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कॉमनवेल्थ खेल 2022: सविता पूनिया ने किस तरह से 16 साल बाद महिला हॉकी में दिलाया मेडल
- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स की महिला हॉकी में पोडियम पर आखिरकार चढ़ गई.
भारत को कांस्य पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाली कप्तान सविता पूनिया रहीं. उन्होंने पेनल्टी शूटआउट तक खिंचे मुकाबले में पिछली चैंपियन न्यूजीलैंड पर 2-1 से विजय दिलाई. दोनों टीमों के बीच निर्धारित समय में एक-एक की बराबरी रही.
पर भारत का मुकाबले को शूटआउट तक खींचने में उसकी ख़ुद की ग़लती का योगदान रहा. खेल समाप्ति से एक मिनट पहले तक भारत को 1-0 की बढ़त मिली हुई थी और लगने लगा था कि भारत निर्धारित समय में ही कांस्य पदक को जीत लेगा. लेकिन अंतिम क्षणों में नेहा गोयल की ग़लती से न्यूजीलैंड को पेनल्टी कॉर्नर मिला.
यहां रोस टिनान की शॉट पर गोलकीपर से गेंद रिबाउंड होने पर नवनीत के गोल के सामने कैरिड होने पर न्यूजीलैंड को पेनल्टी स्ट्रोक दिया गया. इस पर ओलिवर मैरी ने गोल करके मुक़ाबला एक-एक कर दिया.
पेनल्टी शूटआउट में भारतीय कप्तान सविता पूनिया ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ सेमीफाइनल में जो ग़लती की थी, उसे भुलाकर वह काम किया, जिसके लिए वह जानी जाती हैं. उनके प्रदर्शन से यह कभी लगा ही नहीं कि वह ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ खेलने वाली सविता ही हैं.
सविता ने किया ज़ोरदार बचाव
न्यूजीलैंड की मेगन हल पहली पेनल्टी पर गोल जमाने में सफल हो गई. इसके बाद संगीता के असफल होने पर एक बार तो लगा कि शायद आज भारत का दिन नहीं है.
इसके बाद होप राल्फ सविता को तो गच्चा देने में सफल हो गई पर उनके पुश पर गेंद गोल बार से टकराने के बाद गेंद गोल लाइन के अंदर जाने के बजाय बाहर आ गई और यह गोल नकार दिया गया.
यह मौका था, जब लगा कि भाग्य भारत के साथ है. इसके बाद भारत के लिए सोनिका और नवनीत कौर के गोल करने से और न्यूजीलैंड की केटी ओडोर को गोल जमाने से सविता के रोकने से भारत को बढ़त मिल गई.
इस समय स्थिति यह थी कि नेहा गोयल यदि गोल जमा देती हैं तो भारत कांस्य पदक जीत जाएगा. लेकिन वह गोलकीपर को छकाने के प्रयास में इतने मुश्किल कोण पर पहुंच गई कि वहां से गोल भेदा नहीं जा सका.
इससे न्यूजीलैंड की फिर से खेल में वापसी हो गई. लेकिन सविता पूनिया ने ओलीविया शेनोन को गोल जमाने से रोककर भारत को जीत दिलाने के साथ कांस्य पदक जिता दिया.
16 साल बाद मिला पदक
आखिरी क्षणों की ग़लती से न्यूजीलैंड को खेल में वापसी करने का मौका मिला. पर भारतीय टीम चार साल पहले गोल्ड कोस्ट में पदक गंवाने की ग़लती करने को तैयार नहीं थी.
मैच में उतार-चढ़ाव ज़रूर आए पर भारतीय टीम कांस्य पदक जीतने में कामयाब हो ही गई.
भारत इन खेलों में 16 साल बाद पदक जीता है और उसका यह पहला कांस्य पदक है. भारत ने इससे पहले आखिरी बार 2006 में रजत पदक जीता था और इससे चार साल पहले 2002 में गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया था.
भारतीय फिनिश सुधार की ज़रूरत
भारतीय टीम पहले हाफ में भले ही कोई पेनल्टी कॉर्नर नहीं पा सकी. पर वंदना, नवनीत, सलीमा और संगीता कुमारी अच्छे तालमेल से लगातार हमले बनाकर न्यूजीलैंड के डिफेंस की परीक्षा लेती रहीं. इसका उन्हें हाफ टाइम से दो मिनट पहले फायदा भी मिला.
इस मौके पर नवनीत का सर्किल के टॉप से लिए शॉट पर गालकीपर ग्रेस ओहलन से रिबाउंड होने के बाद सर्किल में दाहिनी तरफ संगीता के कब्जे में आई और उन्होंने गोल के सामने क्रास फेंका जिस पर गोलकीपर गच्चा का गई.
गोल के सामने खड़ी शर्मिला के सामने खाली गोल था, पर वह गेंद पर कब्जा ही नहीं बना सकीं. पर उनके पीछे खड़ी सलीमा टेटे ने रिवर्स शॉट से गोल भेद दिया.
रेफरल काम आया
भारत ने एक अच्छा काम यह किया कि बढ़त बनाने के बाद भी हमलावर रुख जारी रखा. पर न्यूजीलैंड के डिफेंस की तारीफ़ करनी होगी कि उन्हें भारतीय खिलाड़ियों को सर्किल में अच्छे से टैकल किया.
साथ ही उन्होंने कई बार बहुत अच्छा जवाबी हमले बनाए. कुछ मौकों पर तो भारत की किस्मत अच्छी थी कि उसका गोल नहीं भिदा. खेल के 42वें मिनट में तो न्यूजीलैंड ने गोल भेदकर एक-एक की बराबरी भी कर ली थी.
लेकिन भारत ने इस गोल के ख़िलाफ़ रेफरल लिया. उसका कहना था कि गेंद के सर्किल में आने से पहले पांच मिनट ट्रेवल नहीं की थी. भारत का रेफरल सही साबित हुआ और न्यूजीलैंड का गोल नकार दिया या.
यह सही है कि चारों क्वार्टर में भारत और न्यूजीलैंड का गेंद पर कब्जा लगभग बराबर तो रहा पर भारतीय हमलों की तादाद कहीं ज्यादा रही. दिक्कत थी तो वह उन हमलों को गोल की शक्ल नहीं दे पाना था. इसमें न्यूजीलैंड के डिफेंस ने भी अहम भूमिका निभाई. जब कभी डिफेंडर गच्चा खा भी गए तो उनकी गोलची ग्रेस गोल पर मुस्तैद नज़र आईं. पर भारतीय खिलाड़ियों की तारीफ़ करनी होगी कि उन्होंने एक के बाद एक हमले बेकार होने पर कभी दिल छोटा नहीं किया और इस सिलसिले को आखिर तक बनाए रखा.
न्यूजीलैंड ने निर्धारित समय ख़त्म होने से चार मिनट पहले अपनी गोल कीपर को बाहर बुलाकर 11 खिलाड़ियों को हमले में लगाने की रणनीति अपनाई और यह रणनीति कारगर साबित हुई. इस दौरान ही भारतीय खिलाड़ी लालरेमसेमी के ग़लत टैकलिंग करने से उन्हें पीला कार्ड दिखा दिया गया. इससे इस महत्वपूर्ण मौके पर भारत के 10 खिलाड़ी रहने से न्यूजीलैंड को बराबरी का गोल निकालने में मदद मिल गई.
भारत ने खेल की शुरुआत आक्रामक ढंग से करने का प्रयास किया. भारतीय टीम कुछ अच्छे हमले भी बनाए. पर न्यूजीलैंड के डिफेंस की तारीफ़ करनी होगी कि उन्होंने इन हमलों को विफल ही नहीं किया, बल्कि गेंद क्लियर करते समय दिमाग ठंडा बनाए रखने से उन्होंने पहले हाफ़ में एक भी पेनल्टी कॉर्नर नहीं दिया.
इस मामले में तो न्यूजीलैंड की तारीफ़ बनती ही है. हालांकि बाद में भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिले भी पर उनमें से किसी को भी गोल में नहीं बदला जा सका.
यही नहीं न्यूजीलैंड ने कुछ मौकों पर अच्छे हमले बनाकर भारतीय डिफेंस की परीक्षा भी ली. हाफ टाइम से तीन मिनट पहले मेगन हल ने बाएं छोर से फर्राटा लगाया और वह तीन भारतीय डिफेंडरों को छकाने में सफल हो गई और गोल के सामने क्रास फेंका पर वहां मौजूद न्यूजीलैंड की खिलाड़ी गेंद को गोल में डिफलेक्ट करने से चूक गई.
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