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शॉर्ड मारिन: भारतीय महिला हॉकी टीम के ‘रियल कोच’ जिन्होंने टीम को जीत की आदत लगाई
- Author, हरपाल सिंह बेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
नीदरलैंड्स के रहने वाले 47 वर्षीय शॉर्ड मारिन भारतीय महिला हॉकी टीम के पहले विदेशी कोच हैं.
ओलंपिक में भारतीय महिला टीम के शानदार खेल के बाद शॉर्ड मारिन भारत में हॉकी के नए सितारे बन गए हैं.
महिला हॉकी की मज़बूत टीम ऑस्ट्रेलिया पर जब भारत ने जीत हासिल की तो शॉर्ड मारिन ने अपनी पत्नी को संबोधित करते हुए ट्वीट किया, 'परिवार वालों माफ़ करना मुझे अभी घर लौटने में और देर होगी.'
उनका ये ट्वीट कुछ ही मिनट में वायरल हो गया था. क्रिकेट के दीवानों के देश में इस ट्वीट का वायरल हो जाना भी हैरानी की बात ही थी. इसके बाद उन्होंने अभिनेता शाहरुख़ ख़ान के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा कि वो 'रियल कोच' हैं जो ख़ूब वायरल हुआ.
शॉर्ड मारिन ने एक दशक तक नीदरलैंड्स के शीर्ष क्लब डेन बोश के साथ डच प्रीमियर लीग में हॉकी खेली. उनकी टीम ने साल 1998 और 2001 में इस चैंपियनशिप को जीता था.
वो 1999 में यूरो हॉकी क्लब चैंपियनशिप जीतने वाली टीम का भी हिस्सा थे.
जूनियर डच हॉकी टीम के कोच भी रहे
शॉर्ड मारिन 2011 से 2014 तक जूनियर डच हॉकी टीम के कोच रहे. नई दिल्ली में 2013 में हुए जूनियर हॉकी कप में उनकी टीम तीसरे नंबर पर रही थी.
नीदरलैंड्स के हर्टोजनबोश में पैदा हुए शॉर्ड मारिन भारत आने से पहले नीदरलैंड्स की महिला हॉकी टीम के साथ जुड़े थे. उनके नेतृत्व में टीम एंटवर्प में 2015 में हुए हॉकी वर्ल्ड लीग के सेमीफ़ाइनल में पहुँची थी और गोल्ड हासिल किया था.
हॉलैंड की टीम चैंपियंस ट्रॉफ़ी में कांस्य जीती
उन्हीं के नेतृत्व में नीदरलैंड्स की टीम ने साल 2014 की चैंपियंस ट्रॉफ़ी में कांस्य पदक हासिल किया था और 2015 यूरो हॉकी नेसंश चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था.
हालांकि इन जीतों के बाद उनके और नीदरलैंड्स की हॉकी फ़ेडरेशन (केएनएचबी) के बीच संबंध ख़राब हो गए और उन्होंने टीम का साथ छोड़ दिया.
शॉर्ड मारिन के पास सीनियर पुरुष हॉकी टीम को कोच करने का कोई अनुभव नहीं था, ऐसे में जब नीदरलैंड्स के ही रहने वाले और भारत की हॉकी टीमों के उच्च प्रदर्शन निदेशक रोएलॉंट ओल्टमैंस ने साल 2017 में शॉर्ड मारिन को भारतीय महिला हॉकी टीम के कोच के तौर पर चुना तो बहुत से लोग हैरान हुए. शॉर्ड मारिन को चार साल के अनुबंध पर रखा गया था.
हालांकि कुछ महीनों के भीतर ही गोल्ड कोस्ट में होने वाले कॉमनवेल्थ खेलों से पहले उन्हें ओल्टमैंस की जगह भारत की पुरुष हॉकी टीम का कोच बना दिया.
अब तक शॉर्ड मारिन के पास नीदरलैंड्स की महिला हॉकी टीम और अंडर-21 टीम को कोच करने का तो अनुभव था लेकिन उन्होंने किसी देश की राष्ट्रीय हॉकी टीम को कोच नहीं किया था.
जब मारिन भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कोच बनाए गए
ऐसे में जब 2018 कॉमनवेल्थ खेलों से पहले शॉर्ड मारिन को भारत की पुरुष हॉकी टीम का कोच बनाया गया तो बहुत से लोगों को इससे हैरानी हुई. हालांकि बाद में शॉर्ड मारिन को वापस महिला टीम के साथ भेज दिया गया था और हरिंदर सिंह को भारतीय पुरुष हॉकी टीम का कोच बना दिया गया था.
2018 में भारत की महिला हॉकी टीम जकार्ता एशियाड में जापान से फ़ाइनल में हार गई और इससे उसका स्वतः टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वॉलिफ़ाई करने का मौक़ा समाप्त हो गया.
इस हार के बावजूद हॉकी इंडिया ने मारिन को ही कोच बनाए रखा. इसकी दो वजहें थीं, पहली तो उनके पास चार साल का अनुबंध था और दूसरा ये कि सभी खिलाड़ी उनकी बहुत तारीफ़ करती थीं.
खिलाड़ी उनके कोचिंग देने के तरीके के साथ बहुत सहज थे.
उन्होंने भारतीय टीम को टोक्यो ओलंपिक तक पहुंचाने की चुनौती ली और वो इसमें कामयाब भी रहे. नवंबर 2019 में भारतीय टीम ने क्वालीफ़ायर मुक़ाबले में अमेरिका की मज़बूत टीम का सामना किया. भारत ने ये मुक़ाबला जीतकर टोक्यो में अपनी जगह पक्की कर ली.
उसके बाद से मारिन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.
एक खिलाड़ी उनके बारे में कहती हैं, "वे बहुत सख़्त अनुशासन रखते हैं लेकिन हमारी बात भी सुनते हैं."
कोरोना महामारी के दौरान मारिन कहां थे?
इसमें कोई शक नहीं है कि टोक्यो ओलंपिक के कांस्य पदक के लिए हुए ऐतिहासिक मुक़ाबले तक भारतीय टीम को पहुंचाने में डचमैन मारिन ने भारतीय महिला हॉकी टीम की काया पलट कर दी है.
महामारी के दौरान वे बेंगलुरू में टीम के साथ ही रहे. हालांकि उनके पास अपने देश लौटकर अपने तीन बच्चों और पत्नी के साथ समय बिताने का मौका था.
जब कोविड महामारी भारतीय टीम के कैंप तक पहुंच गई और आधी हॉकी टीम संक्रमित हो गई तो भी मारिन परेशान नहीं हुए. इससे उनकी साख़ और प्रतिष्ठा और भी बढ़ गई.
उस मुश्किल वक़्त में वे अपनी खिलाड़ियों के साथ खड़े रहे. इससे वो खिलाड़ियों के और भी प्रिय हो गए.
वे डच लीग में अपने साथ खेलने वाली जेनेक शॉपमैन को भी भारतीय टीम के साथ एनेलिटिकल कोच के रूप में ले आए.
शॉपमैन अमेरिका की उसी महिला हॉकी टीम की कोच थीं जो भुवनेश्वर में ओलंपिक क्वालीफ़ायर मुक़ाबले में भारत से हार गई थी.
ऑस्ट्रेलिया से जीत पर क्या बोले मारिन?
टोक्यो ओलंपिक में न सिर्फ़ उन्होंने भारतीय महिला हॉकी टीम को ऐतिहासिक ऊंचाई तक पहुंचाकर शोहरत हासिल की बल्कि उनके विचार भी खासे लोकप्रिय हो रहे हैं.
ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ भारत की ऐतिहासक जीत के बाद मारिन ने कहा, "इससे साबित होता है कि सपने सच होते हैं. यदि आप विश्वास करना शुरू करते हैं और अपने विश्वास को मज़बूत करते जाते हैं और मेहनत करते जाते हैं तो चीज़ें होने लगती हैं. आपको अपने सपने पूरे करने के लिए मेहनत करनी होती है और आज हमने यही किया है."
"मैंने अपनी टीम को ये समझाया था कि सबसे महत्वपूर्ण ये होता है कि आप वर्तमान में रहे और ये ना सोचें कि अगर ऐसा होता तो क्या होता. एक एथलीट के लिए ये मुश्किल भी है क्योंकि आपके दिमाग़ में कई चीज़ें एक साथ चल रही होती हैं. जैसे की आप सोच रहे होते हैं कि यदि हम जीत गए तो क्या होगा, अगर हम हार गए तो क्या होगा, अगर मैं गेंद को नहीं रोक पाया तो क्या होगा. इसलिए मैंने अपनी टीम को एक फ़िल्म दिखाई, ये समय के साथ रहने के बारे में थी. और मुझे लगता है कि ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ मैच में इससे बड़ा फ़र्क़ पड़ा."
"मैंने लड़कियों से अभी कहा है कि इस वक़्त के मज़े लो और इस यात्रा का आनंद लो, सबसे महत्वपूर्ण यही है. लेकिन पहले ये अहसास करो कि उन्होंने हासिल क्या किया है."
ओलंपिक के लिए रणनीति
अपनी रणनीति के बारे में बताते हुए वे कहते हैं, "ओलंपिक से पहले हम बहुत अधिक प्रैक्टिस मैच नहीं खेल पाए थे तो मैं हर मैच से पहले लड़कियों से यही कहता था कि अपने खेल में सुधार करते जाओ. हमने हर व्यक्तिगत खिलाड़ी के प्रदर्शन को सुधारने पर ज़ोर दिया. जब हम हर खिलाड़ी का प्रदर्शन सुधारते हैं तो टीम का प्रदर्शन अपने आप सुधर जाता है."
"हम जानते थे कि हर मैच जो हम खेल रहे हैं हमें उससे सीखना है क्योंकि हमारे पास ओलंपिक से पहले बहुत मैच नहीं थे. जब हम नीदरलैंड से 1-5 से हारे तो लगा कि सबकुछ बिखर गया है. लेकिन ऐसा नहीं था. हमें बस कुछ छोटे-मोटे सुधार करने की ज़रूरत थी."
ग्रेट ब्रिटेन के ख़िलाफ़ कांस्य पदक के मुक़ाबले का नतीजा जो भी रहा हो, मारिन युवा भारतीय टीम और भारतीय हॉकी के प्रशंसकों के हीरो बन गए हैं.
द्रोणाचार्य अवॉर्ड देने की मांग
एक युवा प्रशंसक ने ट्वीट किया, "उन्होंने बहुत शानदार काम किया है उन्हें द्रोणाचार्य अवॉर्ड दिया जाना चाहिए."
एक अन्य यूज़र ने ट्वीट किया, "सलामी क़ुबूल कीजिए सर, आपकी वजह से ही हम ये ख़ूबसूरत सुबह देख पाए हैं. ईश्वर आप पर कृपा बनाए रखे."
ट्विटर पर एक अन्य प्रसंशक ने लिखा, "इस टीम में विश्वास करने, इस टीम को बनाने के लिए आपका शुक्रिया सर. हमारे पास आपका आभार प्रकट करने के लिए शब्द नहीं है. अब हम मेडल जीतने की उम्मीद करने लगे हैं. अब हमने क्वार्टर फ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया को हरा दिया है. भारत के 130 करोड़ लोग आपका हौसला बढ़ा रहे हैं."
पीएम मोदी ने फ़ोन किया
जैसे कि ये सब नाकाफ़ी हो, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत तौर पर उन्हें फ़ोन किया और भारतीय टीम के साथ किए गए उनके काम के लिए शुक्रिया किया. मारिन ने प्रधानमंत्री को फ़ोन कॉल के लिए शुक्रिया किया और ग्रेट ब्रिटेन के ख़िलाफ़ कांस्य पदक जीतने का भरोसा दिया.
मारिन ने ट्वीट किया था, "आपके प्रेरणादायक फ़ोन कॉल के लिए आपका बहुत शुक्रिया नरेंद्र मोदी सर, मैं आपका संदेश टीम तक पहुंचाऊंगा, हम कांस्य पदक के मुक़ाबले में टक्कर देंगे और भारतीय शेरनियों के लड़ाई को जज़्बे को दर्शाते रहेंगे."
ग्रेट ब्रिटेन के साथ हुए कड़े मुक़ाबले में भारतीय महिला हॉकी टीम 3-4 के अंतर से हार गई. टीम ने टोक्यो ओलंपिक में भले ही पदक ना जीता हो लेकिन भारत की महिला हॉकी को नई पहचान ज़रूर दे दी है.
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