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कॉमनवेल्थ खेल 2022: वेल्स के एक गोल ने जब बढ़ा दीं धड़कनें... पर वंदना कटारिया ने दिखाया कमाल
- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार
भारतीय टीम ने बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स की महिला हॉकी में लगातार दूसरी विजय प्राप्त कर ली. भारत ने वेल्स को 3-1 से हराया और चार साल पहले गोल्ड कोस्ट में हुई हार का हिसाब भी बराबर कर दिया. भारत ने पहले मैच में घाना को हराया था.
भारत ने पहले मैच के मुकाबले इस मैच में कहीं बेहतर प्रदर्शन किया. भारतीय खिलाड़ियों के बीच बेहतर तालमेल दिखा. पहले मैच और इससे पहले विश्व कप मुकाबलों में पेनल्टी कॉर्नरों को गोल में बदलने की कला में टीम कमज़ोर नज़र आ रही थी.
इसकी वजह ड्रेग फ्लिकर गुरजीत कौर का रंगत में नहीं होना था. लेकिन आज लगा कि उनका टोक्यो ओलंपिक के दौरान दिखाया आत्मविश्वास लौट आया है.
वेल्स ने गोल्ड कोस्ट में खेल समाप्ति से तीन मिनट पहले विजयी गोल जमाया था. इस मैच में भी वेल्स ने जब तीसरे क्वार्टर में पेनल्टी कॉर्नर पर ह्यूजेस के जमाए गोल से बढ़त को कम करके 1-2 किया तो एक बार को लगा कि कहीं वह वापसी तो नहीं कर लेगा.
भारतीय टीम ने इस महत्वपूर्ण मौके पर अपनी धड़कनों पर काबू रखा और आक्रामक रुख अपनाकर खेल पर दबदबा बनाए रखा और इसका उन्हें फायदा भी मिला, क्योंकि पेनल्टी कॉर्नर शॉट पर वंदना कटारिया के डिफलेक्शन से वेल्स को एक और बढ़त मिलने से रह गई और भारतीय टीम का मनोबल ऊंचा बना रहा.
वेल्स के बॉडी प्ले से बचने में कामयाब रहे भारतीय
वेल्स टीम टफ़ खेल खेलने के लिए जानी जाती है. उनकी खिलाड़ियों का फिटनेस स्तर काफी ऊंचा रहने की वजह से वह ज़रूरत पड़ने पर बॉडी प्ले भी करती हैं. लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार तेज़ गति से हमला बनाकर वेल्स को बचाव में व्यस्त करके उनकी वापसी की उम्मीदों को खत्म कर दिया.
भारत ने लगातार दूसरी जीत जरूर प्राप्त कर ली. लेकिन उन्हें इंग्लैंड और कनाडा जैसी टीमों के ख़िलाफ़ खेलते समय हमलों के दौरान फ्लैंक बदलने की भी ज़रूरत पड़ेगी. कई बार देखा गया कि हमारी खिलाड़ी जिस फ्लैंक से हमला बनाती हैं, उससे ही सर्किल में घुसने का प्रयास करती हैं.
इससे सामने वाली टीम को भीड़ बनाकर उन्हें रोकने में आसानी होती है. लेकिन टफ़ टीमों के ख़िलाफ़ यह रणनीति नुकसानदायक साबित हो सकती है.
भारतीय टीम ने दूसरे क्वार्टर में बेहतर खेल का प्रदर्शन करके दो गोल जमाकर 2-0 की बढ़त बना ली. पेनल्टी कार्नर लेने के मामले में भारत ने अपनी रणनीति को बदला और इसका उन्हें फायदा मिला.
गुरजीत ने तेज़ ड्रेग फ्लिक लगाने के बजाय इसे इनडायरेक्ट ढंग से लेने की योजना बनाई. तीसरे पेनल्टी कॉर्नर पर गुरजीत की गोल के बाएं ली शॉट पर वंदना कटारिया ने गेंद को गोल की दिशा देकर 1-0 की बढ़त दिलाई.
भारत को पहली सफलता मिलते ही उनके खेल में पैनापन नज़र आने लगा और उन्होंने दूसरे क्वार्टर खत्म होने से तीन मिनट पहले दूसरा गोल जमा दिया. इस बार गुरजीत ने अपनी शॉट की गति को कम किया. इससे गोलकीपर सहित पूरा डिफेंस गच्चा खा गया और गेंद गोलकीपर के पैर के नीचे से गोल में चली गई.
भारतीय टीम ने वेल्स के ख़िलाफ़ खेल की शुरुआत आक्रामक ढंग से की और वह पहले ही मिनट में पेनल्टी कॉर्नर पाने में सफल भी हो गई. पर पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलने के लिए जिस तालमेल की ज़रूरत होती है, उसमें भारतीय टीम शुरुआत में कारगर होती नहीं दिखी, इस पर गेंद को ढंग से रोका ही नहीं जा सका.
पर गुरजीत कौर ने शॉट तो लिया पर गोलची के गेंद क्लियर करने पर जवाबी हमले में भारतीय गोल खतरे में पड़ता नज़र आया.
खामियों में दिखा सुधार
भारतीय टीम ने घाना के ख़िलाफ़ जिन कमियों का प्रदर्शन किया था, उसमें इस मैच में थोड़ा सुधार नज़र आया. पर उनके प्रदर्शन में और सुधार की गुंजाइश नज़र आ रही है.
भारतीय टीम के घाना की टीम के ख़िलाफ़ 5-0 की जीत से अपना अभियान शुरू करते समय उनके खेल में कई खामियां साफ़ दिखी थीं. सबसे बड़ी खामी तो खेल पर दबदबे को गोलों में बदलना रही. इस मामले में भारतीय टीम उम्मीदों पर खरी उतरती नज़र आई.
असल में ग्रुप में घाना ऐसी टीम है, जिसके ख़िलाफ़ बडे़ अंतर से जीत पाकर गोल अंतर बेहतर किया जा सकता है. इसका फायदा उस समय मिल सकता है, जब ग्रुप की दो मजबूत टीमें इंग्लैंड और कनाडा के ख़िलाफ़ अच्छा परिणाम नहीं आ सके.
भारतीय टीम ने घाना के ख़िलाफ़ तेज़ गति से खेल की शुरुआत करके खेल पर दबदबा बनाने के संकेत दिए. लेकिन घाना ने पहले क्वार्टर में सर्किल में बचाव के लिए भीड़ जमा करके भारत के हमलों को गोल में बदलने से रोके रखा.
घाना उभरती ताकत
लेकिन, दूसरे क्वार्टर से घाना ने अपने को खेल में एडजस्ट कर लिया और चार-पांच मिनट भारतीय गोल पर दबाव बनाकर तो यह जताया कि आने वाले समय में वह ताकत के तौर पर उभर सकते हैं.
हमें याद है कि भारतीय टीम आखिरी बार 2014-15 में वर्ल्ड लीग में घाना से खेली थी, उस समय भारत ने उन्हें 13-0 से धो दिया था. लेकिन तब से लेकर अब तक घाना ने अपने खेल में जबर्दस्त सुधार किया है.
खासतौर से वह अबिगेल के रूप में एक ऐसी गोलकीपर तैयार करने में सफल रहे हैं, जो किसी भी हमले पर अच्छा बचाव करने का माद्दा रखती है. घाना की कमी थी उन्हें मिले मौकों को भुनाने की क्षमता ना होना.
अभी कुछ दिनों पहले विश्व कप में भारतीय टीम की प्रमुख खामी पेनल्टी कॉर्नरों को गोल में नहीं बदल पाना रही थी. लगता है कि इस खामी में अभी सुधार की गुंजाइश बनी हुई है.
घाना जैसी कमज़ोर टीम के ख़िलाफ़ दस पेनल्टी कॉर्नरों में से सिर्फ़ एक को गोल में बदला जा सका. अगर इस तरह का प्रदर्शन इंग्लैंड और कनाडा के ख़िलाफ़ किया तो टीम के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है.
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