महिला हॉकी: भारत का पेनल्टी शूटआउट में फ़ाइनल का सपना टूटा

    • Author, मनोज चतुर्वेदी
    • पदनाम, खेल पत्रकार

भारतीय टीम का कॉमनवेल्थ गेम्स की महिला हॉकी के फ़ाइनल में खेलने का सपना टूट गया.

उन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल के शूटआउट में 0-3 से हारना पड़ा. निर्धारित समय में दोनों टीमों के बीच 1-1 की बराबरी रही.

भारतीय टीम की पोडियम पर चढ़ने की उम्मीदें अभी भी बनी हुई हैं. वह अब कांस्य पदक के लिए न्यूजीलैंड से खेलेगी. वहीं स्वर्ण पदक का मुक़ाबला ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच होगा.

पेनल्टी शूटआउट में सभी को भारतीय कप्तान सविता पूनिया से उम्मीदें थीं. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए पहली पेनल्टी लेने आई एंब्रोसिया मेलोन को पूरी तरह से कवर करके उनकी पुश को रोक दिया. लेकिन तब ही अंपायर ने यह कहकर कि घड़ी शुरू नहीं हो पाई थी, इसलिए यह पेनल्टी दोबारा ली जाएगी.

इससे सविता की लय कहीं ना कहीं टूट गई और इसके बाद एंब्रोसिया मेलोन, केटलान नोब्स और एमी लॉटन में से किसी को भी गोल जमाने से नहीं रोक सकीं.

वहीं ऑस्ट्रेलियाई गोलकीपर एलीशा पावर ने शानदार बचाव करके लालरेमसेमी, नेहा और नवनीत कौर में से किसी को भी गोल नहीं जामने दिया और अपनी टीम को फाइनल में पहुंचा दिया.

भारत ने मुक़ाबला तो डटकर किया

भारतीय टीम यह मुकाबला हार जरूर गई पर उनके खेल में टोक्यो ओलंपिक में किए प्रदर्शन वाला ही जज्बा दिखा. हम सभी जानते हैं कि ऑस्ट्रेलिया को दुनिया की दिग्गज टीम माना जाता है, ग्रुप मुकाबलों में कोई भी टीम उनके ऊपर गोल तक नहीं जमा सकी थी. लेकिन भारत ने उनके ऊपर दवाब बनाकर गोल जमाकर मैच में बराबरी की.

ऑस्ट्रेलिया के शुरुआत में ही बढ़त बना लेने के बाद भारतीय टीम कभी भी उम्मीदें छोड़ती नजर नहीं आई और लगातार प्रयास करने की वजह से वह खेल 48वें मिनट में बराबरी का गोल जमाने में सफल रही. सुशीला चानू ने लांग कॉर्नर पर गोल के ठीक सामने गेंद डाली और वहां मौजूद वंदना कटारिया ने बिना कोई गलती किए गेंद को गोल की दिशा दे दी.

यह वह समय था, जब खेल पर भारत का पूरा दबदबा नजर आ रहा था. गोल जमाने के बाद पांच मिनट तक भारतीय टीम ताबड़तोड़ हमले बनाकर ऑस्ट्रेलिया को दवाब में लाने में सफल हो गई. लेकिन खराब फिनिश की वजह से वह इस दौरान मिले मौकों को गोल में बदलकर बढ़त बनाने में सफल नहीं हो सकी.

हमलों को सही फिनिश नहीं कर पाने का सामना शुरुआती मैच में भी करना पड़ा. भारतीय खिलाड़ी नवनीत कौर और नेहा गोयल की जितनी तारीफ की जाए, वह कम है.

यह जोड़ी लगातार हमले बनाकर ऑस्ट्रेलिया के डिफेंस को परेशान कर रही थी. शर्मिला और संगीता ने भी हमलों में अच्छा योगदान किया. पर मिले मौकों का सही फायदा नहीं उठा पाने का आखिर में खामियाजा भुगतना पड़ा.

सविता पूनिया का प्रदर्शन रहा शानदार

ऑस्ट्रेलिया की टीम को आक्रामक हॉकी खेलने के लिए जाना जाता है. भारत ने इस मैच में शुरुआत से ही हमलावर रुख अपनाने की रणनीति अपनाई, पर ऑस्ट्रेलिया जल्द ही खेल पर नियंत्रण बनाने में सफल हो गई.

ऑस्ट्रेलियाई फारवर्ड रेबिका ग्रेनर और मारिया विलियम्स लगातार हमले बनाकर भारतीय डिफेंस में दरार बनाने में सफल हो रहीं थीं. पर सविता पूनिया से पार पाना उनके लिए संभव नहीं दिखा. सविता ने कम से कम छह गोल तो बचाए ही.

सविता पूनिया ने ऑस्ट्रेलिया को मिले आठ पेनल्टी कॉर्नरों में से किसी पर भी गोल जमाने का मौका नहीं दिया. सविता की खूबी रहती है कि वह हमले के समय गोल जमाने का प्रयास करने वाले खिलाड़ी का एंगल बहुत अच्छे से कवर करतीं हैं. सविता के इस काम में मोनिका ने भी बहुत अहम योगदान दिया.

भारतीय डिफेंस ने भी बचाव में अच्छा प्रदर्शन किया. पर उनकी कुछ मौकों पर दिक्कत यह रही कि गेंद को क्लियर करने में देरी करके गेंद को छिड़बाने और गलत पास देने से भारतीय गोल कुछ मौकों पर खतरे में पड़ता दिखा. लेकिन दूसरे हाफ में भारतीय डिफेंस ने ज्यादा मजबूती दिखाई.

ऑस्ट्रेलिया का भले ही भारत के खिलाफ रिकॉर्ड अच्छा है पर भारत को टोक्यो ओलंपिक के क्वार्टर फाइनल में जीत पाने का मनोवैज्ञानिक लाभ मिला था. भारतीय टीम पहले क्वार्टर में भले ही एक गोल खा गई पर फिर भी उन्होंने जिस तरह से बराबरी से हमले बनाए, उससे टीम ने उम्मीदें बनाए रखीं.

इस क्वार्टर में भारत की एक कमी दिखी कि कुछ मौकों पर डिफेंस के ढंग से गेंद क्लियर नहीं करने पर अपने ऊपर खतरा बना लिया. खेल के नवें मिनट में एक ऐसे ही मौके पर ऑस्ट्रेलिया को सर्किल के दाहिने गेंद मिली और दो डिफेंडरों को छकाता क्रास गोल के सामने आया और वहां मौजूद रेबेका ग्रेनर ने गेंद को डिफलेक्ट करके गोल में डाल दिया.

भारत को इस क्वार्टर में गोल खाने से पहले गोल जमाने का मौका मिला पर ऑस्ट्रेलिया की अच्छी किस्मत थी, जो उसका गोल नहीं भिदा.

पहले पेनल्टी कॉर्नर पर गुरजीत ने इसे इनडायरेक्ट ढंग से लिया और उनके शॉट पर वंदना की स्टिक तो टच हो गई पर गेंद गोल की दिशा में जाने के बजाय बाएं तरफ गई और वहां मौजूद नवनीत गेंद पर ढंग से नियंत्रण नहीं बना सकी और मौका हाथ से निकल गया. इस मौके पर ऑस्ट्रेलियाई गोलकीपर एलिशा पावर गच्चा खा गई थीं.

भारत ने दूसरे क्वार्टर में भी हमलावर रुख अपनाए रखा पर हमलों को गोल में नहीं बदला जा सका. इसमें ऑस्ट्रेलिया की युवा गोलकीपर एलिशा पावर ने बेहतरीन बचाव करके अहम भूमिका निभाई. इसके अलावा ऑस्ट्रेलियाई डिफेंस ने मुश्किल समय में दिमाग को ठंडा बनाए रखा और कई खतरों को टाला.

ऑस्ट्रेलिया ने इस मुकाबले से पहले खेले ग्रुप के चार मैचों में अपने खिलाफ सिर्फ तीन पेनल्टी कॉर्नर दिए थे. लेकिन इस मैच में भारतीय टीम पहले दो क्वार्टर में चार पेनल्टी कॉर्नर पाने में सफल हो गई. भले ही भारत इनमें से किसी को भी गोल में नहीं बदल सकी पर यह उनके खेल पर दबदबे को जरूर दर्शाती है.

तीसरे क्वार्टर के आखिरी तीन मिनट में ऑस्ट्रेलिया ने हमलावर रुख अपनाकर भारतीय गोल पर खतरा बनाए रखा. उन्हें लगातार पांच पेनल्टी कॉर्नर मिले. पर सविता पूनिया की तारीफ करनी होगी कि उन्होंने चट्टान की तरह डटे रहकर गोल भिदने से बचाए रखा.

यह सच है कि इस तरह से हारने पर किसी भी टीम का मनोबल टूटता है. पर भारत को अभी कांस्य पदक का महत्वपूर्ण मैच खेलना बाकी है, इसलिए उसे इस झटके से उबरकर एक और शानदार प्रदर्शन के लिए तैयार होना होगा ताकि गोल्ड कोस्ट की तरह खाली हाथ आने से बचा जा सके.

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