खिलाड़ियों की भूमिका खासी अहम रहती है.

वंदना कटारिया को मौके का फायदा उठाने वाली फॉरवर्ड माना जाता है. अगर सलीमा और नवनीत के साथ वंदना का तालमेल सही बन गया तो यह तिकड़ी मुश्किल से मुश्किल मैच को भारत के पक्ष में करने की क्षमता रखती है.

ऐसा नहीं है कि इस तिकड़ी पर ही पूरा खेल निर्भर करेगा. डिफेंस में दीप ग्रेस एक्का, गोल में सविता पूनिया के बचाव की भी अहम भूमिका रहने वाली है.

रानी रामपाल की अनदेखी

रानी रामपाल की अगुवाई में भारतीय महिला हॉकी टीम ने टोक्यो ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन करके चौथा स्थान प्राप्त किया था. इसके बाद हैमस्ट्रिंग इंजरी की वजह से रानी लंबे समय तक दूर रहीं. पिछले नेशनल गेम्स से उन्होंने मैदान पर वापसी की. उन्होंने सर्वाधिक 18 गोल जमाने में सफलता प्राप्त की. इसके बाद भी टीम में उनको जगह नहीं मिली.

नेशनल टीम में स्थान न बना पाने से आहत रानी ने एशियाई खेलों की टीम में कई अनफिट खिलाड़ियों को चुनने का आरोप लगा दिया. शायद महिला हॉकी टीम की कोच शोपमेन की निगाह में वह टीम में फिट नहीं बैठती हैं, इसलिए उनके नाम पर विचार ही नहीं किया गया.

शोपमेन ने कहा भी कि हम यदि टीम के हाल के प्रदर्शनों को देखें तो टीम एकजुट होकर आगे बढ़ती दिखती है. वह लगातार सीख भी रही है.

हाल के प्रदर्शनों ने बढ़ाई उम्मीदें

भारतीय महिला हॉकी टीम के हम हाल के प्रदर्शन पर यदि नजर डालें तो हांगझू में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद बंधती है. इसमें सबसे खास पिछले साल दिसंबर में नेशंस कप का जीतना है. इस कप का एफआईएच प्रो लीग में टीमों को अंदर-बाहर करने के लिए किया जाता है.

भारतीय टीम इस कप को जीतकर 2024-25 के एफआईएच प्रो लीग सत्र के लिए क्वालिफाई करने में सफल रही. भारत ने फाइनल में स्पेन की मजबूत टीम को 3-0 से हराया. यह प्रदर्शन भारतीय टीम को दिग्गज टीमों में शुमार कराता है. भारतीय टीम ने पिछले दिनों स्पेनिश हॉकी के सौ साल के अवसर पर आयोजित टूर्नामेंट में भी शानदार प्रदर्शन किया.

कॉमनवेल्थ गेम्स में भी रहा धमाकेदार प्रदर्शन

भारतीय टीम ने बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन कर 16 साल बाद कांस्य पदक पर कब्जा जमाया. यह पदक पाने के लिए भारतीय टीम ने 2018 के गोल्ड कोस्ट गेम्स की चैंपियन टीम न्यूजीलैंड को पेनल्टी शूट आउट में 2-1 से हराया था. इस जीत में सविता पूनिया के शानदार बचाव की भूमिका अहम थी. यह कहा जाता है कि पुरुष हॉकी में गोलकीपर पीआर श्रीजेश वाली छवि महिला हॉकी में सविता पूनिया की है. उन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन के बूते भारत की तमाम जीतों की कहानी लिखी है.

भारतीय टीम 27 सितंबर को सिंगापुर से खेलकर अपना अभियान शुरू करेगी. इसके बाद वह 29 सितंबर को मलेशिया से, एक अक्टूबर को दक्षिण कोरिया से, तीन अक्टूबर को हांगकांग से खेलेगी. सेमीफाइनल और फाइनल क्रमश: पांच और सात अक्टूबर को खेले जाएंगे.

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